-नेशनल मेडिकल कमीशन भी देता है 70 वर्ष तक काम करने की अनुमति
-उत्तर प्रदेश सरकार के सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया लोहिया संस्थान की फैकल्टी एसोसिएशन ने
-फैसले का विरोध करने वाले एसजीपीजीआई की फैकल्टी फोरम का नाम लिये बिना दिया जवाब

सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सकों की रिटायरमेंट उम्र 70 वर्ष किये जाने के निर्णय का डॉ राम मनोहर लोहिया संस्थान की फैकल्टी फोरम ने स्वागत करते हुए कहा है कि जनहित के प्रति प्रतिबद्ध वह प्रत्येक फैकल्टी चिकित्सक शिक्षक जो कि सबके हित और विकास के विषय में चिंतित है वे सभी सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रश्न चिन्ह उठाया जाना अथवा शिथिलता या निष्क्रियता का बिंदु निरर्थक व तथ्य विहीन है, क्योंकि नेशनल मेडिकल कमीशन फैकल्टी चिकित्सकों को 70 वर्ष की आयु तक कार्य करने की अनुमति प्रदान करती है।
ये विचार डॉ राम मनोहर लोहिया सुपरस्पेशियलिटी एंड फैकल्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ एसएस राजपूत और सचिव डॉ ईश्वर रामधयाल ने आज यहां एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर व्यक्त किये हैं। सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का विरोध करने वालों का नाम लिये बिना कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका व अन्य यूरोपियन तथा विकसित राष्ट्रों में सेवानिवृत्ति की कोई आयु निर्धारित नहीं की गई है। इन विकसित राष्ट्रों के शोध कार्यों और पुस्तकों का हमारे राष्ट्र में अनुसरण किया जाता है तो फिर सेवानिवृत्ति की आयु के विस्तार और भविष्य में इसे समाप्त करने पर विचार क्यों नहीं? माना जा रहा है कि एसोसिएशन का यह बयान एसजीपीजीआई की फैकल्टी फोरम के सचिव की ओर से दिये गये बयान के उत्तर में दिया गया है।
आपको बता दें कि संजय गांधी पीजीआई की फैकल्टी फोरम की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए अपनी विज्ञप्ति में सचिव डॉ संदीप साहू ने सरकार के इस निर्णय पर विरोध जताते हुए कहा था कि यह निर्णय मरीज के हित में नहीं है क्योंकि उम्रदराज हो चुके चिकित्सकों की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ घटना स्वाभाविक है, इसलिए कम क्षमता वाले चिकित्सक की अपेक्षा ज्यादा ऊर्जावान चिकित्सक की सेवाएं मरीज के लिए ज्यादा हित में होंगी। उन्होंने इस सम्बन्ध में फोरम की जीबीएम बुलाने की घोषणा भी की थी।
डॉ राकेश कपूर भी दे रहे हैं सेवाएं
डॉ राम मनोहर लोहिया सुपरस्पेशियलिटी एंड फैकल्टी एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में सरकार के रुख का स्वागत करते हुए कहा गया है कि सेवानिवृत्ति के उपरांत अधिकांश वरिष्ठ फैकल्टी चिकित्सक न केवल बड़े नामी-गिरामी कॉरपोरेट अस्पतालों व प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं प्रदान करने लग जाते हैं वरन् वहां शीर्षस्थ पदों पर विराजमान होकर अध्यक्षता भी करते हैं, जो कि अपने आप में उनके मानसिक और शारीरिक स्वस्थता को प्रमाणित करता है। वर्तमान में इसका ज्वलंत उदाहरण अभी हाल फिलहाल ही में संजय गांधी पी०जी०आई० से सेवानिवृत्त हुए वहां के प्रख्यात निदेशक तथा यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर डॉ० राकेश कपूर का लखनऊ जनपद में तेजी से उभरते हुए मेदांता अस्पताल में निदेशक के पद पर विराजमान होना है।
चिकित्सकों की कमी को पूरा करने में मिलेगी मदद
एसोसिएशन ने कहा है कि इस नाते से मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री का कुशल वरिष्ठ फैकल्टी चिकित्सकों की योग्यताओं व दीर्घ अनुभव को उनके सेवा विस्तार के माध्यम से उपयोग में लाना जनहित और रोगी हित में एक प्रशंसनीय व स्वागत योग्य कदम है। इससे न केवल प्रदेश के सरकारी चिकित्सा शिक्षा प्रशिक्षण केंद्र, मेडिकल कॉलेज चिकित्सालयों में वरिष्ठ अनुभवी चिकित्सकों की घटती हुई संख्या के कारण प्रदेश में रोगियों के उपचार को मजबूती मिलेगी, बल्कि आवश्यकतानुसार बढ़ते हुए मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा प्रशिक्षण की ओर भी एक ठोस कदम सिद्ध होगा।
वरिष्ठों के अनुभव से लाभ ही मिलेगा
एसोसिएशन का कहना है किवर्तमान प्रणाली में वैसे भी जब तक वरिष्ठ फैकल्टी चिकित्सक (विभागाध्यक्ष) सेवानिवृत्त होता है तब तक विभाग के अन्य कनिष्ठ फैकल्टी चिकित्सक आहिस्ता आहिस्ता ही प्रशासनिक कार्यों से अवगत होकर अनुभव ग्रहण करते हैं। सेवानिवृत्ति की उम्र 70 वर्ष होने के उपरांत भी यह प्रक्रिया वैसे ही चलेगी। अनुभव ही वह आधार स्तंभ है जिस पर संपूर्ण चिकित्सकीय पेशा (विशेषकर चिकित्सा शिक्षा प्रशिक्षण और साथ ही में रोगी उपचार) टिका हुआ है क्योंकि चिकित्सकीय ज्ञान हर उम्र के चिकित्सकों में भरपूर होता है, लेकिन अनुभव से ओतप्रोत वरिष्ठ फैकल्टी चिकित्सकों की प्रचुर उपलब्धता से कनिष्ठ नौजवान फैकल्टी चिकित्सकों एवं पी०जी० स्नातकोत्तर स्पेशलिटी व सुपरस्पेशलिटी डिग्री कोर्सेज के छात्रों के प्रशिक्षण एवं मार्ग-प्रशस्तिकरण में भी सुधार होगा।
युवा फैकल्टी के लिए अवसरों की कमी नहीं
एसोसिएशन ने कहा है कि 24.1 करोड़ की सर्वाधिक बहुसंख्यीय आबादी वाले उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा प्रशिक्षण संस्थानों की कमी को शीघ्र दूर करने के लिए इनका तेजी से निर्माण कर विकसित किया जा रहा है। संख्या में तेजी से वृद्धि हो रहे हाल फिलहाल ही में विकसित किए जा रहे नवनिर्मित तथा भविष्य में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के रहते युवा फैकल्टी चिकित्सकों के लिए आज वर्तमान में अनेक अवसर विद्यमान हैं। इनमें से पुराने व नवनिर्मित मेडिकल कॉलेजों में आज तक फैकल्टी के अभाव से 50 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हुए हैं, जिसके फलस्वरुप इस समय पूरा प्रदेश फैकल्टी के गंभीर अभाव से जूझ रहा है। अतः निकट भविष्य में आने वाले दशकों में युवा फैकेल्टी चिकित्सकों के लिए सरकारी संस्थानों में सेवा अवसर बहुतायत में उपलब्ध रहेंगे।
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राजकोष को भी मिलेगा सहारा
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि जनहित में, विशेषकर आगामी तीसरी कोरोना लहर की गंभीरता के दृष्टिगत इस कमी को अतिशीघ्र दूर किया जाना अतिमहत्वपूर्ण और अनिवार्य हो जाता है, जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार सदैव से ही पूरी तरह से प्रतिबद्ध रही है। इस दृष्टि से भी सरकार का फैकल्टी चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्र का 65 वर्ष से 70 वर्ष बढ़ाया जाना एक महत्वपूर्ण सराहनीय कदम है। सेवानिवृत्ति की आयु में 5 वर्ष के विस्तार के फलस्वरुप सेवानिवृत्ति-उपरांत देय आर्थिक लाभों के व्ययभार के भी 5 वर्ष तक टलने से से भी कोरोना महामारी से 2 साल से जूझ रही आर्थिक व्यवस्था के बोझ तले दबे हुए राजकोष को सहारा मिल जाएगा। इस मोहलत के फलस्वरुप हुए वित्तीय लाभ का सीधा असर महामारी के प्रकोप से चरमराई हुई स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया में जुटाए जा रहे संसाधनों पर पड़ेगा।
एसोसिएशन ने कहा है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं सरकारी चिकित्सालयों को सुपरस्पेशलिटी सेवाओं से लैस/ सुसज्जित करने की प्रक्रिया में नवीन विभागों का विस्तार किया जा रहा है, जहां कनिष्ठ युवा फैकेल्टी चिकित्सकों के अपेक्षाकृत वरिष्ठ फैकल्टी चिकित्सकों का मिलना कठिन और लगभग असंभव हो जाता है। इस दिशा में भी रिटायरमेंट उम्र बढ़ाए जाने का यह कदम सहायक सिद्ध होगा।
एसोसिएशन का मानना है किराज्य एवं प्रादेशिक सरकार के लिए यह कदम इसलिए लाभकारी होगा क्योंकि सरकारी तंत्र, सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर प्राप्त हुए 65 वर्ष तक की आयु तक अर्जित अनुभव, विभिन्न शासकीय व सरकारी योजनाओं के अंतर्गत, अभावग्रस्त व जरूरतमंद रोगियों के लोक-कल्याण और उपचार के काम में अन्य 5 वर्षों के लिए और आएगा।
पीजी कोर्स के लिए मानक पूरे करने में मिलेगी मदद
एक और महत्वपूर्ण बिन्दु का जिक्र करते हुएएसोसिएशन ने कहा है कि नेशनल मेडिकल कमिशन अमूमन संविदा पर चयनित फैकेल्टी चिकित्सकों के सापेक्ष पी०जी० सीट पाठ्यक्रम सीटों की अनुमति नहीं देता है क्योंकि इन संविदा चिकित्सकों का अनुबंध अधिकतम 1 वर्ष होता है, जबकि उसके अपेक्षाकृत मेडिकल पी०जी० स्पेशलिटी/ सुपरस्पेशलिटी डिग्री पाठ्यक्रमों की अवधि 3 वर्ष की होती है। ऐसे में सेवानिवृत्ति-आयु विस्तार के फलस्वरुप हुई नियमित वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों की पूर्ति और प्रचुर उपलब्धता अधिक एम०बी०बी०एस० डॉक्टरों को स्पेशलिस्ट (विशेषज्ञ) डिग्री कोर्स के अंतर्गत भर्ती कर उन्हें स्पेशलिस्ट चिकित्सक बनाने में सक्षम सिद्ध होगी।
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा फैकल्टी चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस की अनुमति रहती है, अतः वे अपना संपूर्ण समय मेडिकल कॉलेज कार्यों के लिए नहीं दे पाते हैं। नियमित रेगुलर वरिष्ठ फैकल्टी चिकित्सकों के सेवानिवृत्त होने से पूर्व अतिरिक्त 5 वर्षों के लिए और उपलब्ध रहने से संविदा फैकेल्टी चिकित्सा शिक्षकों की आवश्यकता भी उतनी नहीं रहेगी।
एसोसिएशन ने कहा है कि राज्य सरकार का लंबे समय से अपेक्षित यह अभूतपूर्व कदम, इससे जुड़े सभी हितधारकों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा: निर्धन जरूरतमंद रोगी, चिकित्सा शिक्षा छात्र (एम०बी०बी०एस०/ स्नातक/ स्नातकोत्तर), चिकित्सकीय एवं चिकित्सा शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान, राज्य-प्रदेश और यहां तक कि कनिष्ठ युवा फैकेल्टी चिकित्सक जिनके ऊपर लंबे समय तक वरिष्ठ फैकेल्टी का दिशा निर्देशन व मार्गदर्शक का हाथ रहेगा।
