मुंडे ने लगायी होती सीट बेल्‍ट तो शायद बच जाते, ड्राइवर ने लगायी थी वह बच गया

केजीएमयू के न्‍यूरो सर्जरी विभाग ने स्‍पाइनल कॉर्ड इंजरी रोकने के लिए आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम
50 स्‍कूलों के बच्‍चों को किया गया था आमंत्रित, साइकिल चलाते समय भी हेलमेट लगाने का दिया संदेश

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। कार में बैठकर अगर सीट बेल्‍ट नहीं लगायी है तो यह गलत है, ड्राइवर और आगे बैठी सवारी ही नहीं बल्कि पीछे बैठी सवारियों को भी सीट बेल्‍ट लगानी चाहिये, इसी प्रकार दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट लगाना चाहिये। जहां तक बच्‍चों के साइकिल चलाने की बात है तो बच्‍चों को साइकिल चलाते समय भी हेलमेट लगाना चाहिये।

ये वे कुछ जानकारियां है जो शुक्रवार को किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय के न्‍यूरो सर्जरी विभाग द्वारा स्‍पाइनल कॉर्ड सर्जरी को बचाने के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में दी गयीं। इस बारे में जानकारी देते हुए न्‍यूरो सर्जरी विभाग के डॉ सोमिल जायसवाल ने बताया कि कार में सभी को सीट बेल्ट लगाने की जरूरत है, उन्‍होंने बताया कि सीट बेल्‍ट लगाना कितना सुरक्षित और न लगाना कितना खतरनाक हो सकता है इसका ज्‍वलंत उदाहरण है पांच साल पूर्व भाजपा नेता गोपी नाथ मुंडे की सड़क दुर्घटना में हुई मौत। उनकी कार का जब एक्‍सीडेंट हुआ तब वह पीछे बैठे थे और सीट बेल्‍ट नहीं पहने थे जबकि उनका ड्राइवर जो सीट बेल्‍ट पहने था, वह बच गया।

शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में स्‍कूली बच्‍चों को बुलाया गया था, इस अवसर पर कई प्रकार की अंतरविद्यालयी प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं। डॉ सोमिल जायसवाल ने बताया कि बच्‍चों को साइकिल चलाते समय भी हेलमेल पहनने का संदेश देने का उद्देश्‍य यह भी है कि जहां उनकी वर्तमान में स्‍पाइनल कॉर्ड इंजरी से बचाव होगा वहीं बड़े होकर उनकी हेलमेट लगाने की हालत बरकरार रहेगी और मोटर वाले टू व्‍हीलर चलाते समय हेलमेट लगाना उन्‍हें अतिरिक्‍त कार्य नहीं महूसूस होगा। उन्‍होंने बताया कि स्कूली छात्र समाज में बदलाव की सीढ़ी हैं। हम मानते है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के इस मुद्दे के प्रति उन्हें संवेदनशील बनाने से निश्चित रूप से उनमें, उनके सहकर्मी समूह, परिवारों और समाज में बदलाव आएगा।

विभागाध्‍यक्ष प्रो बीके ओझा ने बताया कि केजीएमयू का न्यूरोसर्जरी विभाग, अपनी स्थापना के समय से ही स्पाइनल कॉर्ड की चोट के प्रबंधन में अग्रणी है। यूपी राज्य में स्पाइनल कॉर्ड की चोट के रोगियों को सस्ता और गुणवत्ता पूर्ण इलाज प्रदान करने में विभाग पहले स्थान पर है। उन्‍होंने बताया कि स्पाइनल कॉर्ड की चोट के रोगियों की संख्या अन्य न्यूरोसर्जिकल सेन्टर की तुलना में बहुत अधिक है। वर्ष 2018 में हमने स्पाइनल कॉर्ड की चोट के लगभग 350 रोगियों को इमरजेन्सी में देखा और उनमें से 300 को भर्ती किया। 270 मरीजों का आपरेशन किया गया । यह आंकड़ा देश के सभी न्यूरोसर्जिकल आपातकालीन केंद्रों में सबसे अधिक है।

प्रो ओझा ने बताया कि इस उच्च संख्या को संज्ञान में लेते हुए, हमारा मानना है कि रीढ की हड्डी की चोट के बचाव पर जोर देने वाले जागरूकता कार्यक्रमों की इस समय जरूरत है। चूंकि ऐसे मरीजों के परिवार पर अत्यधिक आर्थिक और मानसिक बोझ पड़ता है। इसलिए न्यूरोसर्जरी विभाग ने यह पहल की है कि रीढ की हड्डी की चोट के रोगियों का इलाज करने के साथ-साथ समाज को यह भी जागरूक किया जाना चाहिए कि स्‍पाइनल कॉर्ड की चोट को कैसे रोका जाए, सितम्बर के प्रथम सप्ताह को विश्व भर में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी जागरूकता सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इसी श्रृंखला में हमारे विभाग द्वारा यह आयो‍जन किया गया है।

उन्‍होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत 50 स्कूलों के बच्चों ने इण्टर स्कूल प्ले प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया, जिसमें प्रथम स्थान पर विबग्योर हाई स्कूल, लखनऊ के विद्यार्थी क्रिदय, अनय अग्रवाल, ओम सिंह, रीम अब्दाली एवं अनामिका झुनझुनवाला को प्रथम स्थान, एस0के0डी0 एकाडमी, लखनऊ के विद्यार्थी अंशराज, हर्ष, श्रेय एवं कलश को द्वितीय स्थान तथा सेंट्रल एकाडमी, लखनऊ के विद्यार्थी आर्यन, शायनल, श्रुति, पीयूष, अदिति, शौर्य, पलक एवं मानस ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर स्कूली छात्रों को स्पाइनल कार्ड की चोट, परिवारों और समाज पर उनके प्रभाव और इसे रोकने के तरीके के बारे में भी शिक्षित किया गया।

स्टेज प्ले प्रतियोगिता का विषय था ”स्पाइनल कॉर्ड इंजरी-गतिशीलता से गतिहीनता की गाथा”। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी प्रिवेंशन की बुनियादी चीजों पर बात की गई। इस स्पाइनल काॅर्ड इंजरी के ऐसे मरीजों के वीडियो, जिन्होंने अपनी गाथा सुनाई, उन्हें प्रस्तुत किया गया।

आज के जागरूकता कार्यक्रम का उदघाटन प्रति कुलपति प्रो0 मधुमति गोयल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो0 एस एन संखवार, विभागाध्यक्ष प्रो बीके ओझा, वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रो0 अनिल चन्द्रा और प्रो0 क्षीतिज श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

प्रो ओझा ने कहा कि इस तरह जागरूकता सभी मीडिया सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी और सहायता के बिना नहीं की जा सकती है। उन्‍होंने मीडिया से अपील की कि इस सामाजिक कार्य स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाने में हमारी मदद करें, और हमारा समर्थन करें।