-प्रतिभागियों को दिया गया क्रियाशीलता, सीधा संवाद और रियल केसेज पर आधारित प्रशिक्षण
-देशभर में एक संरचित एवं व्यावहारिक ट्रेनिंग के लिए एसजीपीजीआई रेडियोलॉजी कोर्सेज़ प्रारम्भ

सेहत टाइम्स
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ के रेडियोडायग्नोसिस विभाग द्वारा देशभर में एक संरचित एवं व्यावहारिक ‘सब-स्पेशियलिटी रेडियोलॉजी’ प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से एक नई शैक्षणिक पहल ‘एसजीपीजीआई रेडियोलॉजी कोर्सेज़’ का सफल शुभारंभ 17 जुलाई को किया गया। इस शृंखला का पहला मॉड्यूल ‘कार्डियोथोरेसिक इमेजिंग मास्टरक्लास’ था, जिसने उत्तर प्रदेश के प्रथम विस्तृत हैंड्स-ऑन कार्डियोथोरेसिक इमेजिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में रेडियोलॉजी शिक्षा में एक नया मानदंड स्थापित किया है।
17 जुलाई से प्रारंभ हुए इस तीन दिवसीय मास्टरक्लास की परिकल्पना एवं आयोजन संस्थान के रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष तथा एसजीपीजीआई रेडियोलॉजी कोर्सेज़ की संस्थापक प्रो. (डॉ.) अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। रेडियोलॉजी शिक्षा को संरचित, चिकित्सकीय दृष्टि से प्रासंगिक एवं कौशल-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से नई दिशा देने की उनकी प्रतिबद्धता इस विशिष्ट शैक्षणिक मंच की स्थापना में महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम की कोर्स सेक्रेटरी डॉ. अनुराधा सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, रेडियोडायग्नोसिस विभाग ने इस वैज्ञानिक कार्यक्रम के नियोजन एवं सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देश के प्रमुख संस्थानों के 16 ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ हुए शामिल
इस मास्टरक्लास में देश के प्रमुख संस्थानों के 16 राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों ने सहभागिता की। इनमें एम्स, नई दिल्ली, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई, ज्यूपिटर हॉस्पिटल, मुंबई, यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी, अहमदाबाद, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस), मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ, टेलीरेडियोलॉजी सॉल्यूशंस तथा एसजीपीजीआई लखनऊ के विशेषज्ञ शामिल थे। प्रतिभागियों को देश के अग्रणी कार्डियोथोरेसिक इमेजिंग विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष रूप से सीखने का अवसर प्राप्त हुआ।

पारंपरिक सम्मेलनों से अलग, इस तीन दिवसीय मास्टरक्लास को परस्पर संवादात्मक, केस-आधारित एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया था। प्रतिभागियों ने संरचित रिपोर्टिंग सत्रों, बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) चर्चाओं, वर्कस्टेशन आधारित इमेज व्याख्या, इमेजिंग प्रोटोकॉल के अनुकूलन तथा जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों के व्यावहारिक समाधान पर आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों में सटीक रिपोर्टिंग एवं प्रभावी नैदानिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना था।
कार्यक्रम के वैज्ञानिक पाठ्यक्रम में कार्डियक एमआरआई, कार्डियक सी टी, थोरेसिक इमेजिंग, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD), फेफड़ों के कैंसर की इमेजिंग, मेडियास्टाइनल इमेजिंग, एओर्टिक इमेजिंग, जन्मजात एवं बाल्यावस्था हृदय इमेजिंग सहित संरचित रिपोर्टिंग एवं बहु-विषयक क्लीनिकल समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया।
रेजिडेंट्स एवं रेडियोलॉजिस्ट्स उत्साहित
इस कार्यक्रम को स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स एवं कार्यरत रेडियोलॉजिस्ट्स से अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। प्रतिभागियों ने इसकी व्यावहारिक उपयोगिता, विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संवाद तथा सुव्यवस्थित शिक्षण पद्धति की विशेष सराहना की। हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, विशेषज्ञों के साथ सीधा संवाद तथा वास्तविक चिकित्सकीय मामलों पर आधारित चर्चा ने इस कार्यक्रम को अत्यंत समृद्ध शैक्षणिक अनुभव बनाया।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) अर्चना गुप्ता ने कहा कि एसजीपीजीआई रेडियोलॉजी कोर्सेज़ का उद्देश्य ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित करना है, जो सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक चिकित्सकीय दक्षता के बीच की दूरी को कम करें। उन्होंने कहा कि भविष्य की रेडियोलॉजी शिक्षा को संरचित सोच, साक्ष्य-आधारित रिपोर्टिंग तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण पर आधारित होना चाहिए, जिससे युवा रेडियोलॉजिस्ट आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बदलती आवश्यकताओं का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें।

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