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वेतन विसंगति के विरोध में स्‍वास्‍थ्‍य कर्मी 21 नवम्‍बर को निकालेंगे मशाल जुलूस

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की बैठक में लिया गया निर्णय
प्रतीकात्मक फोटो

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। फार्मासिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, लैब टेक्नीशियन व बीएचडब्‍ल्‍यू की वेतन विसंगति जैसी मांगों को लेकर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सभी कर्मचारी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा घोषित आंदोलन में सहभागिता करते हुए 21 नवंबर को सभी जिलों में मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

यह निर्णय प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से जुड़े सभी संवर्गों के पदाधिकारियों की साथ आज बलरामपुर चिकित्सालय में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री अतुल मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुई बैठक में लिया गया। अतुल कुमार मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह, राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव व महामंत्री अशोक कुमार, लैब टेक्नीशियन के अध्यक्ष सुरेश रावत, ऑप्टोमेट्रिस्ट संघ के अध्यक्ष सर्वेश पाटिल, बी0एच0डब्ल्यू0 संघ के अध्यक्ष धनन्जय तिवारी, एक्सरे टेक्नीशियन संघ मंत्री आर0के0पी0 सिंह, डेंटल हाइजेनिस्ट संघ के डी0डी0 त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।

अतुल मिश्रा ने बताया कि फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, व आप्टोमेट्रिस्ट संवर्ग की वेतन विसंगति के संबंध में राज्य वेतन समिति की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को लगभग 2 वर्ष पूर्व दी जा चुकी है परंतु अभी तक उस पर निर्णय कर शासनादेश निर्गत ना किए जाने से कर्मचारियों का मनोबल कमजोर हो रहा है एवं आर्थिक नुकसान हो रहा है।

बैठक में धनंजय तिवारी ने बताया कि 23 जुलाई 1981 को सभी यूनीपरपज वर्कर को मल्टीपरपज वर्कर बना दिया गया, पदनाम व कार्य की समानता एक कर दी गई परंतु वेतन 2011 से पूर्व के कार्मिकों को 2800 ग्रेड पे उसके बाद के कार्मिको को ग्रेड पे 2000 जा रहा है, एक ही पद के 2 वेतनमान एवं 2 पदों का एक वेतनमान है, अतः स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष व महिला की उक्त वेतन विसंगति दूर की जानी आवश्यक है।

परिषद के प्रमुख उपाध्यक्ष एवं फार्मासिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि वेतन विसंगति के अतिरिक्त उच्च पदों का सृजन सहित सभी संवर्गों के पदों के पुनर्गठन के सम्बन्ध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में 8 अक्टूबर 2018 व 12 फरवरी 2019 को निर्णय लिया गया था। समय सीमा तय होने के बावजूद मांगों पर कार्यवाही ना होने से कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है। विभिन्न संवर्गों के उच्च पदों पर पदोन्नतियां नहीं हो पा रही है, मूल पद रिक्त पड़े हुए हैं, जिन पर नियुक्तियां न होने से जनता को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं देने में परेशानियां हो रही हैं। विभागों में पुनर्गठन ना होने से उच्च पदों का सृजन नहीं हो रहा है।

उन्‍होंने कहा कि विभागों में मानक के आधार पर पद सृजित नहीं है, विभाग में फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, एक्सरे टेक्नीशियन सहित अनेक पद मानक के अनुरूप नहीं हैं। जो पद सृजित हैं उन पर भी नियुक्तियाँ नहीं हो रही हैं। पदों पर स्थाई नियुक्तियों की जगह संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य को लिया जाना जनहित में नहीं है। संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों का भी भविष्य अंधकार मय है। उन्‍होंने कहा कि अब कर्मचारियों के सब्र की सीमा समाप्त हो रही है। बैठक में चिकित्सा विभाग के सभी संवर्गो के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे तथा निर्णय लिया गया कि 21 नवम्बर के पूर्व जनपदों में तैयारी बैठकें की जायेंगी।