मन, कार्य और वाणी तीनों में होनी चाहिये स्‍वच्‍छता : कुलपति

केजीएमयू के इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस के तत्‍वावधान में गांधी जयंती कार्यक्रमों का समापन

सेहत टाइम्स ब्‍यूरो

लखनऊ। स्‍वच्‍छता हमारे लिए बहुत जरूरी है, और यह स्‍वच्‍छता सिर्फ शरीर की नहीं यह मन, कार्य और वाणी तीनों में होनी चाहिये। सौ वर्ष पूर्व भारत में व्‍यक्ति की औसत आयु सिर्फ 26 वर्ष थी जो अब बढ़कर 69 वर्ष हो गयी है, इसके पीछे दो कोशिशें है उनमें एक है स्‍वच्‍छता तथा दूसरी है बैक्‍टीरिया की खोज जिससे संक्रामक बीमारियों से निपटने में सफलता हासिल हुई।

यह बात आज यहां किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कलाम सेटर में के केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस के तत्वावधान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘स्‍वच्छता सप्ताह कार्यक्रम’ के समापन समारोह में कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने अपने सम्‍बोधन में कही। कार्यक्रम 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित किया गया था। इसके अन्‍तर्गत स्वच्छता जागरूकता अभियान, व्याख्यान प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।

प्रो भट्ट ने कहा कि किसी भी कार्य को करते समय अगर उसमें सेवा की भावना शामिल हो जाए तो हम अपने मार्ग से भटकेंगे नहीं। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी ने सबसे पहले अपने जीवन में स्वच्छता को महत्वपूर्ण स्थान देते हुए इसका प्रचार-प्रसार किया और आमजन को इसकी विशेषताओं से परिचित करवाया।

अपने से ही होनी चाहिये स्‍वच्‍छता की शुरुआत : प्रो मधुमति गोयल

प्रति कुलपति प्रो मधुमति गोयल ने कहा कि स्‍वच्‍छता की शुरुआत हमेशा अपने से होनी चाहिये, उन्‍होंने कहा कि गांधी जी का कहना था कि सफाई करना किसी एक व्‍यक्ति विशेष का कार्य नहीं है, हम सभी को सफाई करनी चाहिये, उन्‍होंने कहा कि मैंने यह बात अपनी जिंदगी में उतारी है, मेरे यहां बाथरूम साफ करने कोई बाहर से व्‍यक्ति नहीं आता है, हम परिवार के लोग स्‍वयं अपना बाथरूम साफ करते हैं। उन्‍होंने पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं से कहा कि आप लोग स्‍वयं भी स्‍वच्‍छता की शुरुआत करें।

सदैव मन में लायें सकारात्‍मक विचार : प्रो विनोद जैन

डीन पैरामेडिकल प्रो विनोद जैन ने कहा कि तन की सफाई के साथ ही मन की सफाई बहुत जरूरी है। उन्‍होंने कहा क्‍योंकि जैसा हम सोचते हैं वैसा ही हम बोलने लगते हैं, और जैसा हम बोलने लगते हैं, वैसा ही हम करते हैं, और जैसा हम करते हैं, वह हमारी आदत बन जाती है, जो हमारी आदत बन जाती है, वह हमारा चरित्र बन जाता है, और जैसा हमारा चरित्र होता है वही हमारे भाग्‍य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि बेहतर भाग्य निर्माण के लिए सदैव अपने मन में सकारात्मक विचार लाएं तथा आमजन को भी इसके लिए प्रेरित करने का कार्य करें।

इस अवसर पर प्रतियोगिताओ तथा नुक्कड़ नाटक के विजेताओं की घोषणा की गई तथा विजेता विद्यार्थियों को कुलपति द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिसमें स्पीच प्रतियोगिता में ईटीसीटी की छात्रा मीनू यादव को प्रथम, डीडीटी की छात्रा अर्चना गौतम को द्वितीय तथा डीएमएलटी के छात्र आशीष चतुर्वेदी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इसी प्रकार पोस्टर प्रतियोगिता के लिए प्रथम पुरस्कार डीओपीटी की छात्रा आकांक्षा दीप, द्वितीय पुरस्कार डीएमएलटी की छात्रा शिवानी वर्मा तथा तृतीय पुरस्कार डीओपीटी की छात्रा चांदनी सैनी ने जीता। इसके साथ ही नुक्कड़ नाटक के लिए प्रथम स्थान पर डिप्लोमा इन आप्टोमेट्री स्टूडेंट्स की टीम सी ने जीता जिसमें आकांक्षा दीप, आर्पिता यादव, अनम सोबिया, अंजलि मिश्रा, श्रद्धा यादव, माया पाण्डेय, सदभ जमिस्ता, अभिषेक कुमार तथा सुजीत कुशवाहा शामिल रहे। इस मौके पर पैथोलॉजी विभाग के डीन स्‍टूडेंट वेलफेयर प्रो जीपी सिंह, डॉ अतिन सिंघई तथा रेडियोडायग्नोसिस विभाग के डॉ अनित परिहार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन दुर्गा गिरि ने किया।