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केजीएमयू प्रशासन पर कर्मचारियों का तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप

-छह बिन्‍दुओं पर उठाये सवाल, निस्‍तारण न हुआ तो 4 मार्च को घेराव

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की कर्मचारी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपनी पूर्व में लंबित मांगों को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को 3 मार्च तक का समय देते हुए चेतावनी दी है कि 3 मार्च तक अगर मांगों का निस्तारण नहीं हुआ तो 4 मार्च को कर्मचारी परिषद घेराव करने पर बाध्य होगी।

कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष प्रदीप गंगवार ने केजीएमयू प्रशासन को इस आशय का पत्र लिखा है, इसमें कहा गया है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पिछले एक माह से चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने चिकित्सा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के शोषण का अभियान चला रखा है। पत्र में लिखा है कि बीते 8 माह से शासन द्वारा किए समवर्गीय पुनर्गठन को अभी तक जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है, जिससे कि कर्मचारियों की पदोन्नति लंबित है, और उन्‍हें आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है। पत्र में लिखा है कि शासनादेश की मूल भावना के विपरीत महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश एवं बाल देखभाल अवकाश का उपयोग करने के लिए अवकाश प्रार्थना पत्र के साथ शपथ पत्र या नोटरी प्रस्तुत करने के लिए बाध्य किया जा रहा है जबकि शपथ पत्र या नोटरी की व्यवस्था का न तो शासनादेश है और ना ही परिनियमावली में उल्लेख है, ऐसे में प्रशासन द्वारा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है।

पत्र में कहा गया है कि प्रशासन द्वारा आई0टी0 सेल की बिना किसी पूर्ण तैयारी के अवकाश के लिए ऑन लाइन व्यवस्था प्रारम्भ की गयी है जिससे कि कर्मचारियों को अवकाश के लिए विभागीय स्तर पर अत्यन्त ही कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है एवं कर्मचारी कुलसचिव कार्यालय एवं विभाग के मध्य भटक रहा है।

चौथे बिंदु में लिखा गया है कि कोविड प्रोत्साहन भत्ता के लिए शासनादेश के क्रम में आधे अधूरे कर्मचारियों को भत्ता प्रदान किया गया है ऐसे में बचे हुए कर्मचारियों के मनोबल पर फर्क पड़ रहा है।  इसी प्रकार आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को दो महीना विलंब से वेतन प्राप्त हो रहा है जिससे उन्हें जीवन निर्वाह करना कष्‍टमय हो गया है इसी प्रकार कई माह से यह देखा जा रहा है कि मात्र कर्मचारी वर्ग की पदोन्नति के पश्चात भी उन्हें निम्न पद पर कार्य करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा लिये जा रहे इस प्रकार के निर्णय चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रश्नगत विषय पर निर्णय लेने की क्षमता पर संदेह उत्पन्न करते हैं।

पत्र में लिखा है कि चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कर्मचारियों के प्रति तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है, जो कि कर्मचारियों के प्रतिकूल है एवं चिकित्सा विश्वविद्यालय के हित में सर्वथा अनुचित है। पत्र में मांग की गयी है कि संदर्भित बिन्दुओं पर विलम्बतम 3 मार्च तक निस्तारण नहीं किया जाता है तो 4 मार्च को कर्मचारी परिषद घेराव करने के लिए बाध्य होगी, जिसका संपूर्ण उत्तरदायित्व चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन का होगा।

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