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फैटी लिवर मतलब हेपेटाइटिस को न्यौता

फैटी लिवर में बनने लगते हैं नुकसानदायक केमिकल

लखनऊ। मोटापे की वजह से हेपेटाइटिस बी बढ़ रहा है, यह एक वायरस है जो लिवर को संक्रमित करता है और इससे जीन संक्रमित हो रहे हैं। क्योंकि मोटापे से लिवर फैटी हो जाता है और फैटी लिवर में ऐसे केमिकल बनने लगते हैं जो सामान्य कोशिकाओं को हानि पहुंचाते हैं।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस की पूर्व संध्या पर दी जानकारी

यह जानकारी बुधवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस की पूर्व संध्या पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालयक में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.सुमित रूंगटा ने दी। प्रो. रूंगटा ने बताया कि विश्व में 240 मिलियन लोग हेपेटाइसिट बी से ग्रसित हैं। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग मानते हैं कि अत्यधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन करने पर लिवर सिरोसिस होता है लेकिन एेसा नहीं है। अल्कोहल तो इस रोग का एक कारण है। मोटापे के कारण पनपने वाला हेपेटाइटिस-बी भी लिवर के लिए घातक है। उन्होंने बताया कि लिवर की जांच बीच-बीच में कराते रहे क्योंकि आधुनिक जीवनशैली में फैटी लिवर की समस्या आम होती जा रही है। सही समय पर रोग की पहचान कर उसका इलाज किया जा सकता है।

चटनी और सलाद भी हैं बड़े कारण

विभाग के डॉ.अजय कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस पांच प्रकार का होता है ए,बी,सी,डी और ई। इनमें से हेपेटाइटिस ए और ई दूषित भोजन के सेवन से होता है और बी,सी व डी संक्रमित खून से फैलता है। भारत में हेपेटाइटिस बी से लगभग चार करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं इलाज के अभाव में आगे चलकर यह सिरोसिस व लिवर कैंसर में बदल सकता है। जिसके बाद लिवर प्रत्यारोपण ही एक मात्र इलाज बचता है। उन्होंने बताया कि शोध में यह पाया गया है कि हेपेटाइटिस ए और ई चटनी और सलाद के अधिक सेवन से फैलता है। एेसा इसलिए होता है क्योंकि चटनी और सलाद को गर्म नहीं किया जाता है जिसके कारण उसका संक्रमण उसी में रह जाता है और मनुष्य के लिवर को संक्रमित कर देता है। उन्होंने बताया कि यदि हेपेटाइटिस के टीके लगवा लिए जाए 95 प्रतिशत लोग इस बीमारी से अपने आप को बचा सकते है।

कारण-
-संक्रमित सुइयों के उपयोग
– एचसीवी संक्रमण का जोखिम
-इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वाले
-बिना स्टर्लाइज किए गए चिकित्सा या दंत उपकरण का उपयोग
– बिना जांच का बाहरी खून
-उपकरणों के साथ टैटू गुदवाना
-असुरक्षित यौन संबन्ध बनाना

लक्षण-
-वजन कम होना।
-खून की उल्टी होना।
-ज्यादा हिचकी आना।
-आंखें और पेशाब पीली होना।
-पेट में दर्द होना।
-शारीरिक कमजोरी महसूस होना।
– मल का रंग काला होना।
-अत्याधिक मोटापा।

बचाव-
-दूसरों का टूथब्रश इस्तेमाल न करें।
-सफाई का ध्यान रखें।
-साबुन से हाथ धोकर ही भोजन करें।
– खून चढ़वाने से पहले टेस्ट करवा लें।
-एक सीरिंज, दो बार इस्तेमाल न करें।
– असुरक्षित यौन संबन्ध से बचे।

 

 

 

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