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स्वामी ज्ञानानंद के आध्यात्म और बाबा सत्यनारायण की कला की गंगा बहेगी लखनऊ में

-नव संवत्सर के स्वागत में इस वर्ष भी दो दिवसीय समारोह आयोजित कर रही नववर्ष चेतना समिति

-दीपदान से संवत्सर 2082 की विदाई और आध्यात्म की रौशनी से होगा नवसंवत्सर 2083 का स्वागत

बाबा सत्यनारायण मौर्य _____________________स्वामी ज्ञानानंद

सेहत टाइम्स

लखनऊ। नववर्ष चेतना समिति पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष भी भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 (आगामी 19 मार्च को) का स्वागत दो दिवसीय समारोह से करेगी। समिति की मुख्य संरक्षिका रेखा त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित समारोह में अन्य कार्यक्रमों के अतिरिक्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला में इस वर्ष वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के विषय पर नाट्य कला के माध्यम से एक रंगारंग प्रस्तुति देश-विदेश में प्रसिद्धि पा चुके बाबा सत्यनारायण मौर्य अपनी टीम के साथ करेंगे।

यह जानकारी देते हुए समिति के अध्यक्ष डॉ गिरीश गुप्ता व सचिव डॉ सुनील अग्रवाल ने बताया कि मुख्य आयोजक नववर्ष चेतना समिति के साथ डॉ. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय एवं श्री श्याम परिवार, लखनऊ इस समारोह के सह आयोजक हैं। समारोह का उद्घाटन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 (गुरुवार 19 मार्च, 2026) को होगा तथा समापन अगले दिन चैत्र शुक्ल द्वितीया, विक्रम संवत 2083 (शुक्रवार 20 मार्च, 2026) को होगा।

उन्होंने बताया कि नवसंवत्सर 2083 की पूर्व संध्या 18 मार्च को विक्रम संवत्सर 2082 की विदाई के अवसर पर सायं 5 बजे खाटूश्याम मंदिर स्थित गोमती तट पर दीपदान एवं भजन संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, इसका संयोजन पुनिता अवस्थी, डॉ रंजना द्विवेदी और डॉ संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन मे संपन्न होगा।

डॉ गिरीश और डॉ सुनील ने बताया कि राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् (1932-2082 विक्रमी/1875-2025 ई) के डेढ़ सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार नवम्बर 2025 से नवम्बर 2026 तक पर राष्ट्रव्यापी जश्न मना रही है। ऐसे में नववर्ष चेतना समिति के लिए भी यह वर्ष विशिष्ट एवं ऐतिहासिक है, इसीलिए यह दो दिवसीय वार्षिक समारोह वंदे मातरम् को समर्पित किया गया है।

उन्होंने बताया कि नवसंवत्सर समारोह के प्रथम दिन के कार्यक्रम का आयोजन सायं 5 बजे से बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय रायबरेली रोड, लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में किया जायेगा, इस समारोह में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। समिति की वार्षिक पत्रिका नव चैतन्य के इस वर्ष के अंक, जिसे चिरस्मरणीय बनाने के लिए इसे वंदे मातरम् सार्धशती विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है, का लोकार्पण भी किया जायेगा।

पहले दिन के कार्यक्रमों की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह करेंगे, तथा मुख्य वक्ता के तौर पर राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री, भारतीय इतिहास संकलन योजना संजयजी, विशिष्ट अतिथियों के रूप में विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान और बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य राजकुमार मित्तल को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष की जिम्मेदारी नववर्ष चेतना समिति के उपाध्यक्ष सुधीर एस हलवासिया निभायेंगे। इस दिन के कार्यक्रमों का संयोजन डॉ हरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, रिटायर्ड आईएएस मणि प्रसाद मिश्रा, डॉ अजय सिंह कुशवाहा और कमलेन्द्र मोहन द्वारा किया गया है।

उन्होंने बताया कि दूसरे दिन का कार्यक्रम चैत्र शुक्ल द्वितीया, विक्रम संवत् 2083 (शुक्रवार, 20 मार्च, 2026) को सायं 5 बजे से श्री खाटू श्याम मंदिर प्रांगण, बीरबल साहनी मार्ग, हनुमान सेतु मंदिर के पीछे लखनऊ में होगा। इस दिन के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य अंगद सिंह होंगे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता चेयरमैन व्यापार मंडल लखनऊ एवं संरक्षक नववर्ष चेतना समिति राजेन्द्र अग्रवाल करेंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य ललि​त कला अकादमी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्रा एवं संस्कार भारती अवध प्रांत की कार्यकारिणी सदस्य शिवा सिंह को आमंत्रित किया गया है। दूसरे दिन के कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बाबा सत्यनारायण मौर्य एवं उनकी टीम द्वारा रंगारंग नाटिका के माध्यम से वंदेमातरम पर आधारित विशेष प्रस्तुति होगी। इस दिन के कार्यक्रमों का संयोजन श्री श्याम परिवार के ​सचिव रूपेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष नववर्ष चेतना समिति राधेश्याम सचदेवा, समिति के कार्यालय प्रभारी अरुण कुमार मिश्रा तथा समिति के सम्पर्क प्रमुख शेष नाथ सिंह द्वारा किया गया है।

ज्ञात हो भारतीय कालगणना प्रणाली तथा विक्रम संवत आधारित पंचांग के महत्व को सामान्य जन तक पहुंचाने और भारतीय संस्कृति की जड़ों को सुदृढ़ करने के​ लिए पूर्व महापौर पद्मश्री डॉ एससी राय की पहल पर 2009 में नववर्ष चेतना समिति का गठन​ किया गया था। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए समिति लगातार अपने कार्यों का निर्वहन करती आ रही है।