-पीएम-सीएम सहित सभी दलों को भेजे चुनावी घोषणा पत्र के लिए अपने मुद्दे

सेहत टाइम्स
लखनऊ। इप्सेफ ने सभी राष्ट्रीय दलों के अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कहा है कि जो लोकसभा चुनाव में इप्सेफ की मांगों, पुरानी पेंशन बहाली, आठवें वेतन आयोग का गठन, आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा एवं न्यूनतम वेतन के लिए नियमावली का गठन, को अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगा, देशभर का कर्मचारी परिवार उसी के पक्ष में मतदान करेगा।
इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया कि उपरोक्त मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री, मंत्रीगण, सांसदों को बराबर ज्ञापन /रैली /प्रदर्शन करके मांग करते रहे हैं कि अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही पुरानी पेंशन को बहाल कर दिया जाये क्योंकि बुढ़ापे में दो वक्त की रोटी के लिए पेंशन मिलती रही है। बच्चे बाहर नौकरी पेशा करने चले जाते हैं, ऐसे में सेवानिवृत कर्मचारी भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा।


महासचिव प्रेमचंद ने बताया कि विगत 6 मार्च को देश भर के कर्मचारियों ने सत्याग्रह करके पुनः प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा परंतु कोई रुचि नहीं ली गई। यहां तक कि वार्ता करने की भी इच्छा व्यक्त नहीं की। सरकार कहती है कि देश विकसित देश बनने जा रहा है। वहीं पर आउटसोर्स कर्मचारी 6000 से 8000 रुपए में अपने परिवार का खर्च कैसे चलाएगा, इस पर कभी सोचा ही नहीं, लाखों युवा बेरोजगारी का शिकार हैं। लगभग 30 लाख पद देश के विभिन्न राज्यों में रिक्त पड़े हैं, उन पर आउटसोर्स कर्मचारी रखा गया है।
श्री मिश्र ने जानना चाहा है कि प्रधानमंत्री, मंत्रीगण ,सांसद ,विधायक कई पेंशन कैसे ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कहावत है कि मलिक खुशहाल रहे और परिवार भूखा रहे यह कहां का न्याय है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कर्मचारियों को भी सचेत किया है कि वे यदि अपने मत का सोच समझ कर प्रयोग नहीं करेंगे तो भविष्य में उनकी एवं परिवार की दशा ख़राब होगी इस पर गौर करें। इप्सेफ ज्ञापन /मीडिया एवं सभाओं के माध्यम से उन्हें भी सचेत किया जा चुका है। खेद का विषय है कि कोई भी दल कर्मचारियों की पीड़ा पर ध्यान नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा है कि वर्तमान चुनाव कर्मचारियों के भविष्य को बनाने/बिगाड़ने वाला होगा। पूंजीवादी व्यवस्था में कर्मचारी बंधुआ मजदूर होते हैं इसलिए एकजुट होकर सोच समझकर अपने मत का प्रयोग करें। इप्सेफ हमेशा उनके साथ है और रहेगा उसके ना किसी से दोस्ती है ना दुश्मनी। वह मात्र कर्मचारी हित चाहता है।
