Thursday , September 29 2022

अमीनाबाद के झंडे वाला पार्क में झंडा फहराने के कारण अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गये थे गुलाब सिंह लोधी

-सात दिवसीय महोत्‍सव में आजादी में अमीनाबाद की दास्तानविषयक कार्यक्रम आयोजित

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के तत्वावधान में 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लखनऊ पर आधारित सात दिवसीय “आजादी का अमृत महोत्सव” के पहले दिन “आजादी में अमीनाबाद की दास्तान” विषयक कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

मयंक रंजन के संयोजन में हुए समारोह में बताया गया कि लखनऊ का अमीनाबाद स्वाधीनता संग्राम का एक ऐतिहासिक केंद्र रहा है। ब्रिटिश शासन काल में वर्ष 1914 में अमीनाबाद का पुनर्निर्माण कराया गया। चारों तरफ सड़कें निकाली गईं, पार्क निकाले गये जिनका नाम अमीरुद्दौला पार्क तथा अमीनाबाद पार्क दिया गया। स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान अमीरुद्दौला पार्क में ही सबसे पहले भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सन् 1928 में फहराया गया और तब से यह पार्क झंडे वाला पार्क के नाम से प्रसिद्ध हो गया। उन्‍होंने बताया कि उसी दौरान की बात है एक क्रांतिकारी गुलाब सिंह लोधी ने इसी पार्क में पेड़ पर चढ़कर तिरंगा फहराने का प्रयास किया तो एक अंग्रेज अधिकारी ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी, जिनकी मूर्ति बाद में इसी पार्क में स्थापित की गई। 7 अगस्त 1921 को महात्मा गांधी लखनऊ आए और इसी पार्क में भाषण दिया जिसमें एक लाख से अधिक लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

अमीनाबाद में झंडे वाले पार्क के सामने छेदीलाल धर्मशाला भी एक ऐतिहासिक धर्मशाला है, जहां काकोरी कांड में शामिल विभिन्न स्थानों से आए हुए क्रांतिकारी अलग-अलग कमरे में 8 अगस्त 1925 को ठहरे थे। इस धर्मशाला में स्वाधीनता संग्राम के समय कई बड़े-बड़े क्रांतिकारी नेता यहां आकर ही ठहरते थे। 

लखनऊ के अमीनाबाद के प्रसंग में एक ऐसी शख्सियत का नाम न लिया जाए तो अमीनाबाद का इतिहास अधूरा सा रहेगा, वह नाम है आधुनिक लखनऊ के निर्माता बाबू गंगा प्रसाद वर्मा। बाबू गंगा प्रसाद वर्मा का जन्म 13 अगस्त 1863 को हरदोई के पिहानी कस्बे में हुआ था। बाबू गंगा प्रसाद वर्मा ने मात्र 20 वर्ष की आयु में ही 1883 में ‘हिन्दुस्तानी’ नामक साप्ताहिक उर्दू समाचार पत्र निकाला। उसके बाद 1887 में अंग्रेजी समाचार पत्र ‘एडवोकेट’ निकाला। 28 दिसंबर 1885 को कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन बम्बई में आयोजित हुआ। इस अधिवेशन में बाबू गंगा प्रसाद वर्मा जी 72 प्रतिनिधियों में से एक थे। अधिवेशन से वापस लौटकर उन्होंने अपने प्रांत में कांग्रेस की नींव रखी और जीवन भर उसकी सेवा करते रहे और अपने प्रांत में कांग्रेस कमेटी के वे प्रथम अध्यक्ष हुए। 

बाबू गंगा प्रसाद वर्मा ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय कि स्थापना में धन-संग्रह के अभियान पर निकले महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का लखनऊ में पूर्ण रूप से सहयोग किया। लखनऊ में मालवीय जी बाबू गंगा प्रसाद वर्मा के साथ ही ठहरते थे। गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल पुस्तकालय भवन के विषय में एक रोचक तथ्य यह है कि मालवीय जी के लखनऊ में एक बार के प्रवास में गंगा प्रसाद कुछ मित्रों सहित रात में मालवीय जी को वह स्थान दिखाने ले गए, जो उन्होंने पुस्तकालय बनाने के लिए लिया था। उस अंधेरे में वर्मा जी ने मालवीय जी से पुस्तकालय का भूमि पूजन करने को कहा, मालवीय जी इस आग्रह को अस्वीकार न कर सके और पुस्तकालय का भूमि पूजन किया। वर्मा जी के जीवन काल में उनका स्वप्न पूरा न हो सका।

1914 में उनके निधन के बाद उनके प्रशंसकों के प्रयत्न से गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल पुस्तकालय एवं वाचनालय और वर्मा जी की स्मृति में गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल हाल का निर्माण हुआ। इस पुस्तकालय का शिलान्यास 10 मार्च 1923 को सर तेज बहादुर सप्रू द्वारा एवं इसका उद्घाटन सर विलियम सिन्क्लेर मेरिस गवर्नर द्वारा 14 मार्च 1925 को हुआ। गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल हॉल में गांधी, जिन्ना, नेहरू आदि बड़े-बड़े नेताओं ने कई सभाओं का आयोजन किया। उत्तर प्रदेश की प्रथम राज्यपाल सरोजिनी नायडू की अध्यक्षता में सन् 1929 में गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल हाल में ही कांग्रेस की यूथ विंग की सभा आयोजित हुई। 

अमीनाबाद में सबसे पुराना अवशेष अवध के पहले नवाब बुरहान्मुल्क की पत्नी खदीजा खानम की कब्र है जो झंडे वाले पार्क के पश्चिमी किनारे पर है। इस काल की एक मस्जिद कब्र के सामने है जो अमीनाबाद में झंडे वाले पार्क की भूमिगत पार्किंग के सामने पड़ाईन की मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध है। इसका निर्माण अवध के पहले नवाब बुरहान्मुल्क (1722-1739) की पत्नी खदीजा खानम की मु्ंह बोली बहन रानी जय कुँवर पाण्डे ने कराया था। इस मस्जिद की विशेषता है कि यह भूमि-स्तर पर बनी है, जबकि सामान्यतः मस्जिद का निर्माण कुछ ऊँचाई पर किया जाता है। गजेटियर के अनुसार इस मस्जिद में सभी संप्रदायों के अनुयायी मन्नतें माँगने आया करते थे। यह मस्जिद अपनी सादगी में भी शानदार दिखाई देती है। अवध के अमीनाबाद में एक और पार्क बनाया गया जिसे गूंगे नवाब पार्क कहा जाता है, जो अब प्रताप मार्केट कहलाता है। इस पार्क में 20 अक्टूबर 1920 को एक सभा आयोजित हुई जिसमें महात्मा गांधी के साथ मुहम्मद अली और शौकत अली भी आए जिसमें गांधी जी ने राष्ट्रीय विद्यालय का उद्घाटन किया। 

पुस्‍तकालयाध्‍यक्ष लव श्रीवास्तव ने गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल पुस्तकालय एवं वाचनालय, अमीनाबाद, लखनऊ ने स्वाधीनता संग्राम के समय अमीनाबाद के इतिहास के महत्व को बताया। इतिहास की अध्यापिका तबस्सुम ने अमीनाबाद के पुराने अवशेषों के बारे में जानकारी दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

two × 3 =

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.