टीबी उन्‍मूलन : हिमाचल के नक्‍शे कदम पर चलें तो आसार हो जायेगी डगर

टीबी के लिए गठित प्रदेश स्‍तरीय टास्‍क फोर्स की तीन दिवसीय बैठक व कार्यशाला शुरू

लखनऊ। भारत से टीबी के उन्‍मूलन के लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए भारत सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के साथ ही अगर हिमाचल प्रदेश सरकार के कदम को अगर दूसरे राज्‍यों की सरकारें भी अपना लें तो टीबी उन्‍मूलन की दिशा में यह कदम मील का पत्‍थर साबित होगा। यह बात टीबी के लिए गठित स्टेट टास्क फोर्स के नॉर्थ जोन के चेयरमैन डॉ एके भारद्वाज ने यहां प्रदेश स्‍तरीय टास्‍क फोर्स की बैठक व कार्यशाला में अपने सम्‍बोधन में कही। आपको बता दें कि हिमाचल सरकार ने चार वर्ष पूर्व टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार का वितरण शुरू किया था। पिछले दिनों भारत सरकार द्वारा भी प्रत्येक टीबी के मरीज के लिए दवा सेवन के दौरान प्रतिमाह 500 रुपये पोषणयुक्‍त खान-पान के लिए देना शुरू किया है। इस तरह से भारत सरकार द्वारा जहां पौष्टिक आहार के लिए 500 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है वहीं हिमाचल सरकार द्वारा धनराशि न देकर  पौष्‍टक आहार दिया जाता है।

 

आज बुधवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कलाम सेंटर में पुनीरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम की 37वीं प्रदेश स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस बैठक एवं कार्यशाला में प्रदेश भर के समस्त सरकारी व गैर सरकारी 40 मेडिकल कॉलेज के प्रतिनिधियों एवं जिला क्षय रोग अधिकारी ने हिस्‍सा लिया। इस बैठक में विभिन्न मेडिकल कॉलेज में क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं टीबी की रोकथाम एवं इसके प्रति लोगों को जागरूक किए जाने में आने वाली कठि‍नाइयों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई।

प्रो एमएलबी भट्ट

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ऐसे जनकल्याणी विषय को लेकर चिकित्सा विश्वविद्यालय में बैठक एवं कार्यशाला आयोजित किए जाने को संस्थान के लिए ऐतिहासिक एवं गौरव का विषय बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश टास्क फोर्स (क्षय नियंत्रण) के चेयरमैन डॉ सूर्यकांत की सराहना करते हुए कहा कि टीबी को समाप्त करना विश्व, देश तथा समाज की आवश्यकता है और टीबी को समाप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश मुख्य भूमिका निभाने का कार्य करेगा क्योंकि यहां से आए नतीजे पूरे देश के प्रभावित करेंगे।

 

डॉ सूर्यकांत

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश टास्क फोर्स (क्षय नियंत्रण) के चेयरमैन डॉ सूर्यकांत ने बताया कि विश्व भर में टीबी रोग से पीड़ित मरीजों में से 27 प्रतिशत मरीज हमारे देश में हैं और 13 मार्च 2018 का दिन इस रोग को समाप्त करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इसी दिन देश के प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक इस बीमारी को खत्म करने का संकल्प लिया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी है लेकिन इसे पूरी मेहनत और लगन से निभाना होगा।

 

इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश में टीबी की रोकथाम एवं इस बीमारी को जड़ से खत्म करने मे केजीएमयू मुख्य भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेजों में टीबी की नई औषधि बेडाक्यूलिन उपलब्ध कराई जा रही है तथा उनका यह प्रयास है कि शीघ्र ही यह औषधि प्रदेश भर से मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध हो सके।

 

इस अवसर पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स के वाइस चेयरमैन डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश में टीबी रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या देश भर के किसी भी राज्य के मुकाबल सबसे ज्यादा है, ऐसे में उत्तर प्रदेश को इस रोग के समूल नाश के लिए अग्रणी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी रोग के समूल नाश के लिए 2035 की समय सीमा तय की है लेकिन भारत सरकार ने इसे 2025 में खत्म करने का दृढ़ संकल्प किया है, जो एक बड़ा कार्य है और इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभाएगा।

 

कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन के कंसलटेंट डॉ उमेश त्रिपाठी, स्टेट टीबी डेमोंसट्रेशन सेंटर के निदेशक डॉ शैलेन्द्र भटनागर, उत्तर प्रदेश टास्क फोर्स (क्षय नियंत्रण) के वाइस चेयरमैन डॉ सुधीर चौधरी, उत्तर प्रदेश टास्क फोर्स (क्षय नियंत्रण) के वाइस चेयरमैन डॉ जुबैर अहमद, लखनऊ के जिला टीबी अधिकारी डॉ बीके सिंह, केजीएमयू रेस्पाइरेट्री मेडिसिन विभाग के डॉ अजय वर्मा, डॉ दर्शन बजाज, डॉ मनीष सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।