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पुरुषों को अगर पेशाब में हैं ये दिक्‍कतें, तो संभव है प्रोस्‍टेट ग्रंथि बढ़ रही हो

-होम्‍योपैथिक दवाओं में है इस समस्‍या का पूर्ण समाधान : डॉ अनुरुद्ध वर्मा

डॉ अनुरुद्ध वर्मा

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। यदि आप प्रोस्टेट ग्लैंड की वृद्धि से होने वाली समस्याओं से परेशान हैं तो चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि होम्योपैथी में अनेक कारगर दवाइयां उपलब्ध हैं जो आपको इन समस्याओं से छुटकारा दिला सकती हैं।

यह कहना है केंद्रीय होम्योपैथी परिषद के पूर्व सदस्य एवं वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ अनुरुद्ध वर्मा का। डॉ वर्मा ने बताया कि यह पुरुषों को होने वाली समस्‍या है, इस समस्या की संभावना 50 वर्ष के उम्र के बाद कभी भी हो सकती है परंतु 75 वर्ष आयु के लगभग 50 प्रतिशत वृद्धों की इस समस्या से सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि में बार-बार पेशाब होना विशेष रूप से रात में, मूत्र त्यागने में जल्द बाजी, पेशाब करने के बाद बूंद बूंद कर पेशाब निकलना, पेशाब की धार न बनना, पेशाब करते समय दर्द, ज्यादा जोर लगाने के बाद भी कम पेशाब होना, पेशाब में जलन एवं कब्ज आदि के लक्षण हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि यदि समय से उपचार न किया जाए तो मूत्र मार्ग में संक्रमण, पेशाब करने में परेशानी, रात एवं दिन में बार-बार पेशाब होना, तीव्र मूत्रावरोध, पेशाब से खून, प्रोस्टेट कैंसर आदि की जटिलताएं हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि इसका एलोपैथी में मात्र ऑपरेशन ही समाधान है वहीं पर होम्योपैथी में प्रोस्टेट ग्रंथि की वॄद्धि की समस्याओं का समाधान बिना ऑपरेशन के केवल दवाओं से ही संभव है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयां रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों, मानसिक लक्षणों, आचार, विचार, व्यवहार आदि के आधार पर दी जाती हैं।

उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयां रोगी के शरीर पर किसी तरह का दुष्प्रभाव नहीं डालती हैं और पूरी तरह निरापद हैं। डॉ वर्मा ने बताया कि प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि के उपचार में प्रयुक्त होने वाली औषधियों में थूजा, कोनियम, बेराइटा कार्ब, चिमाफिला, फेरम पिक्रिक, लाइकोपोडियम, एपिस मेल, सैबाल शैरोलेटा ,पिक्रिक एसिड आदि प्रमुख हैं परंतु इनका प्रयोग चिकित्सक की सलाह पर ही करना है।