-प्रत्येक आम और खास व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी विशेषज्ञ ने
-कोविड वैक्सीनेशन कमेटी के विशेषज्ञ सदस्य डॉ सूर्यकांत से ‘सेहत टाइम्स‘ की विशेष वार्ता

धर्मेन्द्र सक्सेना
लखनऊ। क्या अब सारी परेशानियां दूर हो जायेंगी ?…, क्या हम फिर से उसी प्रकार रहना शुरू कर देंगे जैसे साल भर पहले रहते थे ?… मास्क लगाना अभी जरूरी होगा ?… मास्क अगर लगाना पड़ेगा तो वैक्सीन आने का फायदा क्या हुआ ?… तो वैक्सीन आने का क्या फायदा हुआ ? पाबंदियां जब पहले जैसी ही हैं तो वैक्सीन लगे या न लगे क्या फर्क पड़ता है ?… ये और इससे मिलते-जुलते सवाल वे हैं जो अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन रहे हैं।
ज्ञात हो साल भर पूर्व शुरू हुई वैश्विक महामारी कोविड-19 की दहशत से अब धीरे-धीरे हम उबर रहे हैं, अब जबकि अपने देश भारत में ही रिकॉर्ड समय में तैयार हुई एक नहीं बल्कि दो-दो वैक्सीन से लोगों का टीकाकरण करने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, ऐसे में ये सवाल सभी के जेहन में कौंध रहे हैं। इसका जवाब जानने सहित वैक्सीन को लेकर कई और जानकारियां लेने के लिए ‘सेहत टाइम्स’ ने कोविड वैक्सीनेशन कमेटी में शामिल किये गये विशेषज्ञ सदस्य व कोरोना टास्क फोर्स के सदस्य डॉ सूर्यकांत से बात की।
रक्तबीज की तरह होता है महामारी का वायरस
डॉ सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी महामारी का वायरस राक्षस रक्तबीज की तरह है, वायरस के समूल नाश करने तक या सभी को बीमारी से लड़ने में सक्षम बनाने तक हम निश्चिन्त नहीं रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए जब तक कोविड के प्रति 60 से 70 प्रतिशत जनता इम्यून नहीं होती है तब तक आप यह नहीं कह सकते हैं कि हमने महामारी पर नियंत्रण पा लिया है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म इम्यूनिटी पैदा करती है। इस वैक्सीन में 6 माह की इम्यूनिटी की जो गारंटी है और यह भी संभव है कि इसके बाद कई सालों तक इसकी इम्युनिटी बनी रहे, चूंकि लॉन्ग टर्म की अभी कोई स्टडी आयी ही नहीं है, वजह यह कि दुनिया में ही वैक्सीन कुछ दिन पूर्व आयी है।
जब तक न लग जाये सबके टीका
चूंकि भारत जैसे देश में सभी को टीकाकरण करने में समय लगेगा तो ऐसे में अगर हमने टीकाकरण से 90 करोड़ भारतीयों को वर्ष 2021 में वैक्सीनेट कर दिया तो जब तक सभी वैक्सीनेट न हो जायें तब तक कोविड फैलने का खतरा तो बना रहेगा न। इसलिए मोटे तौर पर यह मानकर चलना होगा कि जब तक सभी को टीका न लग जाये तब तक बाकी सावधानियां जो अभी हम बरतते आ रहे हैं उन्हें जारी रखना होगा।

2021 में सोशल व बायोलॉजिकल वैक्सीनेशन जरूरी
डॉ सूर्यकांत ने बताया कि मैंने कोविड से निपटने के लिए किये जाने वाले प्रबंधन के तहत वर्ष 2020 में हमने पालन किया सोशल वैक्सीन का यानी दो गज की दूरी, मास्क आदि का, वर्ष 2021 में बायोलॉजिकल वैक्सीन की शुरुआत हो रही है इसमें हमें सोशल वैक्सीन और बायोलॉजिकल वैक्सीन दोनों का पालन करना जरूरी है क्योंकि वैक्सीन यह गारंटी तो देती नहीं है कि वायरस शरीर में घुसेगा नहीं, इसलिए जरूरी यह है कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता वायरस से लड़ने लायक बनाना होगा।
वायरस शरीर में घुसने से नहीं रोकती है वैक्सीन
यह पूछने पर कि वैक्सीन के लाभ क्या हैं, डॉ सूर्यकांत ने कहा मेरे विचार से वैक्सीन के तीन उद्देश्य हैं जिनकी यह गारंटी देती है, पहला बीमारी से बचाना, दूसरा बीमारी की तीव्रता से बचाना और तीसरा है बीमारी से होने वाली मृत्यु से बचाना। इन तीनों गारंटी में यह कहीं शामिल नहीं है कि वैक्सीन वायरस को शरीर में घुसने से रोकेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे में वायरस को शरीर में घुसने मास्क रोकेगा, सोशल डिस्टेंसिंग रोकेगी, हाथों की सफाई रोकेगी। उन्होंने कहा कि अगर आपने वैक्सीन लेने के बाद वायरस से बचने के उपाय नहीं अपनाये और वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर गया तो आप तो वैक्सीन लेने के कारण इम्यून हो चुके हैं तो आप तो बच जायेंगे लेकिन आप 28 दिनों के लिए वायरस के कैरियर तो हो गये, चूंकि वायरस का पीरियड 28 दिन का होता है, तो उन 28 दिनों में आपके द्वारा दूसरे लोग जो वैक्सीन नहीं लिये हैं, उन्हें तो संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए यह बायोलॉजिकल वैक्सीन अपनी और दूसरे दोनों की सुरक्षा के लिए लगवाना आवश्यक है।
भ्रम न पालें, डॉक्टरों को देखकर करें विश्वास
उन्होंने कहा कि मेरी सभी से अपील है कि वैक्सीन को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न पालें क्योंकि वैक्सीन सबसे पहले डॉक्टरों को ही लगनी है, ऐसे में जिन्हें किसी प्रकार का भ्रम है वे लोग स्वयं देखेंगे कि डॉक्टरों को वैक्सीन लगाने के बाद किस तरह का अनुभव हुआ, उन्होंने कहा कि मैं स्वयं वैक्सीन के अपने अनुभव बताऊंगा।
