-भारत-नेपाल सीमा के सुदूर थारू बाहुल्य एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए श्री गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0 को किया गया रवाना
–6 से 8 फरवरी तक आयोजित की जा रही इस स्वास्थ्य सेवा यात्रा में 2.5 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचने का संकल्प

सेहत टाइम्स
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि मेडिकल संस्थाओं में जिस तरह से सफेद कोट आतंकवाद का नेटवर्क फ़ैल रहा है, उसे देखते हुए हमारे छात्र-छात्राओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसी किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए जिस भी तरह के कदम आवश्यक और नियमसम्मत हों, वे उठाये जाने चाहिये, क्योंकि राष्ट्र की सुरक्षा ऐसा मुद्दा है जिससे किसी भी तरह से कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता।

उप मुख्यमंत्री ने यह बात आज 5 फरवरी को यहां डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में श्री गुरु गोरखनाथ सेवा यात्रा के छठवें संस्करण का शुभारंभ के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में दिये अपने वक्तव्य में कही। उन्होंने कहा कि इस तरह से मेडिकल कॉलेज के लोगों का इन जनजातीय क्षेत्रों में जाना और सेवा का कार्य करना अनुकरणीय है। उन्होंने मेडिकल छात्रों से बात करते हुए कहा कि अकेलापन किसी भी छात्र का सबसे बड़ा शत्रु है। सभी छात्रों को समूह में रहना चाहिए, चाहे वह पढ़ाई करना हो या कोई मनोरंजन।
एनएमओ अवध प्रांत के सचिव डॉ शिवम मिश्र के अनुसार इस यात्रा में भारत नेपाल सीमा के थारू बहुल सात जिलों क्रमशः पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर एवं बहराइच के लगभग 300 स्थानों पर यह मेडिकल कैम्प आयोजित हो रहे हैं। श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास एवं नेशनल मेडिकोज़ आर्गेनाइजेशन अवध एवं गोरक्ष प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा में इस वर्ष लगभग 70 मेडिकल संस्थानों से 700 चिकित्सक एवं मेडिकल छात्र भाग ले रहे हैं। ज्ञात हो भारत-नेपाल सीमा के सुदूर थारू बाहुल्य एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में आगामी 6 से 8 फरवरी तक तीन दिवसीय ‘गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा 6.0’ का आयोजन किया जा रहा है। 6 एवं 7 फरवरी को लगभग 300 केंद्रों (1500+ गांवों को कवर करते हुए) ग्रामीण स्तर पर विशेष शिविर लगाये जायेंगे तथा 8 फरवरी को शिविर वाले जिलों में विशाल स्वास्थ्य मेला लगाया जायेगा जिसमें निःशुल्क जांच, दवा वितरण एवं विशेष परामर्श दिया जायेगा। इस वर्ष 2.5 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचने का संकल्प किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से सीमा क्षेत्र से जुड़े लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन आए हैं। उन्होंने लखीमपुर जिले के चौगुर्जी गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि जब एनएमओ की टीम चौगुर्ज़ी गई और वहाँ के स्थिति को सरकार को बताया तो महज एक वर्ष में लंका कहे जाने वाला यह गांव पीपे के पुल में माध्यम से जुड़ गया। सरकार की तमाम योजनाएं वाहन पहुँच गई।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि इस सेवा यात्रा के माध्यम जहाँ मेडिकल के छात्र अपनी सेवायें दे रहे हैं बदले में उनको समाज के वास्तविक स्थिति का भी ज्ञान हो रहा जो उनके लिए एक जीवन भर की सीख है। कार्यक्रम के दूसरे विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण ने कहा कि भारत सरकार और प्रदेश की सरकार सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया निवारण के लिए जो कार्यक्रम चला रही है, उसमें एनएमओ के माध्यम से जो शोध कार्य हो रहे हैं, उससे बहुत सहायता मिली है। जनजातीय गांवों में एनएमओ और न्यास ने जो सेवा समितियां बनाई हैं, वह विभिन्न प्रकार के सेवा कार्यों में अपना अमूल्य योगदान दे रही है।
श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास के अध्यक्ष प्रो एमएलबी भट्ट ने बताया की न्यास ने जनजातीय क्षेत्रों में कैम्प के साथ ही मोबाइल वैन सेवा भी शुरू करने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप के लोहिया संस्थान के निदेशक प्रो सीएम सिंह ने कहा कि संस्थान लगातार सोशल आउटरीच के माध्यम से सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहा है। इस अवसर पर सैफ़ई मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अजय सिंह, NMO के राष्ट्रीय सचिव प्रो अश्विनी टंडन, प्रांत अध्यक्ष प्रो संदीप तिवारी भी मंच पर उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में श्रोता के तौर पर तमाम गणमान्य अतिथि जैसे स्थानीय विधायक ओपी श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, एनएमओ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष प्रो विजय कुमार, NMO गोरक्ष प्रांत के अध्यक्ष प्रो राजेश बरनवाल, क्षेत्रीय सचिव डॉ प्रभात पांडेय, लोहिया संस्थान के सीएमएस प्रो विक्रम सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यास के महासचिव डॉ भूपेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम के समाप्ति के बाद केसरिया ध्वज दिखाकर सभी प्रतिभागियों को बसों के माध्यम से उनके गन्वत्य स्थानों के लिए रवाना किया गया।

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