सीएमओ का लोहिया संस्थान से प्रश्न, क्यों नहीं दी डेंगू होने की सूचना

लोहिया संस्थान में 25 छात्र-छात्राओं को बुखार, कई को डेंगू होने की पुष्टि

 

लखनऊ. डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान की लापरवाही पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने संसथान से सवाल उठाया है. सीएमओ ने कहा है कि जब संस्थान में पढ़ने वाले मेडिकल स्टूडेंट्स को डेंगू होने की पुष्टि हो गयी तो संस्थान ने इसकी सूचना सीएमओ को कार्यालय को क्यों नहीं दी.

हुआ यूँ कि यहाँ पढ़ने वाले 12 मेडिकल छात्रों को डेंगू की शिकायत हो गयी थी, खबर है कि इन विद्यार्थियों को कार्ड टेस्ट में डेंगू होने की पुष्टि हो गयी है. यहाँ करीब 25 छात्र-छात्राओं को बुखार की शिकायत है. इतना सब होने के बाद जब मामला खुला तो संस्थान के जिम्मेदार सफाई देते नजर आ रहे हैं.

 

अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने संस्थान को पत्र लिखकर पूछा है आखिर यह लापरवाही क्यों की गयी? सीएमओ ने संस्थान को भेजे पत्र में लिखा है कि अपने लिखा है कि आपके संस्थान में मेडिकल छात्र-छात्राओं को डेंगू घनात्मक होने की पुष्टि हुई है, इसलिए संस्थान में एंटी लार्वा छिडकाव एवं फोगिंग कराये अपेक्षा की गयी है. सीएमओ ने अपने पत्र में लिखा है कि जब आपके संस्थान में छात्रों को डेंगू होने की पुष्टि हुई थी तो आपने सीएमओ कार्यालय को सूचना क्यों नहीं दी. यह भी बताएं कि डेंगू की जाँच की पुष्टि किस विधि से जांच करके की गयी है.

 

 

ज्ञात हो डेंगू चूँकि एक संक्रामक रोग है और देखते ही देखते एक से दूसरे में फैलता है इसलिए इस पर रोक लगाने के लिए व्यापक प्रक्रिया तैयार की गयी है जिसकी जिम्मेदारी सीएमओ को सौंपी गयी है. इसी के तहत सीएमओ ने संस्थान से पूछताछ की है. लोहिया संसथान में इसी साल से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हुई है. यहाँ पर पढ़ने वाले ज्यादा स्टूडेंट्स लखनऊ से बाहर के हैं, इसलिए ये स्टूडेंट्स यहीं संस्थान में बने छात्रावास में रहते हैं. संस्थान के परिसर का यह हाल है चारों ओर गन्दगी का अम्बार है, बरसात के दिनों में यहाँ जलभराव हो जाता है, जिसमे मच्छर पनपते हैं. बुखार वाले स्टूडेंट्स को लेकर उनके घरवाले भी चिंतित हैं, तथा कुछ अभिभावक अपने बच्चों को घर ले जाने के लिए संसथान पहुँच भी गए हैं.

जब जिम्मेदारों का है यह हाल तो क्या उम्मीद करें और किससे करें. दूसरों के स्वास्थ्य को ठीक करने का बीड़ा उठाने वाले जिम्मेदार लोग अपनों के प्रति ही इतने लापरवाह हैं कि इन पर संदेह होता है कि आम जनता का भला क्या करेंगे.