-नववर्ष चेतना समिति के नवसंवत्सर कार्यक्रम को अभूतपूर्व बना गये बाबा सत्यनारायण
धर्मेन्द्र सक्सेना-सेहत टाइम्स
लखनऊ। हिन्दू नववर्ष, ब्रह्माजी द्वारा की गयी सृष्टि सृजन का दिवस, सूर्य, चंद्रमा सहित अन्य सभी ग्रहों की स्थितियों की सटीक जानकारी देने वाले विक्रम संवत को मनाने की चेतना जन-जन में जगाने के कार्य में बीते 17 वर्षों से अनवरत रूप से लगी नववर्ष चेतना समिति का नवसंवतसर 2083 का वार्षिकोत्सव यादगार बन गया। अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख 19 एवं 20 मार्च को आयोजित दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का समापन चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया को अत्यन्त धूमधाम और उल्लास-उत्साह के साथ कुछ इस प्रकार से सम्पन्न हुआ जिसने इसे अभूतपूर्व बना दिया। इसे अभूतपूर्व बनाने का बड़ा श्रेय करोड़ों दिलों पर राज करने वाले मां भारती के सपूत बाबा सत्यनारायण मौर्य को जाता है।
भगवान राम के अनुज लक्ष्मण की नगरी लखनऊ में बरसे मेघा के बाद सुरसुराहट पैदा करने वाले मौसम के बीच कल-कल बहती मां गोमती के तट पर स्थित श्री खाटू श्याम मन्दिर के प्रांगण में खुले आसमान के नीचे बहुआयामी व्यक्तित्व वाले बाबा सत्यनारायण ने अपनी विभिन्न प्रकार की कलाओं के बहुरंगी पुष्प बिखेरे जो लखनऊवासियों के दिलों में वर्षों तक गुलदस्ता बन कर महकते रहेंगे।
एमएलसी अंगद सिंह थे मुख्य अतिथि
समारोह के मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य अंगद सिंह, कार्यक्रम के अध्यक्ष चेयरमैन व्यापार मंडल लखनऊ एवं संरक्षक नववर्ष चेतना समिति राजेन्द्र अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्रा एवं संस्कार भारती अवध प्रांत की कार्यकारिणी सदस्य शिवा सिंह का स्वागत नववर्ष चेतना समिति की मुख्य संरक्षिका रेखा त्रिपाठी, अध्यक्ष डॉ गिरीश गुप्ता, सचिव डॉ सुनील अग्रवाल द्वारा किये जाने के बाद बड़े आकार की डिजिटल स्क्रीन लगा हुआ (T) आकृति में बना विशेष मंच बाबा सत्यनारायण की टीम के हवाले कर दिया गया। फिर शुरू हुआ हाई वोल्टेज लाइट और संगीत के बीच भजनों, देशभक्ति के गीतों का सिलसिला।
टीम के सदस्यों ने सुंदर-सुंदर भजन और देशप्रेम से भरे गीतों से बाबा के कार्यक्रम की प्रस्तावना तैयार की, इसके कुछ समय बाद खाटू श्याम प्रांगण में पुष्प पंखुड़ियों की बरसात से हुए स्वागत के बाद कुर्ता-पाजामा पहने, साधारण से दिखने वाले लम्बी सफेद दाढ़ी के स्वामी बाबा सत्यनारायण मौर्य का मंच पर आगमन हुआ।
देखते ही देखते कैनवास पर उकेर दिया विवेकानंद का चित्र
इसके बाद बाबा ने एक बार जो मंच सम्भाला तो लगभग तीन-साढे़ तीन घंटे बाद कार्यक्रम के समापन पर ही छोड़ा। सबसे पहले मंच पर पहुंचते ही बाबा ने वंदे मातरम पर आधारित सुंदर सी पंक्तियों वाला गीत गाते-गाते कैनवास पर स्वामी विवेकानंद का चित्र तैयार कर दिया। इसके बाद बाबा ने सम्पूर्ण जीवन को जीने के तरीके, आहार-विहार, बच्चों की परवरिश, परिवार के प्रति कर्तव्य, समाज के प्रति कर्तव्य, देश के प्रति कर्तव्य, भगवत चिंतन, योग का महत्व, चैत्र प्रतिपदा से राम नवमी तक नीम की ताजी पत्तियों जैसी प्राकृतिक चीजों और संगीत में छिपे स्वास्थ्य के खजाने का महत्व, पूर्णतः वैज्ञानिक आधार वाली भारतीय संस्कृति जैसे विषयों पर भजनों-देशभक्ति के गीतों, फिल्मी गानों, कविताओं, हास्य, व्यंग्य आदि के माध्यम से श्रोताओं को कुछ ऐसे ढंग से सुनाये कि लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
पुरुष के माथे पर तिलक और सुहागिनों की मांग में सिंदूर क्यों
उन्होंने बताया कि दोनों आंखों के बीच में माथे पर बिंदी तिलक लगाने का सम्बन्ध पिट्यूटरी ग्लैंड से है, अगर इसमें गड़बड़ी हुई तो स्वास्थ्य बिगड़ जाता है, इस स्थान की रक्षा के लिए हम चंदन का तिलक लगाते हैं, भस्म का तिलक लगाते हैं, हल्दी का तिलक लगाते हैं लेकिन आजकल हमलोग नकली तिलक लगाये बैठे हैं। महिलाओं के शृंगार पर हास्य पुट के साथ बात शुरू करते हुए उन्होंने गंभीर विषय मांग भरने का वैज्ञानिक महत्व भी बताया। उन्होंने बताया कि सिर जो अंदर से अखरोट की तरह होता है, दोनों हिस्सों के बीच की जगह स्त्रियों की बहुत कोमल होती है जहां मांग भरी जाती है, इस स्थान का सम्बन्ध प्रजनन क्षमता संबंधी स्वास्थ्य से है, जब प्रजनन के समय महिलाओं के हार्मोन्स डिस्बैलेंस होते हैं तो यहां लगा असली सिंदूर (बिना केमिकल वाला) फायदा करता है। चूंकि कुंआरी बेटियां व विधवा स्त्रियों का सम्बन्ध प्रजनन से नहीं होता है इसलिए वे मांग नहीं भरती हैं, सिर्फ सुहागिनें ही मांग भरती हैं।
उच्चारण सही रखता है शंख
उन्होंने कहा कि यदि आप रोज शंख बजायें तो आपको कभी उच्चारण की समस्या नहीं होगी, कोई गर्भवती महिला रोज शंख में पानी भरे और पीये तो उसके बच्चे को कभी हकलाहट नहीं होगी। उन्होंने कहा कि माता-पिता फिल्म देखने जायेंगे तो बच्चों को जरूर ले जायेंगे लेकिन जिन कार्यक्रमों से बच्चों में अच्छे संस्कार मिल सकते हैं, उन कार्यक्रमों में नहीं लाते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत से कार्यक्रमों के आमंत्रण पत्र में लिखा रहता है कि बच्चों को साथ न लायें लेकिन मैं तो अपने कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से कहता हूं कि बच्चों को अवश्य लायें।
बचपन छिन सकता है बचपना नहीं
उन्होंने कहा कि बूढ़ा शरीर होता है, लेकिन अपने मन को बूढ़ा न होने दें, बचपन तो छिन सकता है लेकिन बचपना कोई नहीं छीन सकता, यह आपके हाथ में हैं, स्वस्थ जीवन दर्शन को हास्य का पुट देते हुए उन्होंने उपस्थित श्रोताओं से कहा कि मैं चाहता हूं कि आप लोग मेरे साथ गायें, मस्ती करें, जबतक इस कार्यक्रम में रहें, बच्चा बन जायें, उन्होंने कहा कि बच्चा बनने का मतलब होता है कि बच्चा जब चाहता है तब गाता है, रोता है, हंसता है, नाचता है।
कठोर और मारक शब्दों से किया राजनेताओं पर प्रहार
अपने ओजस्वी वक्तव्यों में उन्होंने राजनीति, आतंकवाद, सम्प्रदायवाद, तुष्टीकरण आदि से जुड़े विषयों पर आजादी के पूर्व के वर्षों से लेकर मौजूदा समय तक के अनेक नामीगिरामी राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुए जहां तीखे प्रहार किये, वहीं देश और देशवासियों की भलाई को लेकर राजनेताओं द्वारा किये गये कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की, साथ ही यह भी कहने से नहीं चूके कि ये विचार मैं एक देशभक्त होने की हैसियत से कह रहा हूं, मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा हुआ हूं।
सुखी होने नहीं, सुखी दिखने के लिए परेशान हैं लोग
बाबा ने योग करने का आह्वान भी हास्य पुट में करते हुए सामने से और पीठ के पीछे से हाथ जोड़ते हुए दिखाकर कहा कि आप भी ऐसे ही नमस्कार करें, अपनी बात के जवाब में कपाल भाती स्टाइल में जोर से हां करने को कहा। तालियां बजाने को कहा फिर हास्य अंदाज में बोले कि लोग चाहते हैं कि प्राणायाम बाबा रामदेव करें और ठीक हम हो जायें, ऐसा कैसे संभव है, करना आपको ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोग परेशान सुखी होने के लिए नहीं हैं, सुखी दिखने के लिए परेशान हैं।
राम तेरी गंगा मैली हो गयी, पापियों के पाप धोते-धोते
बाबा ने अनेक छोटे-छोटी बातों को अपनी स्टाइल से लोगों को समझाने के लिए भक्तिमय गीतों, फिल्मी गीतों को स्टेज पर घूम-घूमकर, झूम-झूमकर न सिर्फ खुद गाया बल्कि उपस्थित सभी लोगों को भी साथ में गाने और झूमने पर मजबूर कर दिया। जिन गीतों को उन्होंने गया उनमें राम तेरी गंगा मैली हो गयी पापियों के पाप धोते-धोते… जय हनुमान ज्ञान गुण सागर… तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो… धूप में निकला न करो रूप की रानी…, हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं… अपने आगे न पीछे, न कोई ऊपर नीचे रोने वाला… अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं… सुन री सखी मोहे सजना बुलाये मोहे जाना है पी की नगरिया… मेरा दिल न चाहे तुमसे विदा लूं जाने वाले… ओ दुनिया के रखवाले, ओ दुनिया के मालिक राम तेरी मरजी के हम हैं गुलाम… सोलह बरस की बाली उमर को सलाम… इक दुखियारी कहे बात ये रोते-रोते, राम तेरी गंगा मैली हो गयी पापियों के पाप धोते-धोते…चलो सजना जहां तक घटा चले, जादूगर सइयां छोड़ो मोरी बहियां… श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम…मेघा रे मेघा रे मत परदेस जा रे… ओम जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे… दूर कोई गाये, धुन ये सुनाये…जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना… चंदन सा बदन चंचल चितवन…लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो न हो…चल उड़ जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ बेगाना… उसको नहीं देखा हमने कभी, फिर उसकी जरूरत क्या होगी…जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा जैसे गीत शामिल थे।
श्री खाटू श्याम परिवार के सहयोग से आयोजित दूसरे दिन के कार्यक्रम के संयोजक श्री श्याम परिवार के सचिव रूपेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष नववर्ष चेतना समिति राधेश्याम सचदेवा, समिति के कार्यालय प्रभारी अरुण कुमार मिश्रा तथा समिति के सम्पर्क प्रमुख शेष नाथ सिंह थे। डॉ गिरीश ने कार्यक्रम के अंत में बाबा सत्यनारायण मौर्य सहित उनकी टीम के सभी सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए उनका सम्मान किया। डॉ गिरीश गुप्ता ने कहा कि मैं अपनी समिति तथा पूरे लखनऊवासियों की ओर से बाबा जी का आभार प्रकट करता हूं, उन्हें धन्यवाद देता हूं, और उनसे कहना चाहता हूं कि बाबाजी आप लखनऊवासियों के दिल में उतर गये।
उन्होंने लखनऊ व्यापार मंडल के विनोद अग्रवाल को भी अंगवस्त्र से सम्मानित किया। डॉ गिरीश ने उपाध्यक्ष सुधीर एस हलवासिया, उपाध्यक्ष डॉ रंजना द्विवेदी, उपाध्यक्ष राधेश्याम सचदेवा, उपाध्यक्ष पुनीता अवस्थी, सचिव डॉ सुनील अग्रवाल, संगठन सचिव भुवनेश्वरजी, आईटी सेल इंचार्ज एसके त्रिपाठी, डॉ हरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, कमलेन्द्र मोहन, अरुण मिश्रा, प्रियंका चौहान सहित समिति के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों के साथ ही कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति धन्यवाद प्रकट किया। समिति के मंत्री डॉ सुनील अग्रवाल और कार्यालय प्रभारी अरुण कुमार मिश्र ने एक बड़ी सी माला पहनाकर बाबा का अभिनंदन किया।

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