Sunday , April 26 2026

केजीएमयू की प्रतिष्ठा गिराने के जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की मांग की एनएमओ ने

-मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में हिंदू महिला डॉक्टर्स/छात्राओं को फंसाने, ब्लैकमेल करने एवं धर्मांतरण का प्रयास करने के मामलों का दिया गया है हवाला

सेहत टाइम्स

लखनऊ। नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन अवध प्रांत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की संस्थागत गरिमा, सुरक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा की प्रतिष्ठा की रक्षा करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दोषी लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि इस प्रतिष्ठित एवं ऐतिहासिक संस्थान में विगत कुछ समय से घटित घटनाओं ने इसकी गरिमा को गंभीर क्षति पहुँचाई है। इन घटनाओं से छात्र-छात्राओं, विशेषकर हिंदू महिला चिकित्सकों की सुरक्षा, संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं प्रशासनिक विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

एनएमओ लखनऊ महानगर के संयोजक डॉ शिवम कृष्णन त्रिपाठी द्वारा 25.04.2026 को मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्र में मुख्य चिंताजनक तथ्यों को रखते हुए कहा गया है कि संस्थान परिसर में कई गंभीर मामले सामने आए हैं, जिनमें हिंदू महिला डॉक्टर्स/छात्राओं को फंसाने, ब्लैकमेल करने एवं धर्मांतरण का प्रयास शामिल है। उदाहरणस्वरूप, डॉ. रमीजुद्दीन नायक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से तो कार्यवाही हुई, लेकिन संस्थान का प्रारंभिक रवैया पीड़िता के प्रति संवेदनहीन रहा और आरोपी तत्वों को बचाने के प्रयास हुए। STF को मामला सौंपा गया है, जिससे गहरा नेटवर्क उजागर हो रहा है।

पत्र में दूसरा तथ्य कुलपति कार्यालय में ओएसडी OSD की फर्जी नियुक्ति का रखते हुए कहा गया है कि कुलपति के OSD की नियुक्ति नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन द्वारा फर्जी बताई गई, जिसकी पुष्टि STF जांच से हुई, ऐसा विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है। इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग एवं प्रशासनिक अनियमितता का संकेत मिलता है।

पत्र में लिखे तीसरे तथ्य में अवैध मजारों का मुद्दा बताते हुए कहा गया है कि प्रशासन द्वारा बार-बार नोटिस जारी करना कुलपति की छवि को प्रो-हिंदुत्व छवि बनाने का प्रयास दिखता है, लेकिन उन मज़ारों पर अभी तक कोई भी कार्यवाई नहीं होती। संस्थान में जब भी कोई अप्रिय घटना घटती है, तब मीडिया का ध्यान भटकने के लिए मज़ारों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया जाता है, लेकिन मज़ार के अवैध कब्जे जस के तस बने हुए हैं।

पत्र में चौथे तथ्य में हाल ही पकड़े गये फर्जी डॉक्टर के मामले का जिक्र करते हुए कहा गया है कि हाल ही में हस्साम अहमद नामक व्यक्ति को फर्जी डॉक्टर के रूप में पकड़ा गया, जो लंबे समय से परिसर में सक्रिय था, हिंदू महिला चिकित्सकों के संपर्क में था और कथित रूप से कन्वर्शन रैकेट से जुड़ा था। इससे कैंपस सुरक्षा की गंभीर खामी उजागर हुई है। इस मामले में भी संस्थान ने किसी को जिम्मेदार तो नहीं बताया, बल्कि इस मामले में श्रेय लेने की कोशिश की।

पत्र में कहा गया है कि नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन, विश्व हिन्दू परिषद्, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्, अधिवक्ता परिषद जैसे संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन सक्रिय नहीं हुआ है, जबकि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई मुख्यतः राज्य सरकार के हस्तक्षेप से ही हुई। पत्र में कहा गया है कि इन घटनाओं से केजीएमयू की शैक्षणिक, नैतिक एवं प्रशासनिक प्रतिष्ठा क्षतिग्रस्त हो रही है। चिकित्सा शिक्षा के मंदिर में ऐसी घटनाएँ पूरे प्रदेश की मेडिकल व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं।

पत्र में इन मामलों की स्वतंत्र, उच्च स्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराकर कराई जाए और जिहादी नेटवर्क को संरक्षण देने, फर्जी नियुक्तियों एवं सुरक्षा में लापरवाही में संलिप्त पाए जाने वाले दोषी अधिकारी/कर्मचारी पर कठोर कार्रवाई की मांग की गयी है। साथ ही यह भी मांग की है कि कैंपस सुरक्षा को मजबूत करने के लिए CCTV, एंट्री सिस्टम, महिला सुरक्षा प्रोटोकॉल आदि लागू किये जायें। इसके अतिरिक्त अवैध निर्माणों (मजारों सहित) को पूरी तरह हटाया जाए और दोहरा व्यवहार समाप्त हो। संस्थान में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं योग्यता-आधारित प्रशासन सुनिश्चित किया जाए।