Saturday , October 16 2021

इप्‍सेफ ने कहा, कर्मचारियों-शिक्षकों की नाराजगी भारी पड़ेगी सरकार को

-लम्बित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को लिखा गया चौथी बार पत्र

-योगी आदित्‍यनाथ की सरकार की मंशा पर उठाये सवाल

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्र एवं महामंत्री प्रेमचंद्र ने पुनः प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि केंद्रीय एवं राज्य के कर्मचारियों की मांगों पर मिल बैठकर समाधान किया जाए। उन्‍होंने कहा है कि खेद का विषय है कि शासन के उच्च अधिकारी भी बातचीत करके समाधान निकालने का प्रयास नहीं करते हैं। इप्‍सेफ ने चौथी बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।

मुख्‍यमंत्री पर सवाल उठाते हुए इन नेताओं का कहना है कि संभवतः मुख्यमंत्री तो बात करना तौहीनी समझते हैं। संवादहीनता के कारण आंदोलन तेजी पकड़ रहा है, जिसका प्रदेश के चुनावों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कर्मचारियों-शिक्षकों की नाराजगी भारी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद एवं कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा का लगभग एक माह से आंदोलन चल रहा है पर मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव बातचीत तक नहीं कर रहे हैं।

कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि 1- वेतन समिति की संस्तुतियों को लागू करके सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ दिया जाए। नियमावलीया बनाई जाए। 2- लॉकडाउन में काटे गए वेतन, भत्ते व डी ए के किस्तों का एरियर सहित भुगतान किया जाए। 3- पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए क्योंकि पेंशन के बिना सेवानिवृत्त कर्मचारियों का जीवन दूभर हो जाएगा। 4- भारत सरकार एक देश एक वेतन सुविधाएं देने हेतु राष्ट्रीय वेतन आयोग का गठन किया जाए।

इसके अतिरिक्‍त पांचवीं मांग है कि सरकारी संस्थानों विभागों का निजीकरण न किया जाए, सार्वजनिक निगमों उपक्रमों को सुदृढ़ करके उनमें व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करके उन्हें काम करते रहने का मौका दिया जाए। निजीकरण से मोनोपोली होने के कारण महंगाई बढ़ेगी। उदाहरणार्थ पेट्रोल, डीजल, गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। 6- आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारियों के लिए नीति बना करके उन्हें वाजिब वेतन एवं सुरक्षा प्रदान की जाए। 7- कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाए तथा 8- रिक्त पदों पर नियमित भर्तियां एवं पदोन्नतियां की जाएं।

दोनों नेताओं ने आग्रह करते हुए कहा है कि हम आपसे पुनः आग्रह करते हैं कि आंदोलनरत कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों से बातचीत करके आपसी सद्भाव का वातावरण बनाएं। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 18 मार्च को 75 जनपदों में उपवास धरना-प्रदर्शन है।

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