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दवाओं के MRP और रिटेलर खरीद मूल्य में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत

-दवा व्यापार मंडल (गिरिराज) ने कहा मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता जरूरी : सुरेश कुमार

सुरेश कुमार

सेहत टाइम्स

लखनऊ। दवा व्यापार मंडल (गिरिराज), लखनऊ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दवाओं के MRP और रिटेलर खरीद मूल्य के बीच भारी अंतर पर सवाल उठाना तथा राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करना इस विषय की गंभीरता को दर्शाता है।

यह कहना है संगठन के अध्यक्ष सुरेश कुमार का। उन्होंने कहा कि दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और रिटेलर को मिलने वाले खरीद मूल्य के बीच भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार से सवाल किए जाने का मामला दवा उद्योग एवं दवा व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दवा व्यापार मंडल (गिरिराज), लखनऊ का मानना है कि दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और मरीजों को उचित मूल्य पर दवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही, दवाओं की मूल्य निर्धारण व्यवस्था में निर्माता कंपनियों, सुपर स्टॉकिस्ट, वितरक, थोक विक्रेता और रिटेल केमिस्ट—सभी की भूमिका एवं वास्तविक लागत का निष्पक्ष आकलन भी आवश्यक है।

दो कडि़यों का नहीं, पूरी मूल्य शृंखला का हो अध्ययन

उन्होंने कहा कि कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित करने के सरकारी निर्णय के संदर्भ में भी न्यायालय ने अन्य दवाओं पर ऐसे नियंत्रण की संभावनाओं को लेकर प्रश्न उठाए हैं। दवा व्यापार मंडल का स्पष्ट मत है कि दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता होनी चाहिए, लेकिन किसी भी नई नीति का भार केवल छोटे केमिस्टों और खुदरा दवा व्यापारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए। यदि सरकार ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने की दिशा में कोई कदम उठाती है, तो उसे दवा निर्माण से लेकर मरीज तक दवा पहुंचने की पूरी मूल्य शृंखला का अध्ययन करना चाहिए।

सुरेश कुमार ने कहा कि यह भी आवश्यक है कि दवा कंपनियों द्वारा घोषित MRP, वितरकों को दी जाने वाली छूट, वास्तविक खरीद मूल्य और प्रत्येक स्तर पर होने वाले खर्च का उचित आकलन किया जाए। केवल खुदरा विक्रेता के मार्जिन को निशाना बनाने से दवाओं की कीमतों की समस्या का संपूर्ण समाधान नहीं होगा।

दवा व्यापार मंडल सरकार से मांग करता है कि—

1. दवाओं के मूल्य निर्धारण में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
2. NPPA की निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।
3. दवा कंपनियों की मूल्य नीति और विभिन्न स्तरों पर दिए जाने वाले ट्रेड मार्जिन की समीक्षा हो।
4. मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के साथ छोटे एवं मध्यम दवा व्यापारियों के उचित हितों की रक्षा की जाए।
5. किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले दवा व्यापार के सभी प्रतिनिधि संगठनों से विचार-विमर्श किया जाए।

हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—मरीजों को उचित मूल्य पर दवाएं मिलें, दवा व्यापार में पारदर्शिता हो और ईमानदारी से काम करने वाले केमिस्टों के साथ अन्याय न हो।