चिकित्सकों की मांग, अब न करें तबादले

प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ की कार्यकारिणी बैठक में उठी मांग

वार्षिक स्थानांतरण नीति के प्राविधानों का उल्लंघन हुआ

लखनऊ। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस वर्ष को चिकित्सकों के लिए स्थानांतरण शून्य सत्र घोषित करने की मांग की है, संघ का कहना है कि 30 जून तक आने वाली स्थानांतरण सूची 22 जुलाई तक नहीं आने से वार्षिक स्थानांतरण नीति के प्राविधानों का उल्लंघन हुआ है।
यह जानकारी संघ के महासचिव डॉ अमित सिंह ने देते हुए बताया कि शनिवार 22 जुलाई को राज्य मुख्यालय पर केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह मांग की गयी। संघ के अध्यक्ष डॉ अशोक यादव की अध्यक्षता में हुई बैैठक में कहा गया कि बार-बार स्थानांतरण सत्र बढ़ाये जाने से चिकित्सकों में असमंजस की स्थिति है साथ ही रोष भी है। बैठक में सदस्यों का कहना था कि प्राइमरी से लेेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के शैक्षिक संस्थानों मेंं शैक्षिक सत्र 1 जुलाई से शुरू हो चुका है ऐसे में अब स्थानांतरण होने का अर्थ है बच्चों की पढ़ाई मेंं व्यवधान आना।

महामारी के मौसम में पड़ेगा विपरीत असर

बैठक में यह भी कहा गया कि वर्षा और बाढ़ के मौसम में डेंगू, स्वाइन फ्लू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसे रोगों का प्रकोप जारी है, जिस कारण चिकित्सकों के सभी अवकाश निरस्त किये जा चुके हैं, ऐसे स्थानांतरण हुआ तो महामारी के मौसम में चिकित्सा सेवाएं बाधित और अव्यवस्थित जायेंगी। बैठक में कहा गया कि अगस्त माह में स्थानांतरण होने से संवर्ग और चिकित्सा सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बैठक में कहा गया कि स्थानांतरण का उद्देश्य सेवाओं की बेहतरी के लिए होता है न कि अव्यवस्था और दंडात्मक उद्देश्यों के लिए। कहा गया कि अन्य विभागों में स्थानांतरण सत्र का समापन हो चुका है और हमारे यहां अभी शुरू ही नहीं हुआ है। संवर्ग की वार्षिक स्थानान्तरण नीति दोषपूर्ण है, उससे अव्यवस्था फैलने के अनेक कारण मौजूद है और संवर्ग की वर्तमान घोषित स्थानान्तरण नीति परिपक्व तथा समग्र-तथ्यों पर आधारित नहीं है।

स्वेच्छाचारी तरीके से भर्तियां क्यों?

डॉ अमित सिंह ने बताया कि बैठक में कहा गया कि चिकित्सा सेवा नियमावली में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की भर्ती का स्रोत, केवल लोक सेवा आयोग द्वारा ही है। पिछले कुछ वर्षों से चिकित्सा विभाग में महानिदेशालय की जानकारी के बिना स्वास्थ्य मिशन / यूपीएचएसएसपी जैसी एजेन्सियों के माध्यम से, सेवा-प्रदाता निजी कम्पनियों के द्वारा, चिकित्सकों की सरकारी अस्पतालों में भर्ती की जा रही है। इन एजेन्सियों द्वारा भर्ती चिकित्सकों, चिकित्सकों की सेवा शर्तें, और उनके कार्य-स्थल का निर्धारण, स्वेच्छाचारी तरीके से किया जा रहा है। ऐसे में चिकित्सकों की वार्षिक स्थानान्तरण नीति में बिना व्यापक संशोधन किये, संवर्ग के चिकित्सकों का स्थनान्तरण किया जाना, लोकहित के विरुद्ध होगा।

अधिवर्षता आयु चिकित्सकों से विकल्प क्यों नहीं लिया गया

डॉ अमित सिंह ने बताया कि बैठक में इस बात पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गयी कि सरकार द्वारा चिकित्सकों की अधिवर्षता आयु में परिवर्तन करने में सरकार ने सेवारत-चिकित्साधिकारियों से विकल्प लेने की शर्त को मनमाने ढंग से समाप्त कर दिया है। ऐसा किया जाना नैसर्गिक-न्याय के न केवल विरुद्ध है अपतिु सेवा में योगदान के समय प्रवृत्त, सेवा-शर्तों, जिनमें अधिवर्षता आयु भी शमिल है, में बिना-सहमति, बदलाव किया जाना, और उस बदलाव को चुनने या न चुनने का विकल्प, समाप्त किया जाना, विधि- विरुद्ध निरंकुश कार्यवाही है।

डॉ अमित सिंह ने बताया कि बैठक में सरकार से अपेक्षा की गयी, कि संवर्ग के विभिन्न सेवा सम्बन्धी विषयों पर, सरकार, लोकहित में सकारात्मक कार्यवाही करेगी। संघ की आगामी माह में आहूत राज्य-कार्यकारिणी की बैठक में सम्बन्धित सभी विषयों पर, आगे की रणनीति पर, निर्णायक फैसला किया जायेगा।