Friday , January 23 2026

वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी शिक्षा के कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये : अमित घोष

-चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप ने केजीएमयू में आयोजित किया कार्यक्रम

-साझा किया गया संदेश- ‘स्वच्छ वायु का अधिकार जनस्वास्थ्य के लिए सबसे सशक्त नुस्खा’

सेहत टाइम्स

लखनऊ। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा है कि वर्तमान परिदृश्य में वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित शिक्षा देना चिकित्सा समुदाय, सरकारी अधिकारियों और मीडिया कर्मियों, सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश के सभी जिलों में इसके लिए जागरूकता कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये।

अमित घोष ने यह बात आज 23 जनवरी को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के सेमिनार हॉल में चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप (Chintan Environmental Research and Action Group) द्वारा स्वच्छ वायु के अधिकार (Right to Clean Air) विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता सत्र में कही। इस सत्र में चिकित्सा समुदाय, सरकारी अधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक मेडिकल एजुकेशन, एरा हॉस्पिटल एवं पल्मोनरी मेडिसिन ने धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला, साथ ही उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न नीतियों और उपायों के माध्यम से महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव लाए जा रहे हैं।

सीओपीडी के अधिकांश मरीज धूम्रपान न करने वाले : प्रो वेद प्रकाश

डॉ. वेद प्रकाश, विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग, ने कहा कि वर्तमान समय में सीओपीडी (COPD) के अधिकांश मरीज गैर-धूम्रपान करने वाले हैं और कई अध्ययनों में इसका सीधा संबंध वायु प्रदूषण एवं खराब वायु गुणवत्ता से पाया गया है।

डॉ. जूही सिसोदिया ने अपने वक्तव्य में वायु प्रदूषण और शिशु मृत्यु दर के बीच के गंभीर संबंध को रेखांकित करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बताया।

डॉ. मोहम्मद अजहर, सहायक प्राध्यापक, एरा यूनानी मेडिकल यूनिवर्सिटी, ने कहा कि जो लोग इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण वहन कर सकते हैं, उन्हें इसका उपयोग करना चाहिए और घर के भीतर चूल्हे या कोयले पर खाना पकाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह इनडोर वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।

इस जागरूकता सत्र में चिकित्सा समुदाय के 65 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं द्वारा एक सशक्त संदेश साझा किया गया कि “स्वच्छ वायु का अधिकार ही जनस्वास्थ्य के लिए सबसे सशक्त प्रिस्क्रिप्शन है।”