-राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

सेहत टाइम्स
लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से 1 जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत का आदेश तत्काल जारी करने का अनुरोध किया है।
महासचिव अरुण शुक्ला द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार 9 मई को मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल पोर्टल पर पत्र प्रेषित करते हुए जेएन तिवारी ने प्रदेश के 12 लाख राज्य कर्मचारियों, स्वायत्तशासी निकायों के कर्मचारियों एवं राज्य निधि से वेतन प्राप्त कर रहे कर्मचारियों तथा 16 लाख पेंशनर्स के लिए 1 जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत का आदेश तत्काल जारी करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां सबसे पहले महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत का आदेश जारी किया जाता है। केंद्र सरकार ने अपने 50 लाख कर्मचारियों एवं 68 लाख पेंशन भोगियों के लिए 1 जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी के आदेश जारी कर दिए हैं। केंद्रीय कर्मचारियों को अब महंगाई भत्ता 58% के स्थान पर 60% मिलेगा। प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को भी इसी तर्ज पर दो प्रतिशत महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत में बढ़ोतरी के लिए पत्र भेजा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रदेश के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते एवं पेंशनर्स को महंगाई राहत का भुगतान अप्रैल माह के वेतन के साथ किए जाने का अनुरोध किया है। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी, महासचिव अरुणा शुक्ला, कार्यवाहक अध्यक्ष निरंजन कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नारायण दुबे सहित संयुक्त परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कराए जाने का अनुरोध भी किया है।
महासचिव ने कहा कि 2001 के बाद संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों के विनियमितीकरण की कोई नियमावली जारी नहीं हुई है। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए निगम का गठन हो जाने से आउट सोर्स कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, संविदा कर्मचारियों से भी बेहतर हो गई है। संविदा कर्मचारियों को नियमित किए जाने के लिए संयुक्त परिषद लगातार मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कर रही है।
उन्होंने 2027 में प्रदेश के विधानसभा चुनाव की अधिसूचना से पूर्व विनियमितिकरण की कार्यवाही किए जाने का अनुरोध करते हुए आशा व्यक्त की है कि मुख्यमंत्री संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की नियमावली शीघ्र जारी कराकर 15-20 वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के अंधकारमय होते हुए भविष्य को संरक्षित करने पर विचार जरूर करेंगे।

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