Sunday , April 5 2026

डॉक्टर की कलम से

ब्रेस्ट कैंसर का साक्ष्य-आधारित और रोगी-केंद्रित प्रबंधन पर जोर

-एसजीपीजीआई ब्रेस्ट कोर्स 2026 और आईएईएस मिडकॉन का दूसरा दिन -प्रारंभिक और एडवांस्ड स्तन कैंसर के लिए विकसित हो रही रणनीतियों पर चर्चा सेहत टाइम्स लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ में आयोजित एसजीपीजीआई ब्रेस्ट कोर्स 2026 और आईएईएस मिडकॉन के दूसरे दिन देश भर के प्रतिनिधियों की भारी भागीदारी देखी …

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गिरता जा रहा है बुजुर्गों का भावनात्मक स्वास्थ्य, क्या करें…

✍🏻 साइक्लोमेड फिट इंडिया के संस्थापक डॉ अनिल नौसरन की कलम से आज के तथाकथित समृद्ध समाज में एक चिंताजनक विरोधाभास उभर रहा है—जहाँ भौतिक सुविधाएँ बढ़ी हैं, वहीं हमारे बुज़ुर्गों का पोषण और भावनात्मक स्वास्थ्य चुपचाप गिरता जा रहा है। अनेक वृद्धजन पोषण की कमी से पीड़ित हैं, यह …

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स्वस्थ फेफड़े ही जीवन का वास्तविक दीपक

-सांस के रोगी दिवाली में क्या करें, क्या न करें -डॉ सूर्य कान्त की कलम से दिवाली अब दीयों की तुलना में आतिशबाजी और पटाखों का त्यौहार अधिक प्रतीत होती है। दीपावली से कई दिन पहले ही पटाखों की कानफोड़ू आवाजें लोगों के चैन में खलल डालने लगती हैं। इनसे …

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होम्योपैथी में अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान : चुनौतियाँ और समाधान

-डॉ हैनिमैन की जयंती विश्व होम्योपैथी दिवस (10 अप्रैल) पर प्रो. डॉ. राजेंद्र सिंह की कलम से निकला समग्र लेख होम्योपैथी वैकल्पिक चिकित्सा की एक प्रणाली है जिसका अभ्यास दो शताब्दियों से भी अधिक समय से किया जा रहा है। 18वीं शताब्दी के अंत में डॉ. सैमुअल हैनीमैन द्वारा स्थापित …

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बिगड़ी हुई जीवन शैली की छलनी में आखिर कैसे टिकेगा स्वास्थ्य का दूध ?

-विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल) पर डॉ सूर्यकान्त की ✍️ कलम से एक कहावत है कि छलनी में दूहो और कर्मों को रोओे, यानी अगर आप छलनी में दूध दूहेंगे तो दूध आखिर कैसे रुकेगा क्योंकि छलनी में तो अनेक छेद होते हैं, और फिर आप अपने भाग्य को दोष …

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समाज की मूल्यवान धरोहर हैं बुजुर्ग

-विश्व वृद्ध दिवस (1 अक्टूबर) पर प्रो डॉ राजेंद्र राजपूत की कलम से विशेष लेख विश्व वृद्ध दिवस, जो हर साल 1 अक्टूबर को मनाया जाता है, बुजुर्गों के प्रति सम्मान, सेवा और समर्थन का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन हमें बुजुर्गों की सेवा करने, उनकी जरूरतों को समझने …

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सम्भव है संकेतों को पहचान कर किसी को आत्महत्या करने से रोकना

-क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सावनी गुप्ता का विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विशेष लेख मरने के इरादे से खुद को नुकसान पहुँचाने से होने वाली मौत को आत्महत्या कहा जाता है। मरने के इरादे से खुद को चोट पहुँचाने का कार्य ही आत्महत्या को परिभाषित करता है। आत्महत्या सभी उम्र और पृष्ठभूमि …

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