Thursday , December 2 2021

खुशखबरी : चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति में बदलाव वापस, समाप्‍त हो रहे पद भी रहेंगे कायम

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधिमंडल के मिलने के बाद मुख्‍य सचिव ने दिये निर्देश

लखनऊ। जिला पुरुष महिला चिकित्सालयों को मेडिकल कॉलेज बनाये जाने पर पूर्व से सृजित तकनीकी/ पैरामेडिकल के पदों को समाप्त न करते हुए वहीं पर समायोजित करने, चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए बजट व्यय के मानक मदों की ग्रुपिंग सही करने सहित कई माँगों पर आज मुख्य सचिव ने चिकित्सा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, कार्मिक व वित्त विभाग को मांग के अनुसार प्रभावी सकरात्मक कार्यवाही के निर्देश दिए।

 

महामंत्री, अतुल मिश्रा व प्रमुख उपाध्‍यक्ष सुनील यादव द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को मुख्य सचिव से लोकभवन में मिला तथा अवगत कराया कि नए मेडिकल कॉलेज बनाते समय पूर्व से सृजित पदों को समाप्त किये जाने के निर्देश चिकित्सा शिक्षा द्वारा जारी किए गए हैं जो जनहित एवं कर्मचारी हितों के प्रतिकूल है।

मेडिकल कॉलेज में पदों को समाप्त किया जाना कर्मचारी एवं जनता दोनो के लिए अत्यंत नुकसानदायक है। आज सभी पहलुओं से मुख्य सचिव को अवगत कराया गया। परिषद ने अवगत कराया कि जिला पुरुष/ जिला महिला चिकित्सालय के पद समाप्त हो जाने से जनता को मिलने वाली निःशुल्क चिकित्सा पर प्रभाव पड़ेगा।

 

परिषद के प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज बनने पर फार्मासिस्ट संवर्ग के 33, लैब तकनीशियन के 8 सहित कुल 61 पद समाप्त किये जाने के शासनादेश जारी किए गए हैं, जिससे सरकार द्वारा चिकित्सा संसाधन में उच्चीकरण के स्थान पर निम्नीकरण हो जाएगा। निःशुल्क औषधि वितरण तथा अन्य सेवाएं प्रभावित होंगी।

 

वहीं चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु मानक मदों के ग्रुपिंग में फेरबदल से चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाखों रूपया लटकने का मामला भी मुख्य सचिव के समक्ष रखा गया। व्यय के मानक मदों की गुपिंग पूर्ववत करते हुए 1, 3, 6, 49 मद को एक साथ ग्रुप करने की मांग की गई, अवगत कराया गया कि कर्मचारियों की चिकित्सा में व्यय होने वाले मद की ग्रुपिंग में गलत रूप से फेरबदल के कारण वित्तीय वर्ष 2018-19 में कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाखों रूपये का भुगतान नहीं हो सका। अधिकांश कर्मचारी मार्च माह में भुगतान की आस लगाये थे, परन्तु बजट कम आवंटित होने, कैशलेस के नाम पर बजट की कटौती होने तथा मानक मद 01-वेतन, 03-मंहगाई भत्ता, 06-अन्य भत्ते के ग्रुप से चिकित्सा प्रतिपूर्ति सम्बन्धी मद 49-चिकित्सा व्यय को अलग कर दिये जाने के कारण भुगतान पूर्ण नहीं हो सका।

विदित हो कि पूर्व प्रचलित व्यवस्था के तहत उक्त चारों मद एक ही ग्रुप में थे, जिससे कि एक ही ग्रुप के किसी भी मद में धनराशि कम होने पर दूसरे मद की धनराशि उपयोग कर ली जाती थी, परन्तु प्रमुख सचिव, वित द्वारा निर्गत शासनादेश सं0-1/2018/बी-3-441/दस -2018- 100(4)/2002-ब0मै0-टी0सी0-2, दिनाॅक 04.10.2018 में ग्रुप-1 में से 49-चिकित्सा व्यय को अलग कर दिया गया, जिससे कि वित्तीय वर्ष के अन्त में कर्मचारियों का लाखों रुपये का चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का भुगतान रुक गया।

 

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश के महामंत्री अतुल मिश्रा ने शासनादेश दिनांक 04.10.2018 में हुई ग्रुपिंग को पूर्व की भांति रखते हुए पुनः शासनादेश दिनांक 21.06.2010 के अनुरूप किये जाने की मांग की। मुख्य सचिव ने इसे पूर्ववत रखे जाने हेतु प्रमुख सचिव वित्त को निर्देश दिए।

 

वहीं पदोन्नति के लिए एसीआर में ‘अतिउत्तम’ की बाध्यता के सम्बंध में मुख्य सचिव के साथ 9 अक्टूबर 2018 को सम्पन्न हुई बैठक में बनी सहमति के अनुसार वित्त विभाग को स्पष्टीकरण जारी करना था जिससे कर्मचारियों की पदोन्नति व एसीपी में आ रही समस्या का समाधान हो सके जो अभी तक नहीं हो पाया जिस पर मुख्य सचिव ने वित्त विभाग को निर्देश दिया कि अतिशीघ्र स्पष्टीकरण जारी कर दिया जाये।

 

मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव कार्मिक को निर्देश दिया कि राजकीय निगमों में जिन निगमों को सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिला है तथा अत्यधिक घाटे में चल रहे 8 निगमो को बंद करके उनके कर्मचारियों को विभाग में समायोजित करने तथा महंगाई भत्ते की किस्‍त का भुगतान आदि मामलों पर तत्काल बैठक आहूत कर इस बैठक में स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ की लम्बित मांगों को भी बैठक में शामिल करें। उल्लेखनीय है कि स्थानीय निकाय के 558 दैनिक भोगियो को विनियमितीकरण करने, संवर्ग पुनर्गठन एवं वेतन विसंगितयों पर विभाग द्वारा कोई निर्णय नहीं किया गया है।

 

वार्ता में आज आज कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वीपी मिश्रा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार रावत, महामंत्री अतुल मिश्रा, , अध्यक्ष स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ शशि मिश्रा, महामंत्री राजकीय निगम कर्मचारी महासंघ घनश्याम यादव, परिषद के संगठन प्रमुख केके सचान, प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव, आशीष पाण्डेय आदि मौजूद रहे।