-एक ग्रुप को हुआ लहसुन, प्याज, सौंठ, गर्म पानी से लाभ, दूसरे को हुआ काढ़े और अन्य आयुर्वेदिक दवाओं से फायदा

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। नये कोरोना वायरस कोविड-19 महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है। भारत में भी इसकी भयावह स्थिति हो रही है। देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। ऐसे में इससे निपटने की दवाओं को तैयार करने की खबरे आशा की किरणें बन कर आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के सैफई स्थित राजकीय मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा आयुर्वेद और एलोपैथ के मिश्रण से तैयार की गयी एलोवैदिक दवा के बाद अब यूपी की राजधानी लखनऊ के लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय द्वारा आयुष एनएचएम यूपी के सहयोग से आयुर्वेद की दवाओं से ठीक किये गये मरीजों के अध्ययन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मंजूरी दे दी है तथा स्टडी का पंजीकरण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल स्टैटिस्टिक्स की सीटीआरआई में हो गया है।

यह जानकारी देते हुए अध्ययन के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ राम जी वर्मा जनरल मैनेजर, आयुष स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट एनएचएम उत्तर प्रदेश ने बताया कि लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय द्वारा आयुष नेशनल हेल्थ मिशन उत्तर प्रदेश के सहयोग से कोविड-19 के लिए निर्धारित प्रोटोकाल का पालन करते हुए की गई इस क्लीनिकल स्टडी के चीफ इन्वेस्टिगेटर अस्पताल के निदेशक डॉ डीएस नेगी हैं, उनके अलावा अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ अमिता यादव, अस्पताल के पंचकर्म स्पेशलिस्ट डॉ आदिल रईस, राम सागर मिश्रा हॉस्पिटल साढ़ामऊ के कोरोना नोडल ऑफिसर डॉ सुमित कुमार महाराज तथा आयुष स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट एनएचएम यूपी के कंसलटेंट डॉ हिमांशु आर्य शामिल है।




अध्ययन के बार में जानकारी देते हुए डॉ डीएस नेगी ने बताया कि 40 वर्ष से 60 वर्ष के बीच की आयु वाले तीस-तीस मरीजों के दो ग्रुप बनाये गये हैं। इनमें एक ग्रुप को देशी चीजें आधा प्याज, दो कली लहसुन, दो ग्राम सौंठ सुबह-शाम साथ में गरम पानी पीने को कहा गया। जबकि दूसरे ग्रुप को काढ़ा और दो तरह की आयुर्वेदिक गोलियां दीं। परिणाम के बारे मे डॉ नेगी ने बताया कि उपचार के कम से कम पांचवें दिन से निगेटिव आना शुरू हो जाते हैं, दो लगातार टेस्ट निगेटिव होने पर मरीज को छुट्टी दे दी जाती है।
उन्होंने बताया कि अब तक 25 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, बाकी मरीजों को भी लाभ हो रहा है, लेकिन लगातार दो रिपोर्ट आने पर ही उन्हें निगेटिव माना जाता है, और डिस्चार्ज किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन मरीजों में हाईपरटेंशन, डायबिटीज के रोगी भी शामिल हैं।
