Wednesday , September 1 2021

घाव भर जाये, हड्डी जुड़ जाये लेकिन अंग काम न करे तो दिखायें प्लास्टिक सर्जन को

लखनऊ। यदि आपके हाथ-पैर आदि में गहरी चोट लगी है और घाव भरने के बाद भी प्रभावित अंग ठीक से काम नहीं कर रहा है तो सिर्फ फीजियोथेरेपी के भरोसे न बैठें एक बार प्लास्टिक सर्जन को भी दिखा कर उनकी सलाह ले लें क्योंकि हो सकता है कि नर्व डैमेज हो गयी हो जो कि फीजियोथेरेपी से नहीं ठीक होगी उसका इलाज प्लास्टिक सर्जन के ही पास है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि प्लास्टिक सर्जन से तीन से छह माह के अंदर सम्पर्क कर लें।

आईएमए में मनाया गया प्लास्टिक सर्जरी डे

यह सलाह आईएमए भवन में आईएमए द्वारा प्लास्टिक सर्जरी डे पर आयोजित संगोष्ठी में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान एसजीपीजीआई के डॉ अंकुर भटनागर ने देते हुए बताया कि जब चोट लगती है तो हड्डी और खाल तो जुड़ जाती है और व्यक्ति समझता है कि घाव भर गया हड्डी जुड़ गयी लेकिन प्रभावित अंग पूरी तरह से काम नहीं करता है तो उसके लिए वह सोच लेता है कि धीरे-धीरे फीजियोथेरेपी से ठीक हो जायेगा लेकिन ऐसा होता नहीं है और समय निकलता जाता है। उन्होंने बताया कि दरअसल होता यह है कि चोट लगने पर अगर नर्व भी डैमेज हो जाती है तो वह हिस्सा काम नहीं करता है क्योंकि नर्व एक तरह का तार है जिसमें करंट दौड़ता रहता है यह तार रूपी नर्व मस्तिष्क से जुड़ी रहती है और सब कुछ सामान्य चलता रहता है लेकिन इस नर्व के डैमेज होने पर मस्तिष्क से उसका सम्बन्ध टूट जाता है जिससे उसे सिग्नल नहीं मिलते फलस्वरूप अंग शिथिल पड़ा रहता है।

छह माह के अंदर डैमेज नर्व की सर्जरी जरूरी

उन्होंने बताया कि इसी नर्व को जोडऩे और जरूरत पडऩे पर शरीर के दूसरे हिस्से से नर्व लेकर वहां लगाने का कार्य प्लास्टिक सर्जन ही करता है लेकिन इसके अच्छे परिणाम के लिए जरूरी है कि मरीज जितनी जल्दी सम्पर्क करेगा उतने ही उस नर्व को ठीक होने के आसार बढ़ेंगे और छह माह बाद अगर उसने सम्पर्क किया तो फिर नर्व के ठीक होने के आसार न के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि नर्व की सर्जरी में रिकवरी एकदम से नहीं होती है इसमें करंट एक एमएम प्रति दिन बढ़ता है यानी दोबारा जोड़ी गयी नर्व की लम्बाई 50 एमएम है तो इस नर्व को ठीक होने में 50 दिन लग जायेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि सामान्यत: नर्व की परेशानी होने पर व्यक्ति न्यूरो सर्जन के पास जाने को ही इलाज मानते हैं लेकिन सिर और स्पाइन छोडक़र बाकी शरीर के अंगों में जो नर्व हैं उसकी सर्जरी प्लास्टिक सर्जन ही करते हैं इसलिए हाथ-पैर आदि की चोट लगने पर नर्व के इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जन के ही पास जाना चाहिये। उन्होंने बताया कि नर्व के फंक्शन को टेस्ट करने के लिए एमआरआई की जांच जरूरी नहीं है इसे क्लीनिकली जांच से भी पता लगाया जा सकता है।

थोड़ी सी सावधानी बचा सकती है महंगी प्लास्टिक सर्जरी से

संगोष्ठी में सिप्स हॉस्पिटल के डॉ आरके मिश्र ने बताया कि किसी भी कारणों से ज्यादा जलने के कारण अगर व्यक्ति की प्लास्टिक सर्जरी की जाती है तो यह बहुत खर्चीली होती है। उन्होंने कहा मोटे तौर पर यह मान कर चलें कि इसका खर्च 5000 रुपये प्रति फीसदी यानी अगर व्यक्ति 10 फीसदी जल गया है तो खर्च लगभग 50000 रुपये आयेगा। यही नहीं अगर 40 फीसदी से ज्यादा जल गया है तो जान का खतरा भी बढ़ जाता है और अगर 70 फीसदी से ज्यादा जल गया है तो फिर जान बचना बेहद मुश्किल है।

कैसे बचें जलने से

उन्होंने कहा कि अच्छा होगा लोग ध्यान रखें और ऐसी दुर्घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि हमारे रहन-सहन, त्योहार आदि में रोज ही आग से सामना पड़ता है लेकिन सावधानी आपको दुर्घटना से बचा सकती है।

खाना बनाते समय ऐप्रन पहनें

उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया कि खाना बनाते समय यदि ऐप्रन पहनें तो साड़ी के पल्लू, दुपट्टï आदि में आग लगने का डर नहीं रहेगा। इसी प्रकार गांवों में भी लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाते समय भी इन बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है। उन्होंने अपने घर की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि उन्होंने अपनी गैस का चूल्हा तो किचन में रखा है लेकिन उसका सिलिंडर बाहर खुली हुई बालकोनी में रखा है उसे कॉपर की पाइप लाइन से जोड़ रखा है इसी पाइप में बीच में किचन के अंदर ही ऑन-ऑफ करने का स्विच लगा रखा है यानी किचन के अंदर सिलिंडर विस्फोट होने का खतरा ही नहीं। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि दीपावली में दीये जलाते समय विशेषकर महिलाएं अपनी साड़ी के पल्लू का ध्यान रखें, पटाखे छुड़ाते समय सावधानी बरतें। इन चीजों का ध्यान रखने पर आग की दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। घर में एक बाल्टी पानी और बालू ऐसी जगह जरूर रखें जहां आग लगने का खतरा हो।

बिजली के स्विच बच्चों की पहुंच से दूर रखें

बच्चों की पहुंच से दूर रखने के लिए घर के अंदर बिजली के स्विच पांच फीट से ऊपर की दूरी पर लगवायें। बिजली के सॉकेट के छेदों में कवर लगा हो जिससे कभी बच्चा अगर छेद में उंगली डाल दें तो खतरा न रहे। किचन में अगर कुछ पक रहा हो तो ध्यान रखें कि आपकी अनुपस्थिति में बच्चा वहां न पहुंच जाये।

मोबाइल और चाय साथ नहीं

उन्होंने कहा कि चाय पीते समय आप मोबाइल पर बिजी न रहें खासकर जब छोटा बच्चा आपके पास हो कई बार देखा गया है कि ध्यान भटकते ही बच्चे चाय पर झपट्टा मारते हैं जिससे वे जल जाते हैं।
इसी प्रकार चाय आदि रखने वाले मेजपोश नीचे तक लटकने वाले न हों क्योंकि कई बार बच्चे मेजपोश पकड़ कर खींच लेते हैं जिससे चाय उनके ऊपर गिर जाती है और वे जल जाते हैं।

जल जायें तो क्या करें

उन्होंने कहा कि अगर जल ही जायें तो सबसे पहले जले हुए स्थान पर पांच से सात मिनट सिर्फ साधारण साफ पानी डालें ऐसा करने से जलने के घाव की गहराई ज्यादा नहीं होगी।

कैंसर से क्षतिग्रस्त अंग बनाने में प्लास्टिक सर्जन की भूमिका

इसके अलावा केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ बृजेश मिश्र ने कैंसर के चलते क्षति हुए अंगों के पुनर्निर्माण के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैंसर से प्रभावित अंग को निकालने के बाद वहां पर प्लास्टिक सर्जरी करके मूलरूप में लाने की कोशिश होती है। उन्होंने स्तन कैंसर होने पर स्तन निकालने के बाद दूसरा स्तन लगाना, जबड़े में या गाल में कैंसर होने के बाद प्रभावित हिस्से को निकालकर उस हिस्से की प्लास्टिक सर्जरी कैसे की जाती है इस बारे में जानकारी दी।
इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा ने शनिवार को प्लास्टिक सर्जरी डे मनाया। इस मौके पर आईएमए भवन पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में प्लास्टिक सर्जरी का चोट लगने पर, जलने पर तथा कैंसर जैसे रोग में क्या महत्व है, इसके बारे में विशेषज्ञों ने जानकारी प्रस्तुत की।
संगोष्ठी की शुरुआत में प्लास्टिक सर्जरी दिवस और इसकी महत्ता के बारे में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ एससी श्रीवास्तव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों तक प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा मिले इसके लिए सरकारी को सीएचसी स्तर पर भी इनकी तैनाती करनी चाहिये। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो एके सिंह और आईएमए के पास्ट प्रेसीडेंट प्रो विजय कुमार ने प्लास्टिक सर्जरी के महत्व पर प्रकाश डाला।

 

 

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