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गिरोहबंद दलाल चला रहे केजीएमयू में लाल खून का काला धंधा

-फर्जी कागजातों के पकड़े जाने पर हुआ खुलासा, चौक कोतवाली में एफआईआर के लिए भेजा गया पत्र

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के शताब्दी अस्पताल स्थित ब्लड बैंक से खून दिलाने के नाम पर बाकायदा गिरोह बनाकर दलाली का काला धंधा चल रहा है। इसके शिकार रोजाना लोग हो रहे हैं। इन दलालों के दुस्साहस का आलम यह है कि बाकायदा इसके लिए ये फर्जी हस्‍ताक्षर युक्‍त विभागीय दस्‍तावेजों की नकल तैयार कर मरीजों के तीमारदारों को लूट रहे हैं। इसका खुलासा होने पर केजीएमयू प्रशासन ने चौक कोतवाली में एफआईआर लिखायी है।

केजीएमयू के प्रॉक्‍टर डॉ आरएएस कुशवाहा के अनुसार इस विषय में ट्रांसफ्यूज़न विभाग/ब्‍लड बैंक की प्रभारी प्रो तूलिका चन्‍द्रा ने मौजूद साक्ष्‍य सहित प्रॉक्‍टर को सूचित किया है, इसी के बाद उन्‍होंने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की काररवाई की है। पत्र से मिली जानकारी के अनुसार दलाल विभाग के फर्जी पत्र तैयार करके लोगों को डोनर के बिना खून दिलाने की बात कहकर रकम वसूलते हैं, यही नहीं ये दलाल इस कार्य में तीमारदारों को भी पैसे का लालच देकर कागजी काररवाई पूरी करवाने के लिए ब्‍लड बैंक के काउंटर पर भेज रहे हैं।

इस फर्जीवाड़े का खुलासा ब्लड बैंक के काउंटर पर पकड़े गए फर्जी पत्रों से हुआ है। डॉ कुशवाहा के अनुसार ब्लड बैंक में चल रही इस दलाली को लेकर प्रो तूलिका चंद्रा ने अवगत कराया कि प्रयागराज के रहने वाले दिलीप कुमार यादव ने विभागाध्यक्ष को सूचित किया कि‍ उसको ट्रॉमा सेंटर के गेट पर दलाल ने रोककर पैसे के बदले ब्लड दिलवाने का आश्वासन दिया और फर्जी हस्ताक्षर करके ब्लड दिलवाने की कोशिश की है, यह फर्जी पत्र ब्लड बैंक के काउंटर पर पकड़ में आया इसके बाद मरीज के तीमारदार ने इसकी लिखित शिकायत विभाग में की।

इसी प्रकार तीन दिन पहले भी 31 दिसंबर को सीतापुर के रहने वाले राजकुमार कनौजिया को भी दलालों द्वारा उसे पैसों का लालच देकर फर्जी रक्त आपूर्ति पत्र भरवा कर ब्लड बैंक में भेजा गया था इसे जब विभाग में पकड़ा गया तो उसने पूरी घटना बतायी, उसके पास से फर्जी रक्त आपूर्ति पत्र व प्रार्थना पत्र भी मिले, उसने विभागाध्यक्ष से क्षमा याचना करते हुए जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

जानकारी में आया है कि इस प्रकार के अनेक फर्जी हस्ताक्षर वाले पत्र रोजाना ब्लड बैंक में आ रहे हैं इसके बदले में तीमारदारों से पैसे लिए जा रहे हैं। पता चला है कि पत्र के साथ जो फर्जी प्रार्थना पत्र संलग्न है वह विभाग द्वारा निर्धारित प्रार्थना पत्र के प्रारूप की नकल करने की कोशिश की गई है। एक और खुलासा करते हुए बताया गया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने अपने लिखित पत्र में बताया है कि बहुत सारे दलाल इस कार्य में लिप्त हैं, उस व्यक्ति ने दलालों के मुखिया व अन्‍य दलालों के नाम, मोबाइल नंबर उनके कार्य का विवरण भी दिया है। फिलहाल घटना को लेकर प्रॉक्टर ने एफ आई आर दर्ज करवा दी है। अब देखना है पुलिस के हाथ इन दलालों की गर्दन तक कब तक पहुंच पाते हैं।