Friday , February 6 2026

जंतर-मंतर से एलान, नर्सों को बेमियादी हड़ताल पर जाने को मजबूर न करे सरकार, मांगों पर बात करे

-ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन के बैनर तले देश के विभिन्न राज्यों से आयीं नर्सेज का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन 

सेहत टाइम्स
लखनऊ। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन (AIGNF), नई दिल्ली के नेतृत्व में आज 6 फरवरी को प्रातः 10 बजे से 1 बजे तक दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर एक ऐतिहासिक एवं विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस आंदोलन में दिल्ली के साथ ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान, असम, महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से हज़ारों नर्सिंग कर्मियों ने भाग लिया। AIGNF ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही फेडरेशन के साथ अर्थपूर्ण संवाद प्रारंभ नहीं किया गया, तो नर्सिंग समुदाय को आगामी दिनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
यह जानकारी देते हुए ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशना के अतिरिक्त महामंत्री ने कहा कि यह धरना-प्रदर्शन 2 फरवरी से 5 फरवरी 2026 तक सफलतापूर्वक चले राष्ट्रीय ब्लैक बैज विरोध प्रदर्शन की निरंतरता में आयोजित किया गया, जिसमें नर्सों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया और यह सुनिश्चित किया कि मरीजों की सेवाएं पूरी तरह से निर्बाध बनी रहें। जंतर-मंतर पर आज की ऐतिहासिक उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि देश का नर्सिंग समुदाय अपने अधिकारों, सम्मान और न्यायसंगत सेवा शर्तों के लिए पूरी तरह एकजुट है।
उन्होंने बताया कि धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय सलाहकार जी.के. खुराना, अध्यक्ष रिंकी डांग, महासचिव अनिता पनवार एवं अतिरिक्त महासचिव अशोक कुमार द्वारा किया गया। मंच से संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नर्सें देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और नर्सिंग संवर्ग को सशक्त किए बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं संभव नहीं हैं।
धरना-प्रदर्शन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गईं:
•8वें केंद्रीय वेतन आयोग से संबंधित नर्सिंग मुद्दों पर AIGNF से पूर्व परामर्श
•वेतन, भत्तों एवं यूनिफॉर्म अलाउंस में देशभर में एकरूपता
•नर्सिंग सेवाओं में निजीकरण, संविदा एवं ठेका प्रथा पर तत्काल रोक
•नर्सिंग संवर्ग का पुनर्गठन (Cadre Restructuring)
•वरिष्ठ एवं उच्च रिक्त पदों पर तत्काल पदोन्नति एवं नियुक्ति
•सुरक्षित नर्स-रोगी अनुपात सुनिश्चित किया जाना
•संविदा कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन
•योग्यता भत्ता (Qualification Pay) में संशोधन
•नर्सिंग अनुभाग को पूर्व की भांति प्रभावी स्वरूप में बहाल किया जाना
•नर्सों से जुड़े लंबित सेवा मामलों का शीघ्र समाधान
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है तथा इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार से स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान नर्सों की वर्षों से लंबित, वास्तविक और जायज़ मांगों की ओर आकर्षित करना है।

नेता अपने भत्ते तुरंत बढ़वा लेते हैं, हम लोगों पर ध्यान नहीं देते : अशोक कुमार 

अतिरिक्त महासचिव अशोक कुमार जो राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री भी हैं, ने अपने जोशीले भाषण में कहा कि सरकार ने हमारा डेढ़ साल का डीए काट लिया, जबकि कोविड काल में 2020 में जब सारे प्राइवेट अस्पताल बंद थे तब यही हमारी नर्सें काम कर रही थीं।  उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर फूल गिरवाये लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा है कि हमारा डीए क्यों रोक लिया, ऐसे फूल हमें नहीं चाहिये। अशोक कुमार ने कहा कि चाहे कोई पार्टी के नेता हों जब अपने भत्ते बढ़वाना होता है तो मेजें थपथपा कर बढ़वा लेते हैं।
देशभर के केंद्रीय संस्थानों, रेलवे, ESIC, AIIMS, मेडिकल कॉलेजों, राज्य सरकारों के अस्पतालों तथा विभिन्न नर्सिंग संगठनों के प्रतिनिधियों ने मंच साझा किया, जिससे यह आंदोलन एक राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया।
फेडरेशन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह नर्सों के अमूल्य योगदान को समझे, तुरंत संवाद स्थापित करे और समस्याओं का समाधान करे। नर्सों की मांगों का समय पर निस्तारण न केवल उनके मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगा।
फेडरेशन ने कहा कि “जब देश की सेहत की देखभाल करने वाले सड़कों पर उतरने को मजबूर हों, तो यह पूरे राष्ट्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।”