Wednesday , November 30 2022

आमतौर पर आने वाली दिक्‍कतों से कैसे बच सकते हैं चिकित्‍सक

नर्सिंग होम एसोसिएशन के सतत चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रम में बताये तरीके

 

लखनऊ। लखनऊ नर्सिंग होम एसोसिएशन के तत्‍वावधान में शनिवार को एक सतत चिकित्‍सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन के निराला नगर स्थित भवन में आयोजिेत किया गया। इस कार्यक्रम में निजी चिकित्‍सकों के सामने आने वाली परेशानियों और उसके समाधान पर एक सत्र का आयो‍जन किया गया जिसमें कई चिकित्‍सकों ने चर्चा करते हुए उसके समाधान बताये। इस सत्र के मॉडरेटर डॉ अनूप अग्रवाल रहे।

वरिष्‍ठ स्‍त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सरोज श्रीवास्‍तव ने ब‍ताया कि किस तरह से मुकदमेबाजी से बचा जा सकता है। वरिष्‍ठ प्‍लासिटक सर्जन डॉ वैभव खन्‍ना ने बताया कि बीमाधारक का इलाज करने में लिखा-पढ़ी करते समय क्‍या-क्‍या सावधानियां बरतें जिससे कि हॉस्पिटल को आर्थिक नुकसान न हो।  

 

 

योग्‍य पैथोलॉजिस्‍ट वाली पैथोलॉजी में ही करायें जांच

इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन लखनऊ के निवर्तमान अध्‍यक्ष डॉ पीके गुप्‍ता ने बताया कि किसी भी पैथोलॉजी रिपोर्ट पर एमसीआई के मानकों के अनुसार एमडी पैथोलॉजी या डिप्‍लोमाधारक चिकित्‍सक के दस्‍तखत होने अनिवार्य हैं, ऐसा आदेश उच्‍चतम न्‍यायालय ने दिया हुआ है। उन्‍होंने कहा कि इसके बावजूद अब भी अनेक पैथोलॉजी सिर्फ टेक्‍नीशियनों के सहारे चल रही हैं। उन्‍होंने कहा कि चूंकि पैथोलॉजी की रिपोर्ट पर चिकित्‍सक द्वारा किये जाने वाले उपचार का रास्‍ता तय होता है इसलिए इसका सही होना मानव हित में भी है। उन्‍होंने सभी चिकित्‍सकों से अपील की वे योग्‍य पैथोलॉजिस्‍ट वाली लैब में ही मरीजों की जांच के लिए लिखें। उन्‍होंने इस सम्‍बन्‍ध में आम जनता में भी जागरूकता फैलाने पर जोर दिया कि वे क्‍वालीफाइड पैथोलॉजिस्‍ट वाली पैथोलॉजी में ही जांच कराने जायें।

 

कैसे निपटें लेटलतीफों से

 

डायबिटीज स्‍पेशियलिस्‍ट डॉ मनोज कुमार श्रीवास्‍तव ने बताया कि क्‍लीनिक चलाने वाले सिंगल डॉक्‍टर को अपनी सुरक्षा और सुगमता से मरीज को देखने के लिए क्‍या करना चाहिये। उन्‍होंने कहा कि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि लोग क्‍लीनिक बंद करते समय या देर से दिखाने आ जाते हैं, ऐसे वे मरीज जिन्‍हें उसी समय उपचार की इमरजेंसी नहीं होती है, वे भी जिद करते हैं कि अभी ही देख लें। उन्‍होंने कहा कि ऐसे लोगों में सही लोग चुनने का सबसे सही तरीका है कि साधारण में आप जितनी फीस लेते हैं, लेट समय में आने वालों के लिए फीस दोगुनी कर दीजिये। उन्‍होंने बताया कि मेरा अनुभव है कि ऐसा करने से 90 प्रतिशत मरीज जिनकी देर से आने की आदत पड़ चुकी है, वे सही समय पर आयेंगे।

इस मौके पर लखनऊ के अनेक चिकित्‍सक मौजूद रहे। सीएमई के समापन पर डॉ रमा श्रीवास्‍तव ने सभी का आभार जताते हुए धन्‍यवाद भाषण दिया।


 

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