Saturday , July 17 2021

मतभेद भुलायें, अस्तित्‍व बचायें, तय करें व्‍यापक संघर्ष की रूपरेखा

-इप्‍सेफ ने सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों से की एकजुट होने की अपील

–इप्‍सेफ का मत : पूंजीवादी व्‍यवस्‍था लागू करने की नीति अपना रही सरकार

-प्रधानमंत्री को एक बार फि‍र भेजा पत्र, सरकारी व निजी क्षेत्र दोनों को करने दें काम

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। इंडियन पब्लिक सर्विस एम्पलाइज फेडरेशन इप्सेफ की बैठक में यह महसूस किया गया है कि बैंकों, बीमा, बीएसएनएल, एमपीएल, एयर इंडिया, बंदरगाहों, रेल व परिवहन, स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण व्यवस्था का प्रयास है कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की जगह पूंजीवादी व्यवस्था लागू करने की नीति पर सरकार काम कर रही है। किसानों की खेती में भी पूंजीपतियों का आधिपत्य होने की संभावना दिख रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन एवं किसानों के संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं परंतु सरकार मौन है। प्रधानमंत्री ने लोकसभा में साफ-साफ कहा था कि देश की तरक्की के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की जगह निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा/पूंजी निवेश की व्यवस्था की जायेगी।

इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी मिश्रा एवं महामंत्री प्रेमचंद्र ने देशभर के सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र तथा आउटसोर्सिंग/ठेका कर्मचारियों से अपील की है कि वह आपसी मतभेद भूलकर एकजुट होकर अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए व्यापक संघर्ष की रूपरेखा तय करें। एक तरफ पूंजीपति होगा दूसरी तरफ उनकी फैक्ट्रियां संस्थानों में काम करने वाला बंधुआ मजदूर होगा जिसे पगार के रूप में कुछ पारिश्रमिक मिलेगा। पूंजीपति मनमानी दर पर मार्केट में सामग्री मुहैया कराएगा। पेट्रोल डीजल एवं गैस की बढ़ती कीमतें इसका प्रमाण हैं।

इप्सेफ का मत है कि यदि देश का 5 करोड़ कर्मचारी एवं उसका परिवार जिसकी कुल संख्या लगभग 25 करोड़ होती है इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्रों के कर्मचारियों को शामिल किया जाए तो यह संख्या लगभग 40 करोड़ हो जाती है यदि यह एकजुट हो गया तो अपने माफि‍क सरकार बनवा सकते हैं। इसके लिए जाति‍, क्षेत्र एवं धर्म के नारों से दूर रख कर एकजुट होना पड़ेगा। इप्‍सेफ का प्रयास है कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए कि हम वोट कर सकते हैं परंतु वोट लेने के अधिकार से वंचित हैं। हमें डेमोक्रेटिक राइट देने का दबाव बनाना होगा।

इप्सेफ ने देशभर के कर्मचारियों एवं संगठनों से अपील की है कि सार्वजनिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने तथा सरकारी संस्थानों, परिवहन, स्वास्‍थ्‍य आदि में निजीकरण को रोकने का जो वादा करे, उसी को अपना वोट देकर अपने माफिक सरकार बनाने का प्रयास करें।

इप्सेफ ने प्रधानमंत्री से पुनः आग्रह किया है कि देश में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों दोनों को कार्य करने दें इससे किसी की भी मोनोपोली नहीं होगी। सामग्री की गुणवत्ता तथा कीमतों पर भी अंकुश लगेगा।

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