खूब छकाया, लेकिन अंतत: पकड़े गये डॉ कफील खान

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में तीसरी गिरफ्तारी, छह अभी भी पकड़ से बाहर

लखनऊ। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई बच्चों की मौत के मामले में एईएस प्रभारी डॉ कफील खान अंतत: पुलिस के हत्थे चढ़ गये। गिरफ्तारी की लम्बी कोशिशों के बाद डॉ कफील को आज सुबह एसटीएफ ने गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले पुलिस कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा और उनकी पूर्णिमा शुक्ला को गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों इस समय न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। जांच में दोषी पाये गये छह अन्य लोग अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।

 

गिरफ्तारी न होने के बाद आरोपी डॉ. कफील सहित सातों अभियुक्तों के खिलाफ शुक्रवार को पुलिस ने कोर्ट से गैर जमानती वारंट लिया था। इसके साथ ही पुलिस ने डॉ कफील को पकडऩे के लिए दबिश तेज कर दी थी। इससे पहले पुलिस सभी अभियुक्तों से पूछताछ में सहयोग करने के लिए कह रही थी। पर किसी अभियुक्त ने अभी तक ऐसा नहीं किया।

 

यही नहीं पुलिस से छिपने के प्रयास में ही पूर्व प्राचार्य डा. राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डा. पूर्णिमा शुक्ला को एसटीएफ ने कानपुर से गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें वारंट बी पर गोरखपुर ले आया गया और गुरुवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। अन्य अभियुक्तों से पूछताछ के लिए पुलिस ने उन्हें नोटिस दिया, उनके घरवालों से सम्पर्क कर आरोपियों को विवेचक के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा, लेकिन वे सामने नहीं आए।

 

इसके साथ ही पुलिस उनके खिलाफ गैर जामनती वारंट लेने के प्रयास में भी जुटी रही। शुक्रवार को पुलिस को इसमें कामयाबी मिली। विवेचक अभिषेक सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम महेन्द्र प्रताप सिंह के अदालत में गैर जमानती वारंट के लिए आवेदन किया जिस पर अदालत ने फरार चल रहे सातों अभियुक्तों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।

ज्ञात हो बीती 10 व 11 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कालेज में कुछ घंटों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई। इन दो दिनों में बालरोग विभाग में 30 मासूमों की मौत हो गई। इसके अलावा मेडिसिन में भी 18 मरीजों की मौत हो गई। इस घटना के बाद शासन ने मुख्य सचिव की अगुआई में जांच टीम गठित की थी। टीम की रिपोर्ट के बाद नौ दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।