-केजीएमयू में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य सलाहकार देविका देवेंद्र एस. मंगलमुखी ने की अपील

सेहत टाइम्स
लखनऊ। ट्रांसजेंडर पुरुष-स्त्री को सामाजिक कलंक न समझें बल्कि उन्हें ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत उन्हें प्रदत्त अधिकारों का सम्मान करते हुए उन्हें भी सम्मान से जीने का हक दिये जाने की आवश्यकता है, ट्रांसजेंडर को चिकित्सकों के विशेष सहयोग की आवश्यकता रहती है क्योंकि ट्रांसजेंडर की परिवर्तित शारीरिक बनावट के लिए प्लास्टिक सर्जन, जेंडर के अनुकूल हार्मोन्स के लिए एंडोक्राइन से जुडे विशेषज्ञ, और समाज में खुद को स्थापित करने के लिए भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने में मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के लिए मनोचिकित्सक के विशेष सहयोग की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त संक्रामक रोगों से बचाव में फिजीशियन और काउंसलर की भूमिका भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

कुछ इस तरह के संवेदना से भरे विचार मंगलवार 17 मार्च को यहां किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में आयोजित संवेदीकरण और ओरिएंटेशन सत्र में उत्तर प्रदेश ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य सलाहकार देविका देवेंद्र एस. मंगलमुखी ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक संवेदनशील, सम्मानजनक और सुलभ स्वास्थ्य सेवा वातावरण निर्मित करने के महत्व पर जोर दिया। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मंगलमुखी ने सामाजिक कलंक को कम करने और न्यायसंगत सेवा वितरण सुनिश्चित करने में स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज में उपहास का पात्र बनने से रोकने के लिए ट्रांसजेंडर पुरुष व स्त्री को समाज में सम्मानित दर्जा दिये जाने की आवश्यकता है, लोगों को चाहिये कि उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह ट्रीट किया जाये न कि हिजड़ा, किन्नर कहते हुए उनका मजाक उड़ाया जाये।
केजीएमयू में ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’ और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को मजबूत करने पर एक संवेदीकरण और ओरिएंटेशन सत्र का सफलतापूर्वक संयुक्त आयोजन KGMU B.E.S.T और KGMU की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (Internal Quality Assurance Cell) द्वारा किया गया था। यह आयोजन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (National Institute of Social Defence) के सहयोग से संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के 100 से अधिक संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अंजू अग्रवाल और डॉ. रिदम द्वारा किया गया। केजीएमयू की ओर से कहा गया है कि केजीएमयू यह ओरिएंटेशन सत्र स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को संवेदनशील बनाने और उत्तर प्रदेश में ट्रांसजेंडर समुदाय की बेहतर सेवा करने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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