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डॉक्‍टर्स अपने लिए प्रोटेक्‍शन एक्‍ट की आवाज उठायें, वकील पूरी मदद करेंगे

-यूपी बार काउंसिल के पूर्व अध्‍यक्ष ने केजीएमयू में अपने भाषण में किया आह्वान
-इंस्‍टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के कार्यक्रम में 450 लोगों को दिलायी गयी संविधान की शपथ  
परेश मिश्र

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। काला कोट (वकील) और सफेद कोट (चिकित्‍सक) दोनों ही जीवन की रक्षा करते हैं। इधर डॉक्‍टरों पर हमले की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है, ऐसे में यह जरूरी है कि डॉक्‍टर्स प्रोटेक्‍शन एक्‍ट बनना चाहिये, उन्‍होंने कहा कि कुलपति को प्रोटेक्‍शन एक्‍ट लाने का प्रस्‍ताव लाना चाहिये, इसके लिए डॉक्‍टरों को वकीलों का पूरा सपोर्ट मिलेगा।

देखें वीडियो- संविधान दिवस पर केजीएमयू पहुंचे उ.प्र. बार काउंसिल के पूर्व अध्‍यक्ष परेश मिश्र ने क्‍या कहा

यह बात उत्‍तर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्‍यक्ष परेश मिश्र ने किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय के पैरामेडिकल साइंस इंस्‍टीट्यूट के तत्‍वावधान में संविधान दिवस के मौके पर मंगलवार को ‘संविधान से समरसता की ओर’ विषय पर आयोजित गोष्‍ठी में मुख्‍य वक्‍ता के रूप में कही। परेश मिश्र के नाम सबसे कम उम्र का बार काउंसिल अध्‍यक्ष होने का रिकॉर्ड है। उन्‍होंने कहा कि मेरे रिश्‍तेदार जब यहां भर्ती थे तो मैंने डॉक्‍टर्स के साथ मरीजों के तीमारदारों का व्‍यवहार देखा है। इसलिए मैं समझता हूं कि डॉक्‍टर्स प्रोटेक्‍शन एक्‍ट होना चाहिये। हम लोगों को प्रोटेक्‍शन एक्‍ट की मांग उठाने में आप लोगों की मदद करने पर गर्व होगा।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को सत्र न्यायालय का दौरा भी कराया गया, जिससे विद्यार्थियों को वहां की क्रिया विधि के बारे में जानकारी प्राप्त हो। इसके साथ ही वहां एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। संविधान दिवस के अवसर पर कलाम सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में 450 से ज्यादा विद्यार्थियों को संविधान की शपथ दिलाई गई। इस कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एम0एल0बी0 भट्ट ने संविधान की किताब को धर्म की किताब से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण बताते हुए इसकी मुख्‍य बातों को बताया। उन्‍होंने कहा कि हमारे यहां संविधान के तहत प्रत्‍येक नागरिक को बहुत से अधिकार दिये गये हैं, लेकिन साथ ही कर्तव्‍य भी हैं, जिनका पालन होना चाहिये, उन्‍होंने कहा कि अपनी बात रखने की आजादी जरूर है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नारेबाजी की जाये भारत तेरे टुकड़े होंगे…।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ समीर मिश्रा ने कहा कि हमारा संविधान बहुत बड़ा है, इसी संविधान के तहत भगवान राम की जन्‍मभूमि उन्‍हें वापस मिल पायी। दुनिया के किसी देश में अभिव्‍यक्ति की इतनी आजादी नहीं है। उन्‍होंने कहा कि संविधान सभी के बारे में सोचता है। पैरामेडिकल संकाय के अधिष्‍ठाता प्रो विनोद जैन ने कहा कि आज यहां कुल मिलाकर 450 लोगों को संविधान के अनुसार चलने की शपथ दिलायी गयी। उन्‍होंने बताया कि हमें भारतीय संस्‍कृति को नहीं भूलना चाहिये। उन्‍होंने जंगल के संरक्षण पर भी जोर दिया और कहा कि हमारे लिए कुल क्षेत्र का 33 प्रतिशत जंगल जरूरी है, जबकि इस समय कागजों पर 14 प्रतिशत तथा असलियत में सिर्फ 11 फीसदी जंगल एरिया है।  डाॅ0 अतिन सिंघई द्वारा संविधान से जुड़ी जानकारी विद्यार्थियों को दी गई। पोस्टर प्रतियोगिता में डिप्लोमा इन कार्डियो टेक्नीशियन की छात्रा श्रद्धा मोदनगल को प्रथम पुरस्कार, डिप्लोमा इन कार्डियो टेक्नीशियन के छात्र इन्द्रजीत गौतम को द्वितीय पुरस्कार तथा डिप्लोमा इन कार्डियो टेक्नीशियन की छात्रा स्वाती सिंह को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।

इस मौके पर कलाम सेंटर के आंगन में बनायी गयी थीं विभिन्‍न प्रकार की रंगोली।

इस मौके पर आकर्षक रंगोली सजायी गयी थींं। अधिष्ठाता, चिकित्सा संकाय, प्रो0 उमा सिंह द्वारा एम0बी0बी0एस0 छात्रों के लिए संविधान दिवस के अवसर पर कलाम सेन्टर में 10 बजे रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें एम0बी0बी0एस0 छात्रों द्वारा टीम बनाकर प्रतिभाग किया गया तथा भारत के संविधान के विविध बिन्दुओं का आकर्षक चित्रण किया गया। प्रो0 विनोद जैन, अधिष्ठाता, पैरामेडिकल संकाय, शैली अवस्थी, विभागाध्यक्ष, बाल विभाग तथा प्रो0 सुनीता तिवारी, विभागाध्यक्ष, फिजियोलॉजी विभाग द्वारा विजेता टीम को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर उनका उत्साह वर्धन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने के कारण उन्होने संविधान के कुछ पहलुओं का ध्यान से अध्ययन किया जिससे उनमें भारत के संविधान के प्रति आदर और बढ़ गया है ।कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन दुर्गा गिरी के द्वारा किया गया।

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