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झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी की वजह हो सकती है खून में आयरन की कमी

-रक्त और उसके अवयव भाग 2

-सामान्य व्यक्ति और मेडिकल स्टूडेंट, दोनों को उपयोगी जानकारियां  एक प्लेटफॉर्म पर

-आयरन की कमी को पूरा करने का उपाय बता रहे हैं वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट प्रो ए.के.त्रिपाठी

सेहत टाइम्स

केजीएमयू, आरएमएलआई और एसजीपीजीआई में महत्वपूर्ण पदों पर रहे राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट प्रो ए.के.त्रिपाठी द्वारा आम व्यक्ति को स्वस्थ रहने के गुण बताने तथा मेडिकल स्टूडेंट्स को रुचिकर तरीके से जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से ‘सेहत टाइम्स’ में शुरू की गयी शृंखला में ‘रक्त और उसके अवयव’-भाग 2 प्रस्तुत है। भाग 1 में ‘हृदय और गुर्दा रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है एनीमिया’ शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की जा चुकी है जिसे आप इस लिंक https://sehattimes.com/anemiia-can-be-dangerous-for-heart-and-kidney-patients/57456पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

प्रो ए.के.त्रिपाठी

दूसरे भाग में एनिमिया होने के एक बड़े कारण आयरन की कमी के बारे में अत्यन्त महत्वपूर्ण जानकारियां डॉ त्रिपाठी ने दीं। डॉ त्रिपाठी ने बताया कि लगातार कमजोरी रहने, कोई काम करने की इच्छा न होना, झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी रहना जैसे लक्षण रक्त में लौह तत्व की कमी से भी हो सकते हैं। यहां तक कि हिमोग्लोबिन की मात्रा कम रहने पर मरीज चक्कर खाकर गिर भी जाता है। उन्होंने एक महिला मरीज का किस्सा बताते हुए जानकारी दी कि तीन साल में दो बच्चों का जन्म होने के बाद महिला लगातार कमजोर होती जा रही थी, झुंझलाहट, गुस्सा, बेचैनी जैसे लक्षणों के साथ डॉक्टर को दिखाया गया। जांच की रिपोर्ट में पता चला कि उसको एनीमिया है। उसका हिमोग्लोबिन मात्र 4 ग्राम प्रतिशत ही रह गया था। ज्ञात हो एक स्वस्थ पुरुष में हिमोग्लोबिन की मात्रा 13-16 ग्राम प्रतिशत के बीच और स्त्रियों में 12-14 ग्राम प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि हिमोग्लोबिन की वजह से ही खून का रंग लाल होता है। हिमोग्लोबिन की एक अद्भुत क्षमता होती है जिससे वह फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त संचार के द्वारा शरीर के कोने-कोने तक उस ऑक्सीजन को पहुंचाता है। ऑक्सीजन के सहारे ही भोज्य पदार्थों द्वारा ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे शरीर में जीवन के आवश्यक कार्य सुचारू रूप से सम्पन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि महिला को खून चढ़ाया गया तथा दवाइयां दी गयीं। वह धीरे-धीरे ठीक होने लगी और एक सप्ताह में काफी ठीक महसूस करने लगी।

महिला को हुए इतने सीवियर एनिमिया की वजह के बारे में डॉ त्रिपाठी ने बताया कि शरीर में हिमोग्लोबिन की सही मात्रा बनाये रखने के लिए भोजन में विशेष तत्वों प्रोटीन, आयरन, विटामिन का आवश्यक मात्रा में होना ज़रूरी है। इस महिला में आयरन (लौह तत्व) की काफी कमी हो गयी थी। गर्भावस्था, मासिक धर्म एवं प्रसव के दौरान रक्तस्राव के कारण स्त्रियों में पुरुषों की अपेक्षा भोजन में आयरन की अधिक आवश्यकता होती है। आयरन की कमी को रोकने के लिए प्रायः गोलियां भी लेनी पड़ जाती हैं।

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि बहुत से मरीज कहते हैं कि मैं खाना भरपेट खाता हूं फिर भी पता नहीं क्यों कमजोरी बनी रहती है। डॉ त्रिपाठी ने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए भर पेट भोजन ही नहीं बल्कि संतुलित भोजन आवश्यक है, यानी ऐसा भोजन जिसमें विटामिन बी. जैसे- फोलिक एसिड, साइनो कोबालामीन (बी-12), पाइरीडाक्सिन (बी-6) के साथ ही प्रोटीन, आयरन समुचित मात्रा में उपलब्ध हों। प्रोटीन की कमी दूध, दही, पनीर, दालें, मांस, सोयाबीन से पूरी होती है जबकि आयरन की कमी हरी साग सब्जियां, फल जैसे अमरूद, सेब, अनार, अंगूर, खजूर, गुड़, अंकुरित अनाज, दालें, मांस, मछली आदि से पूरी होती है।

आयरनयुक्त भोज्य पदार्थ (मिली ग्राम प्रति 100 ग्राम)

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि आयरन, हिमोग्लोबिन के अलावा कई प्रकार के एनज़ाइम्स के लिये भी आवश्यक होता है। शरीर में आयरन की सम्पूर्ण मात्रा का दो तिहाई हिस्सा हिमोग्लोबिन में, जबकि एक तिहाई हिस्सा मांस पेशियों में उपस्थित मायोग्लोबिन में तथा कुछ हिस्सा विभिन्न एनज़ाइम्स में होता है। भोज्य पदार्थों में आयरन के मुख्यतः दो प्रकार के स्रोत हैं। एक “हीम” आयरन दूसरा “नॉन-हीम” आयरन। हीम आयरन उन भोज्य पदार्थों में मिलता है जिनमें रक्त या मायोग्लोबिन रहता है जैसे- मांस, मछली जबकि नॉन-हीम आयरन शाकाहारी भोज्य पदार्थों जैसे दाल, हरी साग सब्जियों, फल (अमरूद, सेब, अनार) गुड़ और खजूर में।

पाठक भी पूछ सकते हैं अपने प्रश्न

प्रत्येक एपीसोड के विषय में कोई भी व्यक्ति अथवा मेडिकल स्टूडेंट का कोई प्रश्न होगा तो प्रो एके त्रिपाठी के हवाले से उस प्रश्न का उत्तर दिया जायेगा। (आपकी स्क्रीन पर दिये व्हाट्सऐप बटन पर क्लिक कर अपना प्रश्न भेज सकते हैं)

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि हीम आयरन सुपाच्य होने की वजह से नॉन-हीम आयरन से ज्यादा लाभकारी होता है। जितना आयरन हम लेते हैं उसका लगभग दस प्रतिशत ही पाचन द्वारा शरीर में प्राप्त होता है। कितना आयरन शरीर में प्राप्य होना है, इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर में पहले से उपस्थित संचित आयरन कितना है। यदि शरीर में आयरन प्रचुर मात्रा में पहले से है तो भोज्य पदार्थों में उपस्थित आयरन कम मात्रा में शोषित होती है। इसके विपरीत, यदि शरीर में आयरन की कमी होती है तो यह भोज्य पदार्थों से अधिक मात्रा में ग्रहण कर लिया जाता है। हीम आयरन प्रायः 15 से 35 प्रतिशत तथा नॉन-हीम आयरन 2 से 20 प्रतिशत शोषित होता है। ऐसा इसलिये होता है कि हीम आयरन का पाचन भोजन में उपस्थित अन्य तत्वों से प्रायः प्रभावित नहीं होता है। अनाज और दालों विशेषकर सोयाबीन में आयरन अच्छी मात्रा में होता है लेकिन उनमें विद्यमान कुछ प्रोटीन इनका पाचन ठीक से नहीं होने देते।

उन्होंने बताया कि भोजन या दवा द्वारा ज़रूरत से अधिक आयरन लेने पर अतिरिक्त आयरन मल द्वारा निष्कासित हो जाता है। शरीर में आयरन का पाचन कितना हो और कितना आयरन हिमोग्लोबिन बनाने में प्रयुक्त हो, इसका नियंत्रण मुख्यतः लीवर (यकृत) द्वारा स्रावित हारमोन हैप्सीडिन (Hepcidin) द्वारा होता है।

किसी भी मरीज में आयरन की कमी की वजह से एनीमिया होने के जो संभावित कारण हो सकते हैं, उनमें 1. भोज्य पदार्थों में आयरन की कमी होना, 2. भोज्य पदार्थ आयरन युक्त हों परन्तु उनका आंतों द्वारा समुचित पाचन न हो पाना तथा 3. भोज्य पदार्थ आयरन युक्त हैं व पाचन भी समुचित है, परन्तु शरीर से आयरन अधिक मात्रा में बाहर निकल रहा हो। उदाहरण के तौर पर पेट में अल्सर होने पर या बवासीर की वजह से शरीर से रक्त का ह्रास होता है। इसके माध्यम से आयरन भी शरीर से बाहर निकल जाता है। गांव, कस्बे या शहरों में भी प्रदूषित जल या प्रदूषित भोजन के सेवन से आंतों में कृमि (पैरासाइट्स) पैदा हो जाते हैं जो लगातार खून चूसते रहते हैं, जिससे आयरन की कमी वाली एनीमिया हो सकती है।

चीनी व गुड़ दोनों बनते हैं गन्ना से, लेकिन चीनी में कम और गुड़ में ज्यादा आयरन क्यों ?

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि गुड़ में प्रचुर मात्रा में मिनरल्स (तत्व) और विटामिन्स मौजूद होते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि गुड़ में चीनी की अपेक्षा आयरन काफी अधिक होता है। 100 ग्राम गुड़ में लगभग 10 मिग्रा० तक आयरन होता है। इसकी तुलना में खजूर में 2-6 मि०ग्रा- प्रति 100 ग्राम आयरन होता है लेकिन गुड़ साफ-सुथरे ढंग से बनाया हुआ हो, नहीं तो इससे पेट में संक्रमण होने का खतरा रहता है।

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि गुड़ में अधिक आयरन पाया जाता है, क्योेकि गन्ने के रस को लोहे की बड़ी-बडी कडाहियों में धीमी आंच में घंटों उबाला जाता है। पकाते समय रस को चलाया जाता है। इस प्रक्रिया से लोहे के बर्तन की दीवारों से लौह तत्व रस में मिल जाता है, जिससे गुड़ और भी आयरन युक्त हो जाता है। गुड़ के सेवन को बढ़ावा देना चाहिए।