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दीक्षा पूरी करने वाले छात्रों को दी मरीजों का भरोसा जीतने की सीख

-धूमधाम से मनाया गया आरएमएलआई का तृतीय दीक्षांत समारोह

-टॉपर आकांक्षा जैन को चांसलर, हरमन सिंह को डायरेक्टर मेडल

सेहत टाइम्स

लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ का तृतीय दीक्षांत समारोह पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया गया। वक्ताओं द्वारा दीक्षांत की परम्परा के अनुरूप पासआउट छात्रों/डॉक्टरों को इस पवित्र पेशे के प्रति जिम्मेदारियों को निभाने की सीख दी गयी। उन्हें बताया गया कि करोडों लोगों की स्वास्थ्य की आशा आप छात्र हैं, अब आपके सामने सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि असली जीवन के वे चेहरे होंगे, जिनके मन में चिकित्सकों से काफी उम्मीदें भी हैं, चिंता भी है और भरोसा भी है। उम्मीदों पर खरे उतरते हुए चिंतामुक्त कर उनका भरोसा जीतना ही आपका लक्ष्य होना चाहिये। इस वर्ष एमबीबीएस की छात्रा आकांक्षा जैन ने प्रतिष्ठित चांसलर मेडल जीतते हुए टॉपर होने का गौरव प्राप्त किया है जबकि हरमन सिंह ने डायरेक्टर मेडल हासिल करके टॉपर लिस्ट में दूसरा स्थान हासिल किया है।

यहां गोमती नगर स्थित इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस समारोह की शुरुआत शैक्षणिक शोभायात्रा के साथ हुई। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल-कुलाध्यक्ष द्वारा छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से सम्बोधित किया गया। उन्होंने सभी डिग्रीधारको को बधाई दी कहा कि करोडों लोगो की स्वास्थ्य की आशा आप छात्र हैं। आप की जिम्मेदारियां सेवा समर्पण से निर्धारित है। ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज को समर्पित है। यह दीक्षांत समारोह शैक्षणिक उत्कृष्टता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सांस्कृतिक मूल्यों के समन्वय का प्रतीक है, उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान करते हुए उन्हें समाज एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

स्वस्थ और मस्त रहें छात्र

उपमुख्यमंत्री एवं कैबिनेट मंत्री, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण ब्रजेश पाठक ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुये सभी को बधाई दी और इस बात का आश्वासन दिया कि सरकार सदैव आपके साथ हैं। राज्य मंत्री, संसदीय कार्य, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा मातृ एवं शिशु कल्याण मयंकेश्वर शरण सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुये छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा छात्रों को स्वस्थ एवं मस्त रहना चाहिए। और समाज से प्राप्त करने के पश्चात् उसे वापस समाज को शिखर तक पहुचाने में सहयोग देना चाहिए।

नियति की दी हुई जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभायें

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) वेदप्रकाश मिश्रा द्वारा दीक्षांत समारोह का उद्बोधन दिया गया। उन्होंने कहा मैं भाषण नहीं सम्भाषण कर रहा हूं। नियति ने आपको जिम्मेदारी सौंपी है जिसे आपको ईमानदारी से पूर्ण करना होगा।

इससे पूर्व अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु कल्याण-संस्थान के उपाध्यक्ष अमित कुमार घोष ने स्वागत भाषण देते हुए सभी छात्रों को बधाई दी और कहा कि चिकित्सा शिक्षा प्रगति की ओर अग्रसर है और छात्र समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

अब सामने किताबें नहीं, आशा भरे जीवित चेहरे होंगे

संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ0)सी. एम. सिंह ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों से कहा कि आज आप सब यहाँ से आगे की दुनिया में कदम रख रहे हैं। अब आपके सामने सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि असली जीवन के वे चेहरे होंगे जहाँ उम्मीद भी है, चिंता भी है और भरोसा भी। मैं आपसे यही चाहूँगा कि आप डॉ. आर.एम.एल. की उस सोच को अपने साथ लेकर जाएँ जिसमें मरीज केवल उपचार का विषय नहीं, बल्कि पूरी संवेदना का केंद्र होता है, क्योंकि चिकित्सा की सबसे बड़ी सफलता किसी रिपोर्ट में नहीं, बल्कि किसी की राहत में दिखाई देती है।  सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आप जहाँ भी जाएँ, लोग आपको आपके ज्ञान से कम और आपके व्यवहार से ज्यादा याद रखें।

प्रस्तुत की संस्थान की प्रगति रिपोर्ट

निदेशक प्रो सीएम सिंह ने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज हमारे संस्थान में 200 एमबीबीएस, 40 बीएससी नर्सिंग, 107 एमडी/एमएस, 36 डीएम/एमसीएच, 6 एमएससी (न्यूक्लियर मेडिसिन), 04 डीएनबी, 02 एफएनबी तथा 76 पैरामेडिकल डिप्लोमा विद्यार्थियों एवं 35 पीएचडी शोधार्थियों को प्रतिवर्ष प्रवेश प्रदान किया जा रहा है। आज संस्थान के 34 विभागों में शैक्षणिक पाठ्क्रम चल रहा है। वर्ष 2026-27 में संस्थान में एफएनबी एवं डीएनबी की कुल 07 सीटें बढ़ाने के लिए प्रस्ताव प्रेषित है।

वर्ष 2025-26 में संस्थान के संकाय सदस्यों द्वारा 148 अनुसंधान परियोजनाएँ प्रारम्भ की गईं, 20 क्लीनिकल ट्रायल शुरू किए गए, एमबीबीएस विद्यार्थियों द्वारा 8 शोध परियोजनाएँ, परास्नातक विद्यार्थियों द्वारा 90 थीसिस कार्य तथा संस्थान के नाम 3 पेटेंट दर्ज हुए हैं।

बिना प्रतीक्षा डायग्नोस्टिक सेवा

निदेशक ने कहा कि संस्थान ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में एक अभिनव मानक स्थापित करते हुए ईको, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड सहित प्रमुख डायग्नोस्टिक जांचों को उसी दिन एवं बिना किसी प्रतीक्षा अवधि के उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की है, जहाँ सामान्यतः सरकारी अस्पतालों में इन जांचों के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है, वहीं यह व्यवस्था मरीजों को त्वरित रोग-निदान एवं शीघ्र उपचार सुनिश्चित करती है।

बेड तक दवाइयों की उपलब्धता

भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों को दवाइयाँ प्राप्त करने के लिए विभिन्न काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों और उपचार में होने वाले विलम्ब को समाप्त करने के उद्देश्य से संस्थान द्वारा बेडसाइड औषधि वितरण व्यवस्था लागू की गई है। एंडोक्राइन सर्जरी विभाग द्वारा दूरस्थ मरीजों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवा मई 2025 से प्रारम्भ इस सुविधा के माध्यम से 500 से अधिक एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया गया है।

“हृदय सेतु” कार्यक्रम: प्रदेशव्यापी स्टेमी नेटवर्क

स्टेमी के अन्तर्गत प्रदेश के 10 जनपदों को गोद लिया गया है जिनमें करीब 24000 से ईसीजी परीक्षण किये गये हैं। इनमें से 744 गंभीर स्टेमी रोगियों की पहचान करके 483 मरीजों को समयबद्ध थ्रोम्बोलाइज किया गया है और 240 गंभीर मरीजों को संस्थान में भर्ती कर उन्नत चिकित्सा सेवा प्रदान की गई है।

पहली बार हुई ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी

प्रो सिंह ने न्यूरो साइंस एवं सुपर स्पेशियलिटी उपलब्धियाँ गिनाते हुए बताया कि पहली बार पार्किंसन रोग के लिए डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। उन्होंने कहा कि न्यूरो साइंस सेंटर में लगभग 150 बेड उपलब्ध हैं तथा अब तक 8,700 मरीजों को भर्ती कर उपचार प्रदान किया गया है।

समारोह के दौरान संस्थान के निदेशक एवं संकायाध्यक्ष द्वारा उपाधि प्राप्तकर्ताओं को दीक्षा उपदेश एवं शपथ ग्रहण कराया गया। तत्पश्चात डिजिटल माध्यम से उपाधियों (डिग्री एवं मार्कशीट) का वर्चुअल अपलोड किया गया। दीक्षांत समारोह के दौरान डीएम, एमसीएच, एमडी, एमएस, एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग तथा एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन के विद्यार्थियों को शैक्षणिक पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गये। इस अवसर पर चांसलर्स मेडल, डायरेक्टर्स मेडल सहित अन्य 24 पदकों का वितरण किया गया। कुल 26 पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गये। इसके अतिरिक्त प्रो राजन भटनागर, विभागाध्यक्ष, एनाटमी विभाग को उत्कृष्ट अध्यापक के सम्मान से सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।

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इन्होंने हासिल किये पदक

चांसलर मेडल

एमबीबीएस की छात्रा आकांक्षा जैन

डायरेक्टर्स मेडल

एमबीबीएस के छात्र हरमन सिंह

गोल्ड मेडल

एमबीबीएस की छात्रा वैष्णवी श्रीवास्तव व दीक्षा सलूजा

इंस्टीट्यूट सब्जेक्ट मेडल

एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं अवन्तिका ठाकुर, दीपक कुमार, सृष्टि गोयल, अधरित शुक्ला, सिद्धांत गर्ग, शिवांश श्रीनेत और काजल फेरवानी

सुपर स्पेशियलिटीज कोर्स

डीएम कार्डियोलॉजी डॉ शिशिर गर्ग, एमसीएच यूरोलॉजी डॉ अभिषेक मिश्रा तथा डीएम नेफ्रोलॉजी डॉ विनय सागर

एम डी

डॉ दीपिका रमोला, डॉ अनु अरविन्द, डॉ विक्रम प्रताप सिंह, डॉ शुभि शुक्ला, डॉ सौरभ यादव, डॉ अक्षय कुमार, डॉ दीक्षा ढींगरा, डॉ अनुकृति सुभाग्य तथा डॉ हसीब बेग

एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन

अरविन्द एन

यूनिवर्सिटी मेडल

बीएससी नर्सिंग की शिखा वर्मा

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छात्रों को उनकी डिग्रियां आरएमएलआई के निदेशक प्रो सीएम सिंह के साथ ही पूर्व निदेशकों प्रो एके सिंह व प्रो नुजहत हुसैन ने प्रदान कीं।

कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान के एमबीबीएस विद्यार्थियों द्वारा समूह में अभिनय सहित देशभक्ति गीत की प्रस्तुति गयी। समारोह में गोद लिए गए गांवों के छह स्कूली बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण विषय पर नाट्य प्रस्तुति दी गयी, जो उपस्थित जनसमूह को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयी बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया। स्किट प्रतियोगिता में विजेता छह, चित्रकला प्रतियोगिता में विजेता दो तथा भाषण प्रतियोगिता में विजेता एक छात्र सहित कुल नौ स्कूली बच्चों को पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह के दौरान महिला एवं बाल विकास से संबंधित विशेष पहल के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सम्मानित करते हुए उन्हें किट वितरित की । इसके अतिरिक्त सामाजिक संस्था ‘जनमंच’ की ओर से पुस्तक भेंट कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। विद्यालयी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 100 पुस्तकों का वितरण भी किया गया। जिससे बच्चों में अध्ययन की रुचि एवं पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।