बेसिक-माध्यमिक छात्रों को यातायात नियम और फर्स्ट एड सीखना होगा अनिवार्य

परीक्षा में प्रश्नपत्र में शामिल होंगे यातायात व फर्स्ट एड के प्रश्न, हल करना होगा जरूरी

सेहत टाइम्स एक्सक्लूसिव

लखनऊ। सडक़ दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में यातायात नियमों की जानकारी तथा सडक़ दुर्घटना के बाद दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को स्पॉट से किस ढंग से उठाकर अस्पताल तक पहुंचाना है, का प्रशिक्षण प्रत्येक छात्र के लिए अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है। छात्रों को यातायात नियमों और फर्स्ट एड से सम्बन्धित प्रश्न परीक्षा में करना अनिवार्य होगा, इसके लिए उन्हें 10 अंक तक  दिये जायेंगे। फर्स्ट एड की ट्रेनिंग के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी की टीम स्कूलों में जाकर उन्हें प्रशिक्षित करेगी।

फर्स्ट एड का प्रशिक्षण रेडक्रॉस की टीम देगी

बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई सडक़ सुरक्षा परिषद की बैठक में इस पर सहमति बनी। बैठक में लिये गये फैसले के बारे में परिवहन आयुक्त के रविन्दर नायक ने ‘सेहत टाइम्स’ को बताया कि सरकार सडक़ दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर है, इसी के तहत अनेक विभागों के साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को इस बैठक में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने बताया कि छात्रों को बताया जायेगा कि किस तरह सडक़ पार करें, किस तरह बस में या ऑटो में चढ़ें आदि सिखाते हुए यातायात नियमों की जानकारी सिखायी जायेगी। उन्होंने बताया कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा की किताबों में यातायात नियम की जानकारी तो है लेकिन इसे प्रश्नपत्र में अनिवार्य रूप से शामिल करने और प्रश्न छात्र को अनिवार्य रूप से हल करने की व्यवस्था बनायी जायेगी। इसके साथ ही श्री नायक ने कहा कि फर्स्ट एड सम्बन्धी प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करके छात्रों को यह भी शिक्षा दी जायेगी कि दुर्घटना होने पर अगर व्यक्ति को हेड इंजरी हुई है तो उसे कैसे उठाना है या पैर में इंजरी हुई तो उसे कैसे उठाना है। इसके अतिरिक्त अगर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति वयस्क है तो बच्चे अकेले नहीं उठा पायेंगे तो ऐसे में दो-तीन बच्चे मिलकर या किसी अन्य की मदद से उसे किस तरह उठायें, ये सारी बातें सिखायी जायेंगी।

मिस हैंडलिंग से हो जाता है नुकसान

ज्ञात हो अनेक बार दुर्घटना होने के बाद विशेषकर हेड इंजरी वाले व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए गलत तरीके से उठाने में ही उसे और गंभीर नुकसान हो जाता है, इस शिक्षा से जहां मिस हैंडलिंग जैसी स्थितियों से निपटना आसान होगा बल्कि जल्द से जल्द दुर्घटनाग्रस्त मरीज को अस्पताल पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

फोटो प्रतीकात्मक

अकाल मृत्यु में 75 फीसदी मौतें रोड एक्सीडेंट से

इस बैठक में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, मनोरंजन विभाग समेत कई विभागों के साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए के चिकित्सकों को भी बुलाया गया था। सरकार की ओर से सडक़ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव मांगे गये। बैठक में कहा गया कि हर वर्ष एक लाख 35 लोगों की सडक़ दुर्घटनाओं में मौत हो जाती है जो गभीर मामला है। यही नहीं असामायिक मौतों में लगभग 75 फीसदी मौतें सडक़ दुर्घटनाओं में होती हैं, और इसमें से आधी यानी 50 प्रतिशत लोगों की आयु 15 से 35 वर्ष के बीच की होती है।
पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए यातायात नियमों की जानकारी और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को फर्स्ट एड देने की जागरूकता सम्बन्धी दोनों सुझाव आईएमए की ओर से दिये गये। डॉ संदीप तिवारी ने गोल्डेन आवर में फर्स्ट एड देने के प्रशिक्षण पर अपनी सहमति जतायी तथा आईएमए लखनऊ शाखा के अध्यक्ष डॉ पीके गुप्ता ने आईएमए की ओर से इस तरह के प्रशिक्षण का आयोजन करने का भरोसा दिलाया। आईएमए के प्रतिनिधिमंडल में डॉ एएम खान, डॉ रुखसाना खान, डॉ पीके गुप्ता और डॉ संदीप तिवारी शामिल रहे। लगभग दो घंटे चली बैठक में मुख्य सचिव राहुल भटनागर, गृह विभाग के अधिकारी, प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला, परिवहन आयुक्त के रविन्दर नाइक सहित अनेक अधिकारी भी  शामिल थे।