केजीएमयू में बिना चीरफाड़ टांगों की उभरी नसों का इलाज जल्द ही

एंडोवीनस लेजर थैरेपी पर सजीव कार्यशाला आयोजित

लखनऊ। टांगों में उभरी हुई नसों यानी वेरीकोज वेन नामक बीमारी से बिना भर्ती, बिना दर्द हुए निजात पाना शीघ्र ही किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में संभव हो सकेगा। चीरफाड़ के बजाय लेजर तकनीक से उभरी हुई नसों का उपचार करने के लिए मशीन खरीदने की तैयारी चल रही हैं।
आज यहां केजीएमयू के सर्जरी विभाग में प्रथम एंडोवीनस लेजर थैरेपी से वेरीकोज वेन की लाइव सर्जरी की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में फोर्टिस मोहाली की एंडोवैस्कुलर यूनिट के डाइरेक्टर डॉ.रावुल जिन्दल ने इस एडवांस थैरेपी से सर्जरी की। कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ जितेन्द्र कुशवाहा ने बताया कि अगले दो-तीन माह में केजीएमयू में भी इस थैरेपी से वेरीकोज वेन का इलाज सम्भव हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से इलाज करने में किसी प्रकार की चीरफाड़ नहीं करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि इस थैरेपी से इलाज करने में मरीज को भर्ती करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है।
समारोहपूर्वक सम्पन्न लाइव सर्जरी वर्कशॉप में चार सर्जरी की गयीं तथा हर सर्जरी के बाद डिस्कशन रखा गया था। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन कुलपति प्रो.एमएलबी भट्ट, गेस्ट फैकल्टी डॉ रावुल जिन्दल, सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एए सोनकर, प्रो. मधुमति गोयल और वर्कशॉप के आयोजन सचिव प्रो. जितेन्द्र कुशवाहा ने दीप प्रज्ज्वलन करके किया।
वेरीकोज बीमारी के बारे में डॉ कुशवाहा ने बताया कि यदि आपके टांगों की नसें उभरी हुई दिख रही हैं तो इसे नजरंदाज मत करिये यह वेरीकोज वेन नामक बीमारी के प्रारम्भिक लक्षण हो सकते हैं। डॉ कुशवाहा ने बताया कि नीले रंग की दिखने वाली पैरों की इन नसों में चलने पर और खड़े होने पर दर्द होता है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों के पैरों में सूजन भी आ जाती है तथा दर्द भी होता है।  उन्होंने बताया कि लापरवाही करने पर इन नसों में अल्सर वाला घाव हो जाता है, जो भर नहीं पाता है।

विभिन्न कारणों से हो जाती है यह बीमारी

वेरीकोज वेन के कारणों के बारे में उन्होंने बताया कि हृदय के वॉल्व का जीर्ण होना, जो आमतौर पर जन्मजात होता है, गर्भावस्था के चलते, लम्बे समय तक खड़े रहने के कारण, शरीर के बीच के भाग विशेषकर पेट पर दबाव के कारण तथा मोटापा होने से पैरों पर पडऩे वाले भार के कारण यह बीमारी हो सकती है।