Tuesday , September 28 2021

अधिक बच्चे पैदा करना मतलब गॉल ब्लैडर में स्टोन को दावत

प्रो विनोद जैन

लखनऊ। ज्यादा बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं में पित्त की थैली की पथरी होने की सम्भावना ज्यादा रहती है, यहीं नहीं जो महिलाएं सप्ताह में 40 घंटे से ज्यादा टेलीविजन देखती हैं उन्हें भी गॉल ब्लैडर में स्टोन की प्रॉब्लम होने की संभावना ज्यादा होती है।
यह महत्वपूर्ण जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जन प्रो विनोद जैन ने दी। सेहत टाइम्स से एक मुलाकात में डॉ जैन ने बताया कि दरअसल अधिक बार गर्भ धारण करने और संतान जनने से गर्भ के समय महिलाओं में प्रोजेस्ट्रॉन नामक हॉरमोन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हॉरमोन गॉल ब्लैडर की संकुचनशीलता को कम करता है, कम संकुचनशील गॉल ब्लैडर में पित्त अधिक देर तक रुकता है एवं अधिक गाढ़ा हो जाता है, इस कारण ही इनमें गॉल ब्लैडर पथरी की संभावना अधिक होती है। शिशु के जन्म के पश्चात फिर से गर्भ के पूर्व की अवस्था आ जाती है अर्थात गॉल ब्लैडर की संकुचनशीलता सामान्य हो जाती है। अत: जो महिलाएं कई बार गर्भवती होती हैं उनमें गॉल ब्लैडर की संकुचनशीलता बार-बार कम होती है, इस कारण उनमें पथरी बनने की संभावना अधिक होती है।

हफ्ते में 40 घंटे से ज्यादा टीवी देखना भी है पथरी का कारण

डॉ जैन ने बताया कि इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति विशेषकर महिलाएं ज्यादा चलती-फिरती नहीं हैं तथा हर समय बैठी या लेटी रहती हैं, उनमें भी पथरी बनने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जो महिलाएं प्रति सप्ताह लगभग 40 घंटे से ज्यादा समय टीवी देखने में लगाती हैं उनमें गॉल ब्लैडर की पथरी ज्यादा बनती है तथा उनमें इसके लक्षण भी पाये जाते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि गॉल ब्लैडर में पथरी बनने के मुख्यत: दो कारण होते हैं पहला पित्त में कोलेस्ट्रॉल का अधिक होना और दूसरा गॉल ब्लैडर में संकुचन की कमी होना। भोजन लेने पर गॉल ब्लैडर संकुचित होकर पित्त को आंतों में पहुंचाता है जो भोजन के पाचन में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि गॉल ब्लैडर का संकुचन भोजन करने के बाद ही होता है। अगर हम भोजन लम्बे समय तक नहीं लेते हैं तो पित्त की थैली का संकुचन भी लम्बे समय तक नहीं होगा। ऐसी अवस्था में पित्त अधिक समय तक गॉल ब्लैडर मेें इकट्ठा रहेगा, ऐसी स्थिति में कोलेस्ट्रॉल या पथरी बनाने वाले अन्य तत्व गॉल ब्लैडर में कण के रूप में जमा हो जाते हैं और आगे जाकर पथरी का रूप ले लेते हैं।
डॉ जैन ने बताया कि उत्तर भारत में प्राय: हम लोग चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करते हैं जिसके कारण कोलेस्ट्रॉल की ज्यादा मात्रा शरीर में पहुंच जाती है और यह पथरी बना देती है। उन्होंने बताया कि व्रत की अवस्था में जब तक व्यक्ति भोजन ग्रहण नहीं करता, गॉल ब्लैडर में संकुचन नहीं होता जिसकी वजह से भी पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।

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