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आरओ पानी फायदेमंद नहीं, नुकसानदायक

डॉ महेश नारायण गुप्ता

लखनऊ। क्या आप जानते हैं कि जिस आरओ पानी को हम शरीर के लिए फायदेमंद समझते हैं या यूं कहिये कि फायदेमंद बताया जाता है वह हमारे लिए कितना खतरनाक है ? इसके लगातार सेवन से हार्ट अटैक, कैंसर तथा रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने का खतरा रहता है। यह कहना है वाराणसी के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर व नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ महेश नारायण गुप्ता का। डॉ गुप्ता से इस विषय पर ‘सेहत टाइम्स’ ने बात की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हमारे देश में आरओ जल का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ चला है। महानगर के साथ छोटे शहरों में इसका चलन बहुत जोरों पर है। परन्तु अब यह पानी का व्यवसाय इतना अधिक फ़ैल चुका है कि गांव भी इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। डॉ गुप्ता ने कहा कि कुछ लोग अज्ञानतावश तो कुछ लोग शानो-शौकत के लिए आरओ का जल पीने हेतु घर में मशीन लगवाते हैं, या आरओ का गैलन घर मंगाते हैं।
बीमारी का भय दिखाती हैं कम्पनियां
उन्होंने बताया कि आरओ बेचने वाली कम्पनियां प्रचार के बल पर पढ़े-लिखे लोगों एवं अनपढ़ जनता का ब्रेनवाश करके बीमारी का भय दिखाकर उनको आरओ का पानी पीने को मजबूर करती हैं। यही नहीं इस काम में कम्पनियां डॉक्टरों का भी समर्थन दिखाती हैं। आरओ कंपनियों के एजेंट आपके घर के पानी को जांचकर बताते हैं कि आपका पानी पीने योग्य नहीं है अशुद्ध और जहरीला है। उन्होंने बताया कि जिस पानी को आपके दादा-नाना, पुरखे पीकर स्वस्थ जीवन जिए, जिस पानी को आपके परिवार ने कल तक पिया, वही पानी आज हानिकारक हो गया।
आरओ फि़ल्टर का इतिहास
डॉ गुप्ता ने बताया कि आरओ का अविष्कार सन 1950 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय अमेरिका में हुआ था। इस खोज का उद्देश्य था समुद्री गंदे खारे पानी को साफ कर पीने योग्य बनाना। 1977 में इस आरओ फि़ल्टर का सर्वप्रथम उपयोग अमेरिका के फ्लोरिडा शहर में पानी को साफ कर पीने योग्य बनाने हेतु किया गया था। अमेरिकी नौसेना द्वारा आरओ फि़ल्टर का उपयोग अपने नेवी जवानों को समुद्री पानी को साफ कर पीने का पानी उपलब्ध करने हेतु किया जाता है।

टीडीएस जल की शुद्धता का पैमाना नहीं
डॉ गुप्ता ने कहा कि आरओ कम्पनियां कहती है कि आपके पानी का टीडीएस यानि टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड ज्यादा है। उन्होंने बताया कि जल में घुले कणों खनिज लवण (जैसे सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैगनिशियम मैंगनीज, आयरन, आयोडीन, क्लोराइड, बाईकार्बोनेट), कार्बनिक पदार्थ ,  अकार्बनिक पदार्थ , सूक्ष्म जीव(माइक्रोऑरगेनिज्म) आदि को सम्मिलित रूप से टीडीएस कहते हैं। डॉ गुप्ता ने बताया कि ऐसा मीटर जो टीडीएस मापता है पानी की शुद्धता का सही माप नहीं कर सकता है। क्योंकि यह केवल जल में घुले कणों की संख्या मापता है। पानी में शरीर के लिए लाभदायक कणों की संख्या ज्यादा होने पर भी पीने योग्य शुद्ध जल का टीडीएस ज्यादा होगा। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ प्रदूषित न पीने योग्य जल में हानिकारक कणों (केमिकल पेस्टीसाइड) की संख्या कम होने पर  भी जल का टीडीएस कम होगा।
टीडीएस का महत्व
डॉ गुप्ता ने बताया कि इन्ही घुले हुए कणों के कारण पानी स्वादिष्ट बनता है। अमेरिका ने पीने योग्य पानी का मानक 500 टीडीएस तय किया है। उन्होंने बताया कि यूरोप के विकसित देशों में नल के पानी का टीडीएस 200 से 700 के बीच पाया जाता है। वहां की जनता इस टीडीएस को कम करने के उपाय सोचकर अपना समय एवं धन व्यर्थ नहीं करना चाहती है।

 हड्डियां  कर देता है कमजोर
उन्होंने बताया कि आरओ फि़ल्टर जल में प्राकृतिक रूप से मौजूद शरीर के लिए आवश्यक खनिज तत्वों को  भी छान देता है। जिसके परिणाम स्वरुप शरीर में खनिज तत्वों की कमी हो जाती है। जिससे शरीर की हड्डियां  कमजोर हो जाती हैं, मांसपेशियों में ऐंठन होती है। उन्होंने बताया कि एक रिसर्च के अनुसार एसिडिक पानी को न्यूट्रल करने के लिए शरीर को अधिक कार्य करना पड़ता है। जिसके एवज में शरीर से कैल्शियम और मैगनिशियम जो की हड्डी और दांत में रहता है धीरे धीरे क्षरण होकर कम होने लगता है।
कैंसर को देता है बढ़ावा
डॉ गुप्ता ने बताया कि आरओ फि़ल्टर प्लास्टिक का बना होता है । तेज प्रेशर से पानी को फि़ल्टर से छाना जाता है जिससे कुछ मात्रा में प्लास्टिक का अंश भी पानी में घुल जाता है जिससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।
हार्ट अटैक का भी बनता है कारण
अमेरिका में 6 वर्षों तक 20000 स्वस्थ व्यक्तियों जिनकी उम्र 38 से 100 वर्ष के बीच थी पर एक शोध किया गया जिसकी रिपोर्ट 1 मई 2002 के अमेरिकन जर्नल ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित हुई है।  इस रिपोर्ट के मुताबिक लगातार आरओ पानी पीने से शरीर में कैल्शियम और मैगनीशियम की कमी हो जाती है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
इम्मुनिटी कम होना
आरओ का पानी लगातार पीने से  हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जिससे जल्दी ही रोग शरीर को जकड़ लेता है। रोग हो जाने पर रोग मुक्त होने में अधिक समय लगता है।
आरओ पानी एसिडिक (अम्लीय)
डॉ गुप्ता कहते हैं कि आपको जानकर हैरानी होगी कि आपका मनपसंद चहेता  आरओ का जल एसिडिक होता है। शुद्ध प्राकृतिक जल का पीएच 7 होता है जबकि आरओ के  पानी का पीएच 5 से 6 होता है। 5 पीएच का पानी 7 पीएच वाले जल से 100 गुना अधिक एसिडिक होता है। आरओ पानी पीने से शरीर के खून का पीएच बदल जाता है। डॉ गुप्ता ने बताया कि डॉ ओटो वारबुर्ग जिन्होंने कैंसर के कारणों की खोज की और नोबल पुरस्कार प्राप्त किया, के अनुसार शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी के कारण कैंसर होता है। और यह ऑक्सीजन की कमी शरीर में अम्लीयता एसिडोसिस बढऩे के कारण होती है। विश्व स्वस्थ्य संगठन की स्टडी के अनुसार कम खनिज युक्त पानी पीने से  पेशाब की मात्रा 20 प्रतिशत बढ़ जाती है जिससे शरीर से सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, क्लोराइड, मैगनीशियम आयरन अधिक मात्रा में निकल जाते हैं।
डॉ गुप्ता ने बताया कि इन बातों को परखने के लिए  विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कई स्टडी हुई हैं इनमें WHO study:Health risks from drinking demineralized water,  University of Nebraska : Drinking Water Treatment: Reverse Osmosis:2014,  Drinking demineralized water-The Health Risks ( a WHO study) ÌÍæ The Health Risks from drinking demineralized water. F. Kozisek- को इंटरनेट पर प्रकाशित भी किया गया है। उन्होंने कहा कि आरओ पानी का सही एवं वास्तविक रूप से उपयोग  केवल उद्योग धंधों फैक्ट्री प्रयोगशालाओं में शोध कार्य आदि के लिए होता है।

किडनी का काम किडनी को करने दें
डॉ महेश कहते हैं कि मेरा मानना है कि शरीर में भगवान ने दो किडनी दी है जिनका काम है रक्त को साफ करना फि़ल्टर करना फि़ल्टर करके खून को साफ करके गंदगी को पेशाब से बाहर निकालना। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि यदि किसी अंग से काम न लिया जाय तो धीरे-धीरे वह अंग काम करना बंद कर देता है। यही हाल किडनी का है। उनसे फिल्टर का काम न लेने पर वो काम करना बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि प्रकृति की दी हुई छन्नी अन्दर है तो बाहर से आरओ से छान के पानी पीने की क्या जरूरत है। सोचिये और समझिये।

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