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बरसात में बढ़ जाता है सांप का खतरा, अगर काट ले तो क्या करें, क्या न करें

-डीपीआरए ने जनहित में जारी किये महत्वपूर्ण सुझाव

सेहत टाइम्स

​लखनऊ। बरसात के मौसम में जलभराव के कारण सांप, चूहे एवं अन्य विषैले जीव अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सर्पदंश (सांप के काटने) की घटनाओं में अचानक वृद्धि हो जाती है। इस गंभीर विषय पर जनहित में डिप्लोमा फार्मासिस्ट राजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन (डीपीआरए) की तरफ से कुछ महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत करते हुए संगठन के प्रदेश प्रवक्ता एवं जिलाध्यक्ष लखनऊ, राजीव कुमार (मुख्य फार्मासिस्ट, बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ) ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में घबराने या झाड़-फूंक में समय नष्ट करने के बजाय मरीज को तत्काल निकटतम सरकारी अस्पताल ले जाना चाहिए।

एंटी स्नेक वेनम (ASV) क्या है और यह कितने प्रकार का होता है?

​डीपीआरए की ओर से एएसवी (ASV) की तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि एंटी स्नेक वेनम मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

​मोनोवैलेंट एएसवी (Monovalent ASV): यह केवल किसी एक विशेष प्रजाति के सांप के जहर को बेअसर करने के लिए बनाया जाता है (जैसे केवल कोबरा के लिए)। इसका प्रयोग तब किया जाता है जब यह पूरी तरह तय हो कि मरीज को किस सांप ने काटा है।

​पॉलीवैलेंट एएसवी (Polyvalent ASV – जो भारत में प्रयोग होता है): भारत के सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में पॉलीवैलेंट एएसवी ही उपलब्ध रहता है, क्योंकि घटना के समय सांप की पहचान करना मुश्किल होता है, इसलिए यह एक ही इंजेक्शन भारत के मुख्य चारों जहरीले सांपों (कोबरा, करैत, रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर) के जहर के खिलाफ पूरी तरह असरदार होता है।

एएसवी (ASV) की खुराक और मरीज की गंभीरता (10 वायल का नियम)

​मुख्य फार्मासिस्ट राजीव कुमार ने बताया कि एएसवी की खुराक सांप के आकार या मरीज की उम्र पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मरीज के शरीर में पहुँचे जहर की मात्रा पर निर्भर करती है।

शुरुआती मानक खुराक (Initial Dosage): सर्पदंश का लक्षण (जैसे खून न जमना, सांस फूलना, पलकें झुकना) दिखते ही मरीज को शुरुआत में 8 से 10 वायल (Vials) की पहली खुराक दी जाती है।

मरीज की स्थिति के अनुसार अतिरिक्त वायल: यदि मरीज की हालत गंभीर हो या जहर का असर कम न हो रहा हो, तो डॉक्टर्स 10 और वायल (कुल 20 या उससे अधिक वायल) तक मरीज को देते हैं।

बच्चों में भी समान खुराक: वयस्कों और बच्चों दोनों में जहर को बेअसर करने के लिए एएसवी की खुराक एक समान (8-10 वायल से शुरुआत) रखी जाती है।

​सभी सांप जहरीले नहीं होते: केवल 4 प्रजातियां ही खतरनाक (“बिग फोर”)

​जनसामान्य में यह भ्रम रहता है कि हर सांप जहरीला होता है, जबकि अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते। भारत में मुख्य रूप से चार प्रकार के जहरीले सांप पाए जाते हैं।

​स्पेक्टेकल्ड कोबरा (नाग): इसका जहर तंत्रिका तंत्र (न्यूरोटॉक्सिक) पर असर करता है, जिससे पलकें झुकने लगती हैं और सांस लेने में तकलीफ होती है।

​कॉमन क्रेट (करैत): रात में काटने वाला यह सांप बेहद जहरीला होता है। इसके काटने पर पेट में तेज दर्द और सांस रुकने लगती है।

​रसेल वाइपर (दबोइया): इसका जहर खून (हेमोटॉक्सिक) को प्रभावित करता है, जिससे अत्यधिक सूजन और शरीर से रक्तस्राव होता है।

​सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा): इसके काटने से रक्त का थक्का नहीं बनता और लगातार खून बहता रहता है।

​बचाव के​ लिए डीपीआरए (DPRA) की तरफ से मुख्य सुझाव

​​टॉर्च/रोशनी का प्रयोग: रात में घर से बाहर निकलते समय या अंधेरी जगहों पर हमेशा टॉर्च या रोशनी का इस्तेमाल करें।

​सुरक्षित पहनावा: खेतों, झाड़ियों या जलभराव वाले इलाकों में जाते समय ऊंचे जूते (गमबूट) और पूरी लंबाई की पैंट पहनें।

​घर व आसपास की सफाई: घर के आसपास झाड़ियां, लकड़ी या ईंटों का ढेर जमा न होने दें। चूहों को नियंत्रित रखें, क्योंकि चूहे सांपों को आकर्षित करते हैं।

सोने से पहले सावधानी: सोने से पहले अपने बिस्तर, चारपाई और जूतों को अच्छी तरह झाड़कर देख लें। ग्रामीण क्षेत्रों में नीचे जमीन पर सोने से बचें और मच्छरदानी का प्रयोग करें।

सर्पदंश होने पर प्राथमिक उपचार के लिए डीपीआरए के सुझाव

​क्या करें: मरीज को तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाएं, मरीज को शांत रखें और काटा गया अंग हिलाने न दें। काटी गई जगह के आसपास बंधे गहने, घड़ी या टाइट कपड़े तुरंत हटा दें।

क्या न करें: झाड़-फूंक या तांत्रिक के चक्कर में समय बर्बाद न करें। घाव पर चीरा (कट) न लगाएं, मुंह से जहर चूसने की कोशिश न करें और प्रभावित अंग पर कसकर पट्टी न बांधें।

अपील: सर्पदंश में हर एक मिनट कीमती है। अंधविश्वास छोड़ें और तुरंत सरकारी अस्पताल पहुँचकर मरीज की जान बचाएं।