Wednesday , November 30 2022

अब भी गतिरोध रहा जारी, तो आम जन को होगी परेशानी भारी

-शिक्षक-कर्मचारी संयुक्‍त मोर्चा ने किया आंदोलन का ऐलान, 23-34 अप्रैल को लाखों कर्मचारी करेंगे कार्य बहिष्‍कार
-लम्‍बे समय से सहमति-आश्‍वासन के बावजूद नहीं किया जा रहा आदेश

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ सरकार, शासन-प्रशासन द्वारा किये गये वादे, मुद्दों पर बनी सहमति, मुख्‍य सचिवों के आश्‍वासन के बावजूद शिक्षकों, राज्‍य कर्मचारी, निगमों के कर्मचारियों की जायज मांगों पर अनदेखी आम जनता पर भारी पड़ सकती है, क्‍योंकि कर्मचारी-शिक्षक संयुक्‍त मोर्चा ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है, इसके अनुसार आगामी 23-24 अप्रैल को पूर्ण कार्य बहिष्‍कार का ऐलान किया गया हैं, अगर ऐसा होता है तो प्रदेश भर में चिकित्‍सा, रोडवेज जैसी आवश्‍यक सेवाएं भी प्रभावित होंगी, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। हालांकि इससे पूर्व आंदोलन की रूपरेखा के अनुसार 20 व 21 अप्रैल को काला फीता बांधकर और 22 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों में मोटर साइकिल रैली निकाल कर विरोध जताने का कार्यक्रम है, ऐसे में अगर सरकार राजी हो गयी तो कार्यबहिष्‍कार वापस हो जायेगा, अन्‍यथा की स्थिति में दो दिवसीय कार्य बहिष्‍कार होना तय है।

आज शिक्षक-कर्मचारी संयुक्‍त मोर्चा महासंघ के कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता में यह जानकारी देते हुए मोर्चा के अध्‍यक्ष बीपी मिश्र और महासचिव शशि कुमार मिश्र ने बताया कि पुरानी पेंशन बहाली, वेतन विसंगति दूर करने, भत्तो की समानता सहित मुख्य सचिव के साथ हुए समझौतों पर कार्यवाही न होने से कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा की बैठक नगर निगम कार्यालय में वी पी मिश्र की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

उन्‍होंने बतया कि 12 अक्टूबर 2018 के पूर्व अनेक आन्दोलनों के माध्यम से शासन व सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया था, जिसके फलस्वरूप मोर्चा की प्रमुख मांग पुरानी पेंशन बहाली, केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में 3 लाख आउटसोर्सिंग/संविदा/ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति बनाने, स्थानीय निकाय कर्मचारियों के वेतन विसंगतियों, पुनर्गठन एवं विनियमितीकरण के सम्बन्ध में अविलम्ब निर्णय किया जाना, शेष बचे राजकीय निगमों के कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग का लाभ देना तथा उनके बकाये का भुगतान कराया जाना, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद की मांगो पर पूर्व में हुए समझौतो को लागू कराया जाना, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की सेवा निवृत्ति पर 300 दिन का अवकाश नकदीकरण अनुमन्य कराया जाना, सभी कार्यरत तदर्थ, माध्यमिक शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यो का विनियमित किया जाय तथा राज्य कर्मचारियों की भंाति चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराया जाना, विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियों की भांति 10 वर्ष की सेवा पर पेंशन की व्यवस्था सुनिश्चित कराया जाना शामिल है।

इसके अतिरिक्‍त सी0एस0डी0 कैन्टीन की भॉति राज्य कर्मचारियों को भी राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के माध्यम से स्टेट जी0एस0टी0 मुक्त सामग्री क्रय की सुविधा का लाभ तथा कर्मचारी कल्याण निगम कर्मियों की बदहाली दूर करने की मांग पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि कल्याण निगम के सामानों में लगने वाली जी॰एस॰टी॰ का 50 प्रतिशत व्यय भार सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। इस निर्णय के विपरीत वित्त विभाग द्वारा कल्याण निगम को बन्द करने का सुझाव दिया गया है, जिससे समझौते का क्रियान्वयन तो दूर वहां के कर्मचारियों की सेवा पर ही तलवार लटक गई है।

मोर्चा की मांग पर वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियॉ एवं शेष बचे भत्तों पर मंत्रिपरिषद से अनुमोदन लिये जाने, पूर्व विनियमित कर्मचारियों की अर्हकारी सेवाएं को जोड़ते हुए पेंशन निर्धारित करने, डिप्लोमा इंजीनियर्स की भॉति ग्रेड वेतन 4600/- को इग्नोर करके 4800/- के ग्रेड वेतन के समान मैट्रिक्स लेवल अनुमन्य करने, उपार्जित अवकाश में 300 दिन के संचय की सीमा को समाप्त करने, राजस्व संवर्ग सींच पर्यवेक्षक, जिलेदार सेवा नियमावली, एवं तकनीकी पर्यवेक्षक नलकूप सेवानियमावली, अधीनस्थ वन सेवा नियमावली प्रख्यापित करने, सभी संवर्गो का पुनर्गठन, जिनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नही हैं, उसे प्रख्यापित कराने का निर्णय लिया गया था।

निर्णय के बाद मोर्चा लगातार शासन का ध्यान आकृष्ट करता रहा है। शासन द्वारा समझौतों पर कार्यवाही तो नही हो सकी बल्कि उसके स्थान पर कर्मचारियों पर अभी तक प्राप्त हो रहे छः भत्ते समाप्त कर जले पर नमक छिड़कने जैसा कार्य किया गया।

पुरानी पेंशन व्‍यवस्‍था बहाली पर अनेक आन्दोलनों के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नही की जा रही है। अनेक ऐसे संवर्ग है जिनमें छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां व्याप्त है, वित्त विभाग द्वारा एक माह में परीक्षण कर कार्यवाही कराने का निर्देश दिया गया था परन्तु अभी तक उसपर कोई कार्यवाही सम्पन्न नही हुई है। केन्द्रीय कर्मचारियों की भांति भत्तों की समानता, वाहन भत्ता एवं मकान किराए भत्तें के संशोधन के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही की गयी, जिससे केन्द्रीय एवं राज्य कर्मचारियों को प्राप्त हो रहे भत्तों में बड़ा अन्तर आ गया है।

प्रदेश में सीधी भर्ती अधिकतम आयु 40 वर्ष के दृष्टिगत ए0सी0पी0 में 08, 16 एवं 24 वर्ष की सेवा पर तीन पदोन्नति वेतनमान दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा अभी तक परीक्षण कर कोई प्रस्ताव नही बनाया गया। उपार्जित अवकाश के संचय की तीन सौ दिन की सीलिंग समाप्त कर सेवा निवृत्ति पर 600 दिनों का नकदीकरण दिये जाने के सम्बन्ध में वित्त विभाग द्वारा परीक्षण कर प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसपर एक वर्ष से अधिक व्यतीत हो जाने के पश्चात भी कोई कार्यवाही नही की गयी है। इस बींच कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उन्हे आर्थिक नुकसान हो रहा है। परन्तु वित्त विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही हो सकी है।

बार-बार समझौतों के बावजूद कर्मचारियों की कैशलेस चिकित्सा अभी तक प्रारम्भ नही हो सकी जबकि पूर्व से मिल रहे चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान हेतु बजट के अनुदान की ग्रुपिंग में फेरबदल कर उसे और जटिल बना दिया गया, यहाँ तक कि सरकारी चिकित्सालयों में दवाओं के लोकल परचेज पर भी रोक लगा दी गयी। संवर्गों की वेतन विसंगति केन्द्र सरकार द्वारा दूर की जा चुकी है परन्तु समझौतो के बावजूद प्रदेश में अभी वेतन विसंगति लम्बित है। अन्य संवर्गो की वेतन विसंगति एवं वेतन समिति की संस्तुतियों एवं शेष भत्तों पर अक्टूबर 2018 में ही मंत्रिपरिषद से निर्णय कराने का निर्णय लिया गया था जो एक वर्ष बाद भी अभी तक लम्बित है। निर्णयों का क्रियान्वयन न कर शासन द्वारा 50 वर्ष पूर्ण कर रहे कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया जा रहा है। जो नितान्त गलत है।

बैठक में समस्त मोर्चा से सम्बद्ध घटक संघो के पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से आन्दोलन के प्रस्ताव का समर्थन किया और यह भी मांग रखी कि मांगो के पूरी न होने की दशा में हड़ताल जैसे कठोर निर्णय लिया जाय। मोर्चा के  पदाधिकारियों ने मुख्य मंत्री से मांग की है कि आन्दोलन के पूर्व हस्तक्षेप कर समझौतोंं का क्रियान्वयन कराने का निर्देश जारी करें साथ ही कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोके अन्यथा प्रदेश के लाखोंं कर्मचारी आन्दोलन को विवश होंगें।

बैठक में परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत, महामंत्री अतुल मिश्रा, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री गिरीश चन्द्र मिश्र, राजकीय निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मनोज मिश्रा, महामंत्री घनश्याम यादव, इंडियन फेडरेशन आफ फार्मासिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा॰ के॰के॰ सचान, अशोक कुमार महामंत्री नर्सेज संघ, फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव, महामंत्री अशोक कुमार, डा॰ पी॰ के॰ सिंह संयोजक फेडरेशन आफ फॉरेस्ट कर्मचारी संघ वन विभाग, अवधेश कुमार सिंह अध्यक्ष उ॰प्र॰ विकास प्राधिकरण कर्मचारी संयुक्त संघटन, माध्यमिक शिक्षक संघ उ॰प्र॰ के महामंत्री नन्द किशोर मिश्रा, उपाध्यक्ष ओ पी त्रिपाठी, स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री कैसर रजा, सहायक वन कर्मचारी संघ के महामंत्री अमित श्रीवास्तव, सिंचाई संघ के महामंत्री अवधेश मिश्रा, राजस्व अधिकारी संघ के अध्यक्ष विजय किशोर मिश्रा, आशीष पान्डे महामंत्री वन विभाग आदि उपस्थित रहे।