-यूपी का इकलौता और देश का आठवां हेपेटोलॉजी विभाग
-विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर दो दिवसीय सीएमई का आयोजन

सेहत टाइम्स
लखनऊ। वायरल हेपेटाइटिस जानलेवा हो सकता है और हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है, संजय गांधी पीजीआई लखनऊ में नवगठित हेपेटाइटिस विभाग की पहल चिकित्सा कर्मियों और समाज के लिए गेम चेंजर हो सकती है। इसके अलावा 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन का लक्ष्य ऐसे प्रयासों से ही प्राप्त किया जा सकता है।
यह बात 28 जुलाई को मनाये जाने वाले विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर आज 29 जुलाई को संजय गांधी पी जी आई के हेपेटोलॉजी विभाग ने स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और चिकित्सकों के लिए वायरल हेपेटाइटिस पर शुरू हुए दो दिवसीय पाठ्यक्रम (सीएमई) के आयोजन के मौके पर विशेषज्ञों ने कही। इस कार्यक्रम में हेपेटाइटिस ए से ई सहित वायरल हेपेटाइटिस पर व्यापक व्याख्यान शामिल हैं।
सेहत टाइम्स ने जब डॉ अमित गोयल से पूछा कि आपका नवगठित विभाग हेपेटाइटिस को समाप्त करने की दिशा में किस प्रकार गेम चेंजर हो सकता है, इस पर डॉ अमित ने कहा कि एसजीपीजीआई में नवगठित हेपेटोलॉजी विभाग यूपी में अकेला है, देश की बात करें तो इसके अलावा सात और संस्थानों में हेपेटोलॉजी विभाग पृथक से है। डॉ अमित बताते हैं कि हमारी योजना है कि अगले वर्ष से एसजीपीजीआई में डीएम पाठ्यक्रम शुरू किया जाये। इसके अलावा दो दिनों की सीएमई में सिर्फ वायरल हेपेटाइटिस के बारे में भी प्रतिभागियों को पढाया जायेगा, इन 90 प्रतिभागियों में 80 प्रतिभागी विभिन्न मेडिकल कॉलेजों व हॉस्पिटल के एमडी छात्र हैं, जाहिर है जब ये एमडी छात्र हेपेटाइटिस को लेकर गूढ़ जानकारी प्राप्त करेंगे तो उस जानकारी का लाभ समाज के हर वर्ग के हेपेटाइटिस मरीजों को पहुंचेगा। डॉ अमित ने बताया कि इसी प्रकार संस्थान की एक वेबसाइट ‘स्कूल ऑफ हेपेटोलॉजी’ के जरिये चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान के साथ ही समय-समय पर हेपेटोलॉजी संबंधी जानकारी साझा की जायेगी।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. आर के धीमन ने वायरल हेपेटाइटिस की जांच और शीघ्र उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया। जेआईपीएमईआर, पुड्डुचेरी के निदेशक प्रो राकेश अग्रवाल ने भी छात्रों और प्रतिनिधियों को शिक्षित किया। हेपेटोलॉजी विभागाध्यक्ष के डॉ. अमित गोयल ने टीकाकरण रणनीतियों और नैदानिक तौर-तरीकों पर जोर दिया। हेपेटोलॉजी विभाग के संकाय सदस्य डॉ. अजय मिश्रा और डॉ. सुरेंद्र सिंह ने भी छात्रों को शिक्षित किया और इंटरैक्टिव सत्र सुनिश्चित किए। आपको बता दें कि डॉ. अमित गोयल ने वायरल हेपेटाइटिस पर व्यापक काम किया है और इस पर कई शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, वह वायरल हेपेटाइटिस के लिए डब्ल्यूएचओ सहयोग केंद्र के प्रमुख भी हैं।
इस अवसर पर डॉ राजन सक्सेना के साथ ही डॉ. सुमित रूंगटा, डॉ. अजय कुमार पटवा, डॉ. शिरीष भटनागर सहित कई प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट शामिल हुए।
