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किससे कहूं मन की बात -एपीसोड 2- रिश्‍तों में बैलेंस बनाते हुए रास्‍ता निकालें

सावनी गुप्‍ता

आजकल प्रतिस्पर्धा और भागदौड़ भरी जिंदगी जीते-जीते हम भावनाओं के ऐसे मकड़जाल में उलझ गए हैं कि जीवन जीना पहले की तरह सरल नहीं रह गया है। कहीं माता-पिता बच्चों को लेकर परेशान हैं तो कहीं युवा अपनी समस्याओं से। हमारी एक-दूसरे से अपेक्षाएं बहुत हैं। ये अपेक्षाएं जब पूरी नहीं होती है तो तनाव की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में यदि कोई सही राय देने वाला व्यक्ति मिल जाता है तो राह आसान हो जाती है। हम इस बात के लिए तो परेशान रहते हैं कि इसका समाधान कैसे हो लेकिन बहुत बार हम शर्म और झिझक के चलते दूसरों के सामने अपनी बात रखना भी नहीं चाहते हैं। सेहत टाइम्स का हमेशा यह प्रयत्न रहा है कि हम अपने पाठकों तक अर्थपूर्ण जानकारी पहुंचाएं। अपने इसी प्रयास के तहत अब सेहत टाइम्स अपने पाठकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक्सपर्ट मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण को ला रहा है।  इस शृंखला की पहली कड़ी में अलीगंज स्थित ‘फेदर्स’ (सेंटर फॉर मेंटल हेल्‍थ) की फाउंडर, क्‍लीनिकल साइकोलॉजिस्‍ट सावनी गुप्‍ता  इन समस्याओं के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर और मार्गदर्शन दे रही हैं।
पाठकों से अनुरोध है कि यदि आप भी बच्चों, किशोरों, युवा और बुजुर्गों की भावना, व्यवहार से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या को लेकर परेशान हैं तो एक्सपर्ट सावनी गुप्ता की राय लेने के लिए अपने प्रश्न सेहत टाइम्स को  sehattimes@gmail.com पर मेल या 094155 45814 नम्‍बर पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। मैसेज में सब्जेक्ट के स्थान पर किससे कहूं मन की बात लिख दें तो बेहतर रहेगा। आपकी निजता का उल्लंघन न हो, इसके लिए आपका नाम गुप्त रखा जाएगा।

प्रश्‍न: मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं मेरी उम्र 27 वर्ष है। मेरा 4 माह पूर्व विवाह हुआ है, मेरी पत्नी एक प्राइवेट फर्म में काम करती है मैं भी प्राइवेट नौकरी करता हूं मेरी दिक्कत यह है कि मुझे बहुत तनाव रहता है इसकी वजह मेरी पत्नी द्वारा बार-बार अलग घर लेकर रहने का दबाव डालना है। मेरी दिक्कत यह है कि मैं अपने माता पिता को छोड़ना नहीं चाहता हूं दूसरी ओर पत्नी की जिद है कि उसे अलग रहना है। समझ में नहीं आता कि क्या करूं। मेरे तनाव का असर मेरे काम पर भी पड़ रहा है डर लगता है कहीं नौकरी में कुछ गड़बड़ न हो जाए, कृपया बताएं मैं अपने को स्वस्थ कैसे रखूं। केएस एस, लखनऊ

उत्‍तर: यह समस्‍या बहुत कॉमन है, लेकिन इसमें थोड़ी सी समझदारी दिखायी जाये तो इसका समाधान बहुत ही आसान है। सबसे पहले आपको यह करना है कि आप अपनी पत्‍नी को बहुत आराम से, बिना झगड़ा किये समझाने की कोशिश करें। उनसे यह जानने की कोशिश करें कि आखिर वह आपके माता-पिता के साथ क्‍यों नहीं रहना चाहती हैं।

आप अपनी पत्‍नी और अपने माता-पिता से अलग-अलग समय में बात करके दोनों के बीच सम्‍बन्‍धों में अनबन के कारणों को पता करने की कोशिश करें। यहां यह बात भी महत्‍वपूर्ण है कि क्‍या शादी करने से पूर्व यह साफ था कि नहीं हम सब साथ रहेंगे, अगर यह क्लियर था तो अब यह बदलाव क्‍यों महसूस किये जा रहे हैं, और अगर शादी के पहले इस विषय में कोई बात नहीं हुई थी तो उत्‍पन्‍न हुई इस स्थिति के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश करें। 

आपके लिए सलाह है कि इसके अलावा आपको अपने काम और व्‍यक्तिगत जीवन के बीच बैलेंस बनाये रखने की कला सीखनी होगी, जिससे आपके तनाव और घर की कलह के चलते आपकी नौकरी पर कोई आंच न आये, अन्‍यथा दूसरी परेशानियों के साथ ही आर्थिक स्‍तर पर परेशानियां और बढ़ जायेंगी।

अगर इन सारी तरकीबों को करने के बाद भी समस्‍या का समाधान नहीं होता है तो पति और पत्‍नी दोनों को कपल थेरेपी के लिए किसी मनो‍वैज्ञानिक या मनोचिकित्‍सक से सम्‍पर्क करना चाहिये, यही नहीं पति को थैरेपी के कुछ सत्र पृथक से अकेले भी लेने चाहिये जिससे इस समस्‍या से निपटने की रणनीति सीख सकें, क्‍योंकि पति ही ऐसा कॉमन व्‍यक्ति होता है जिसे अपने माता-पिता को भी सम्‍मान के साथ समझाना होता है और अपनी जीवन संगिनी पत्‍नी को भी समझाना होता है, इसलिए पतियों को दोनों रिश्‍तों के बीच तालमेल बनाये रखने की कला अच्‍छे से आनी चाहिये।

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