डॉक्‍टरों व स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों को सुरक्षा देने वाले बिल को राज्‍यसभा में मंजूरी

-कोरोना काल में डॉक्‍टरों, स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों पर कई स्‍थानों पर हुआ था हमला  

-हमला-तोड़फोड़ करने वालों पर दो लाख तक का जुर्माना, पांच साल तक की सजा का प्रावधान

123 साल पुराने बिल में संशोधन के लिए लाया गया महामारी रोग विधेयक-2020

नयी दिल्‍ली/लखनऊ। संशोधित रूप में लाया गया महामारी रोग विधेयक-2020 आज शनिवार को राज्यसभा में पारित हो गया। 123 साल पुराने इस बिल को संशोधन के बाद केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पेश किया गया था, इस संशोधित विधेयक में महामारी के दौरान डॉक्टर्स, नर्स, आशा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा किये जाने के साथ ही,  इन पर हमला करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। अब इस बिल के तहत डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों को जुर्माने के अतिरिक्‍त अधिकतम पांच साल तक की सजा हो सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्यसभा में डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, ‘कोरोना से जुड़े कलंक के कारण डॉक्टर्स, पैरामेडिक्स सहित कई स्वास्थ्यकर्मियों,  जिनका किसी न किसी रूप में अपमान किया गया है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जब ऐसे केसेज में कार्रवाई की गयी तो पाया कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए इसके खिलाफ एक कानून, एक निषेधात्मक तंत्र की आवश्यकता है।

उन्‍होंने बताया कि इस बिल में हमला करने वालों पर 50 हजार से 2 लाख के जुर्माने का प्रावधान भी है, साथ ही तीन महीने से पांच साल की सजा भी हो सकती है। ज्ञात हो बीते अप्रैल माह में महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन करने के लिए सरकार अध्यादेश लाई थी, अब इसके विधेयक के रूप में पास हो जाने के बाद सजा का रास्‍ता साफ हो गया है।

बिल को मंजूरी पर डॉ सूर्यकांत ने जताया हर्ष


बिल को मंजूरी मिलने पर चिकित्‍सा जगत ने हर्ष जताया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के ऑनरेरी प्रोफेसर तथा आईएमए की केंद्रीय व राज्‍य काउंसिल के सदस्‍य प्रो सूर्यकान्‍त ने राज्‍यसभा से पारित इस बिल पर खुशी जतायी है। उन्‍होंने कहा कि यह बहुत आवश्‍यक था। उन्‍होंने कहा कि इस कोरोना काल में फ्रंट लाइन पर कार्य कर रहे चिकित्‍सकों व अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों को सुरक्षा देना देश हित में भी है।