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गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर है खतरनाक

लखनऊ। लखनऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा में चल रहे सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन के सत्र में जहां गर्भवती महिलाओं को होने वाले उच्च रक्तचाप के चलते होने वाली बीमारियों और उसके उपचार में बताया गया वहीं महिलाओं के जननांगों में होने वाले कैंसर की एडवांस स्टेज में उससे होने वाले दर्द से निजात दिलाने के तरीके के बारे में जानकारी दी गयी।
आईएमए में आज के सत्र में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ उर्मिला सिंह, प्रोफेसर डॉ सीमा मेहरोत्रा, इराज मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ शिप्रा और उजाला मेडिकल सेन्टर की डॉ असना अशरफ ने गर्भावस्था के दौरान होने वाले उच्च रक्तचाप के बारे में बताते हुए अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।  डॉ सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि गर्भवती महिला का रक्तचाप 140/90 से ज्यादा हो तो उसे सिरदर्द, आंख से घुंधला दिखना, पेट दर्र्द की शिकायत हो तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना  चाहिये, ऐसी स्थिति में उसे झटके आ सकते हैं।

आ सकते हैं मिर्गी जैसे झटके

डॉ शिप्रा ने बताया कि आवश्यकता इस बात की है कि गर्भवती का परीक्षण हर माह अवश्य होना चाहिये जिससे उसके ब्लड प्रेशर पर नजर बनी रहती है, और अगर दवा ले रही है तो उन्हें समय पर लेना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि अगर ब्लड प्रेशर बढ़ा तो मिर्गी की तरह झटके आ सकते हैं।

गर्भ के 20 सप्ताह के बाद हो सकता है प्रीक्लेम्पसिया

डॉ असना अशरफ ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर होने से गर्भावस्था के 20 हफ्ते बाद प्रीक्लेम्पसिया की शिकायत हो सकती है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला को पेशाब में प्रोटीन आ सकती है, किडनी के साथ ही अन्य अंगों जैसे लिवर, मस्तिष्क, फेफड़ों में पानी भरना आदि की शिकायत पैदा हो जाती है। इसके लिए जरूरी है कि गर्भवती महिला की नियमित जांच होनी चाहिये। उन्होंने बताया कि आवश्यकता इस बात की है कि गर्भावस्था का पता चलते ही गर्भवती को चिकित्सक से मिलना चाहिये और फिर सलाह के अनुसार समय-समय पर चेकअप कराती रहें।

हाई बीपी में मैगनीशियम सल्फेट देना जरूरी

डॉ उर्मिला सिंह ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर 140/90 से ज्यादा हो तो अलर्ट हो जाना चाहिये उन्होंने बताया कि रक्तचाप 160/110 पहुंचने की स्थिति में गर्भवती को मैगनीशियम सल्फेट अवश्य देना चाहिये। उन्होंने बताया कि छोटे अस्पतालों में भी यदि इस तरह का केस हो तो उसे बड़े अस्पताल रेफर करने से पहले मैगनीशियम सल्फेट अवश्य देना चाहिये तथा रेफरल परचे पर अंकित कर देना चाहिये कि उसे मैगनीशियम सल्फेट का कितना डोज दिया हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि गर्भवती के पेट में बच्चा यदि कम दिन का है तो उसे बचाने के लिए गर्भवती को कार्टिसोन लगाकर ही बड़े अस्पताल को रेफर करना चाहिये। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से होने वाली बीमारियों के चलते ही सबसे ज्यादा गर्भवती माताओं की मृत्यु होती है।

कैंसर में असहनीय दर्द से छुटकारे के लिए सुन्न कर दी जाती है नस

केजीएमयू केे एनेस्थीसिया विभाग की डॉ सरिता सिंह ने बताया कि महिलाओं के जननांगों जैसे बच्चेदानी, बच्चेदानी का मुंह, पेशाब की जगह में होने वाले कैंसर की एडवांस स्टेज में जब दर्द असहनीय हो जाये और किसी तरह की दवाओं से दर्द में आराम न मिले तो उसे सीधे अस्पताल लाना चाहिये। इस दर्द को नसों को सुन्न करके दर्द में आराम दिया जाता है। उन्होंने बताया कि क्वीनमेरी हॉस्पिटल में पेन क्लीनिक चलती है जहां असहनीय दर्द से पीडि़त कैंसरग्रस्त महिलाओं को नसों को सुन्न करके उन्हें दर्द से निजात दिलायी जाती है। उन्होंने बताया कि जरूरत पडऩे पर मार्फीन भी दी जाती है।
आज के सत्र में आईएमए की लखनऊ शाखा के अध्यक्ष डॉ पीके गुप्ता ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया तथा सचिव डॉ जेडी रावत ने धन्यवाद अदा किया।

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