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सांस रोग से पीड़ित महिलाओं के साथ न हो किसी प्रकार का भेदभाव : डॉ. सूर्य कान्त

-पुरुष और महिलाएं बनें एक-दूसरे की शक्ति के पूरक : डॉ ज्योति बाजपेई

-केजीएमयू में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर महिलाओं को समर्पित कार्यक्रम आयोजित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर महिलाओं के स्वास्थ्य, सशक्तिकरण और टीबी एवं अन्य सांस सम्बन्धी रोग पर सार्थक चर्चा के साथ उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्य कान्त के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने महिलाओं में बढ़ते सांस संबंधी खतरों पर प्रकाश डाला, जिनमें बढ़ते हुए सीओपीडी (COPD), पैसिव स्मोकिंग का प्रभाव, इनडोर वायु प्रदूषण, तथा फेफड़ों के कैंसर और क्षय रोग (टीबी) के मामले शामिल हैं। उन्होंने महिलाओं के सांस सम्बन्धी स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जागरूकता, रोकथाम और समय पर निदान के महत्व पर जोर दिया।

प्रो. सूर्य कान्त ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अवसर समाज और स्वास्थ्य सेवाओं में महिलाओं के अमूल्य योगदान को सम्मानित करने के साथ-साथ समानता और पारस्परिक सम्मान को मजबूत करने का है। उन्होंने विशेष रूप से अपील की कि टीबी और अन्य सांस रोगों से पीड़ित महिलाओं और लड़कियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

कार्यक्रम का संयोजन रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. ज्योति बाजपेयी द्वारा किया गया। डॉ. बाजपेयी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि एक प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पुरुष और महिलाएँ दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और उन्हें एक-दूसरे की शक्तियों का पूरक बनकर सामंजस्य के साथ कार्य करना चाहिए, जिससे एक संतुलित और स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।

इस कार्यक्रम में विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों तथा अन्य कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई प्रतिभागियों ने महिलाओं के सशक्तिकरण, पेशेवर चुनौतियों तथा महिलाओं में बेहतर श्वसन स्वास्थ्य बनाए रखने के महत्व पर अपने अनुभव और विचार साझा किए।

कार्यक्रम का समापन महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पारस्परिक सम्मान को प्रोत्साहित करने तथा समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास करने के सामूहिक संदेश के साथ हुआ।