-केजीएमयू के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडोंटिक्स विभाग में सतत दंत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन

सेहत टाइम्स
लखनऊ। दांतों में रूट कैनाल हो चुका हो और दोबारा इन्फेक्शन हो जाये तो दांतों के स्ट्रक्चर को बचाते हुए उपचार करने में अल्ट्रासोनिक्स उपकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है, आरसीटी के लिए अल्ट्रासोनिक्स के इस्तेमाल कैसे करें, इसका प्रशिक्षण देने के लिए 31 अक्टूबर को यहां केजीएमयू के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडोंटिक्स विभाग में सतत दंत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीडीई) का आयोजन किया गया।
यह जानकारी डीन फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज और विभागाध्यक्ष कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स, प्रोफेसर एपी टिक्कू ने देते हुए बताया कि “एंडोडोंटिक्स में अल्ट्रासोनिक्स” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति ले.ज. डॉ बिपिन पुरी ने करते हुए विभाग के प्रयासों की सराहना की और व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया ताकि छात्र और आने वाले एंडोडॉन्टिस्ट अपने क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले नवीनतम गैजेट्स और उपकरणों से परिचित हों।


विवेक हेगड़े, वाइस प्रिंसिपल एमए रंगूनवाला डेंटल कॉलेज पुणे के प्रिंसिपल डॉ विवेक हेगड़े इस कार्यक्रम के अतिथि शिक्षक थे। कार्यक्रम का उद्घाटन केजीएमयू के कुलपति डॉ (लेफ्टिनेंट जनरल) बिपिन पुरी, डॉ विनीत शर्मा, प्रो-वाइस चांसलर केजीएमयू और डीन फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज और विभागाध्यक्ष कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स, प्रोफेसर एपी टिक्कू ने किया। इस कार्यशाला में विभिन्न डेंटल कॉलेजों के 75 पंजीकृत प्रतिभागियों ने भाग लिया।
उन्होंने बताया कि एक दिवसीय कार्यशाला में एक संवादात्मक व्याख्यान, एक लाइव प्रदर्शन और रूट कैनाल रीट्रीटमेंट और रूट कैनाल के दौरान सुई टूट कर गिर जाये तो उसे निकालने के लिए अल्ट्रासोनिक्स उपकरण का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाये, इसकी जानकारी दी गयी। डॉ एपी टिक्कू ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य डेंटल ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और अल्ट्रासोनिक ऊर्जा के उपयोग के साथ न्यूनतम इनवेसिव एंडोडोंटिक्स का अभ्यास करने के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर छात्रों, निजी चिकित्सकों और संकाय को प्रशिक्षित करना था। कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो प्रोमिला वर्मा ने कहा कि इस तरह के सतत दंत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम नवीनतम उपचार पद्धतियों के साथ चिकित्सकों को अद्यतन करने के लिए आयोजित किए जाते हैं, और विभाग भविष्य में इस तरह की और कार्यशालाओं का आयोजन करेगा। कार्यशाला के आयोजन में डॉ रिदम, डॉ रमेश भारती, डॉ विजय, डॉ प्रज्ञा पांडे और डॉ निशि भी सक्रिय रूप से शामिल रहे।
