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आरएमएलआई व यूनीसेफ मिलकर करेंगे सीसा से हो रहे नुकसान का आकलन

-लेड-उत्तर प्रदेश परियोजना का शुभारम्भ, 16 से 20 जून तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

सेहत टाइम्स

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (डॉ. आरएमएलआईएमएस), लखनऊ द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से लेड-उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश में लेड के संपर्क का आकलन और पहचान)” परियोजना का शुभारम्भ संस्थान के प्रशासनिक भवन स्थित निदेशक बोर्ड कक्ष में आयोजित एक गरिमामय उद्घाटन समारोह के साथ किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष थे। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह, निदेशक, चीफ फील्ड ऑफिसर, यूनिसेफ उत्तर प्रदेश डॉ. ज़कारी एडम, यूनिसेफ के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ब्रेट एरिक्सन, डॉ. जैक कैरावानोस एवं डोरा इनेस मजारिएगोस कॉर्डेरो, संस्थान के संकाय सदस्य तथा परियोजना से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य चुनौती

उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने सीसा के संपर्क को एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य चुनौती बताते हुए कहा कि सीसा विषाक्तता बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास, सीखने की क्षमता तथा दीर्घकालीन उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। लेड-उत्तर प्रदेश परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सीसा संपर्क की व्यापकता एवं उसके संभावित स्रोतों का वैज्ञानिक आकलन कर साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णयों को सुदृढ़ करना है। प्रो. (डॉ.) अमित कौशिक, प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, डॉ. आरएमएलआईएमएस, ने परियोजना के उद्देश्यों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। यूनिसेफ के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सीसा रसायन, एक्सपोजर असेसमेंट, पर्यावरणीय नमूना संग्रहण, रक्त में सीसा परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा डाटा प्रबंधन से संबंधित तकनीकी विषयों पर अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मिली सेंगर द्वारा पूर्व में विश्व बैंक समर्थित दक्षिणांचल क्षेत्र एवं कानपुर में संचालित सीसा अध्ययन के निष्कर्षों एवं अनुभवों की प्रस्तुति दी गई। इस पूर्व परियोजना से प्राप्त जानकारियों ने वर्तमान राज्यव्यापी लेड-उत्तर प्रदेश परियोजना की रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।

वैज्ञानिक प्रमाणों का संकलन नीति निर्माण में होगा सहायक

अपने संबोधन में अमित कुमार घोष ने डॉ. आरएमएलआईएमएस एवं यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सीसा संपर्क के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाणों का संकलन भविष्य की जनस्वास्थ्य नीतियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हर संभव सहयोग एवं पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया तथा विश्वास व्यक्त किया कि इस अध्ययन के निष्कर्ष राज्य की जनस्वास्थ्य प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।

उद्घाटन समारोह के उपरांत नव नियुक्त परियोजना कर्मियों एवं अन्वेषकों के लिए 16 से 20 जून 2026 तक पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इस प्रशिक्षण में कक्षागत शिक्षण, व्यावहारिक प्रदर्शन, फील्ड कार्यशालाएँ, रक्त नमूना संग्रहण, पर्यावरणीय नमूनों का परीक्षण, एक्सआरएफ एवं लीडकेयर तकनीकों का उपयोग तथा डाटा एंट्री मॉड्यूल सम्मिलित हैं।