Monday , October 25 2021

मांगों पर जुलाई में निर्णय न हुआ तो कर्मचारी करेंगे देश भर में आंदोलन

-यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों में कर्मचारियों के परिवार की बेरुखी पड़ेगी भारी

-इप्‍सेफ सहित दूसरे संगठनों ने प्रधानमंत्री एवं भारत सरकार के कैबिनेट सचिको भेजे पत्र

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन के आह्वान पर आज देशभर के सभी राज्यों के कर्मचारी संगठनों के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं कैबिनेट सचिव भारत सरकार को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि महंगाई भत्ते की सभी किस्तों का एरियर सहित भुगतान करने तथा एनपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन की बहाली की जाये। इसके साथ ही 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की पेंशन में एक वेतन वृद्धि को जोड़कर पेंशन निर्धारण करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जुलाई में निर्णय नहीं किया गया को देशभर के सभी कर्मचारी आंदोलन करने को बाध्य होंगे जिसका उत्तरदायित्व भारत सरकार का होगा।

इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्रा एवं महामंत्री प्रेमचंद्र ने बताया कि रोजाना बढ़ती महंगाई से कर्मचारी को परिवार के दैनिक खर्चा चलाना भी कठिन हो रहा है। पेट्रोल डीजल एवं गैस के दाम बढ़ने से सभी खाद्य सामग्री भी महंगी हो गई है। वाहन चलाना भी कठिन हो गया है। कर्मचारी के ऊपर कर्ज बढ़ता जा रहा है। इसलिए महंगाई भत्ते की किस्तों का भुगतान आवश्यक हो गया है जिससे क्षतिपूर्ति हो सके।

इप्सेफ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार पाराशर, के खुराना, सुभाष गांगुड़े, आर के भदौरिया, एस बी सिंह, विष्णुभाई पटेल, एच के सांडिल, सुभाष, शशि कुमार मिश्र, राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा, डॉ के के सचान, अशोक कुमार, सुरेश रावत, गिरीश चन्द्र मिश्रा, सुनील यादव ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को इप्सेफ द्वारा कई बार पत्र भेजकर आग्रह किया गया कि इप्सेफ की मांगों पर सार्थक निर्णय करायें, परंतु अभी तक मात्र कोविड-19 की महामारी में अपनी जान पर खेलकर मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टर, नर्सेज, फार्मेसिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन सहित सभी पैरामेडिकल स्टाफ की मृत्यु पर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण कोष से 50 लाख की अनुग्रह धनराशि तथा आश्रित को नौकरी पारिवारिक पेंशन ग्रेच्युटी सहित सभी भुगतान करने का निर्णय किया, जिसके लिए आभारी हैं, परंतु सेवा कर रहे कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति भी नहीं हो रहा है। कई राज्यों में वेतन एवं अन्य भत्तों की कटौती कर दी गई है इससे कर्मचारी का नाराज होना स्वाभाविक है। सभी राज्यों के कर्मचारी महंगाई से त्रस्त हैं। अब परिवार के लिए भीख मांगने की स्थिति आ गई है। लिये गए कर्जों का भुगतान भी मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में डी ए की किस्तों का भुगतान जुलाई से करने की मांग की गई है। एनपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन की बहाली भी जरूरी हो गई है क्योंकि दिवंगत कर्मचारियों के परिवार को कुछ भी नहीं मिलेगा। इसी तरह 30 जून तक काम करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की पेंशन में एक वेतन वृद्धि भी नहीं जोड़ी जा रही है, जबकि न्यायालय के आदेश हो चुके हैं। डी.ओ. पी.टी. विभाग (सचिवालय) उसमें बाधा डाल रहा है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने प्रधानमंत्री से एक बार पुनः आग्रह किया है कि भत्तों का भुगतान तथा पुरानी पेंशन की बहाली पर गंभीरता से विचार कर निर्णय करा दें वरना भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि पूरा कर्मचारी परिवार भीषण महंगाई से त्रस्त है। जब कोविड-19 की महामारी में सरकार संकट में थी तो कर्मचारियों ने 1 दिन का वेतन देकर मदद की थी।

राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 भत्ते काट रखे हैं और वेतन विसंगतियों, कैडर पुनर्गठन पर निर्णय नहीं हो पाया है जिससे सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। स्थानीय निकाय कर्मचारियों के संवर्गों का पुनर्गठन, रिक्तियों की भर्ती लंबित है। निगमों के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिल पाया है। 8 निगमों में वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। बड़ी दयनीय स्थिति है।

लखनऊ में आज का कार्यक्रम बलरामपुर चिकिसालय में जिला अध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव की अध्यक्षता व इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में परिषद के संगठन प्रमुख डॉक्टर के के सचान, अध्यक्ष सुरेश रावत, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्रा, प्रवक्ता अशोक कुमार, उपाध्यक्ष सुनील यादव, सर्वेश पाटिल, संदीप बड़ोला, कुष्ठ कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सतीश यादव, धनन्जय तिवारी, मीडिया प्रभारी सुनील कुमार, कमल श्रीवास्तव, कपिल वर्मा आदि पदाधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त वन विभाग में सहायक वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मो॰ नदीम महामंत्री अमित श्रीवास्तव, आशीष पान्डे महामंत्री वन विभाग के नेतृत्व में, पशुपालन निदेशालय में फार्मेसिस्ट फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार के नेतृत्व में, सिंचाई संघ के अध्यक्ष आर॰ के॰ पान्डे महामंत्री अवधेश मिश्रा के नेतृत्‍व में सिंचाई विभाग, राजस्व अधिकारी संघ के अध्यक्ष विजय किशोर मिश्रा के नेतृत्व में राजस्व विभाग, मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ ट्यूबवेल टेक्निकल कर्मचारी संघ उ॰प्र॰ के अध्यक्ष उमेश राव, महामंत्री रजनेश माथुर के नेतृत्व में सिंचाई नलकूप विभाग, वाणिज्य कर में मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल दीप महामंत्री जे॰ पी॰ मौर्य के नेतृत्व में,  बेसिक हेल्थ वर्कर एसो॰ के अध्यक्ष धनन्जय तिवारी के नेतृत्व में परिवार कल्याण, के॰जी॰एम॰यू॰ कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष प्रदीप गंगवार के नेतृत्व में केजीएमयू,  आर॰ एम॰ एल॰ आयुर्विज्ञान संस्थान कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रणजीत यादव, महामंत्री सच्चितानन्द मिश्रा एन॰एच॰एम॰ कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मयंक सिंह, सर्वेश पाटिल अध्यक्ष आप्टोमेट्रिस्ट एसोसिएशन राम मनोहर कुशवाहा महामंत्री एक्स-रे टेक्नीशियन एसोसिएशन बी॰एन॰ मिश्रा के नेतृत्व में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ और ज्ञापन भेजा गया।

इस कार्यक्रम में मुख्यतः उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, आसाम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम आदि राज्यों के केंद्रीय एवं राज्य कर्मचारी तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा ऑटोनॉमस संस्थानों के कर्मचारी भी शामिल थे।