Tuesday , November 29 2022

कंगारू केयर से कम की जा सकती है प्रीमेच्‍योर डिलीवरी में पैदा बच्‍चों की मृत्‍यु दर : प्रो आरके धीमन

-विश्‍व प्रीमेच्‍योरिटी दिवस पर एसजीपीजीआई में आयोजित किया गया वॉकथॉन

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ के निदेशक प्रो आरके धीमन ने जन्‍म के क्षण से कंगारू केयर का महत्‍व बताते हुए कहा है कि इससे प्रीमेच्‍योर डिलीवरी में पैदा होने वाले शिशुओं की मृत्‍यु दर को बहुत कम किया जा सकता है।

प्रो धीमन ने यह बात रविवार को संस्‍थान के नियोनेटोलॉजी विभाग द्वारा “विश्व समयपूर्वता दिवस” (World Prematurity Day) ​​​​2022 के अवसर पर आयोजित वॉकथॉन के मौके पर अपने सम्‍बोधन में कही।

निदेशक ने इसके वैश्विक बोझ और रोकथाम और उपचार के उपायों के बारे में जागरूकता के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने इस वर्ष दिवस की थीम – ” माता-पिता का आलिंगन: एक शक्तिशाली चिकित्सा, के विषय में जानकारी दी। यह थीम जन्म के क्षण से ही नवजात शिशु की कंगारू मदर केयर के महत्व को दर्शाता है। यह नवजात मृत्यु दर को कम करने, सेप्सिस दर को कम करने और स्तनपान दरों में सुधार को भी दर्शाता  है।

उन्‍होंने कहा कि दुनिया भर में, हर साल लगभग 15 मिलियन बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं। इनमें 1/5वां  हिस्सा भारत का है। इनमें से दस लाख से अधिक बच्चों की मृत्यु हो जाती हैं और कई आजीवन गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करते हैं। समय से पूर्व जन्म वास्तव में एक समस्या है, जो हममें से किसी के साथ हो सकती है, भले ही हम किसी भी देश में रहते हों, हमारी संस्कृति या सामाजिक, आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। 

उन्‍होंने कहा कि समय से पहले बच्चे का जन्म परिवारों के लिए एक गंभीर आघात है। यह स्थिति ऐसे कई परिवारों और अक्सर संघर्षरत हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर भी एक गंभीर वित्तीय बोझ डालती है। समय से पूर्व जन्म दुनिया भर में अंडर -5 मृत्यु दर का प्रमुख कारण है। समय से पहले जन्म के बारे में जागरूकता बढ़ाना इसे हराने का पहला कदम है। समग्र जानकारी व बेहतर उपचार और देखभाल के माध्यम से समय से पहले जन्म दर को काफी कम किया जा सकता है।

नियोनेटोलॉजी विभाग की विभागाध्‍यक्ष डॉ कीर्ति नारंजे ने कहा कि विभाग द्वारा इस गंभीर विषय पर जागरूकता लाने के लिए वॉकथॉन का आयोजन किया गया है। उन्‍होंने कहा कि समय से पहले जन्म और prematurity के कारण होने वाली मृत्यु और दिव्‍यांगता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व इसे रोकने के सरल, कम लागत के प्रमाणित तरीकों के बारे मे बताने के लिए संपूर्ण विश्व में हर साल 17 नवंबर को यह दिन मनाया जाता है। उन्होंने  यह भी बताया कि प्रीटर्म जन्म पर ध्यान देना क्यों महत्वपूर्ण है।

इस कार्यक्रम में फैकल्टी, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ और उनके परिवारों सहित 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। वॉकथॉन को संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर के धीमन ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर गौरव अग्रवाल, प्रमुख, कार्डियोलॉजी विभाग,प्रोफेसर आदित्य कपूर,  लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण वाजपेयी, कार्यकारी रजिस्ट्रार और डॉ निरंजन कुमार सिंह, लखनऊ नियोनेटोलॉजी फोरम के अध्यक्ष की उपस्थिति में  हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रतिभागियों ने संस्थान के हॉबी केंद्र से लगभग 5 किमी का ट्रैक पूरा किया।

इसके बाद विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक पॉल और डॉ. अभिजीत रॉय द्वारा आमंत्रित अतिथियों का अभिनंदन किया गया। नियोनेटोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ आकांक्षा वर्मा ने रंग-बैंगनी के महत्व को समझाया जो असाधारणता और संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह बताता है कि समय से पहले जन्मे बच्चे अद्वितीय और असाधारण होते हैं और इन बच्चों को संवेदनशील रूप से प्रबंधित करने की आवश्यकता होती है।

 कार्यक्रम का समापन विभाग में एडिशनल प्रोफेसर  डॉ. अनीता सिंह के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। नियोनेटोलॉजी विभाग की पूरी टीम ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और आयोजन को सफल बनाने में अपना पूर्ण योगदान दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

4 × 1 =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.